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Hindi News देशप्रशांत किशोर की नई थ्योरी- ऐसे 4 तरह के हिंदू और मुसलमान एकजुट हों तो हार सकती है भाजपा

प्रशांत किशोर की नई थ्योरी- ऐसे 4 तरह के हिंदू और मुसलमान एकजुट हों तो हार सकती है भाजपा

प्रशांत किशोर का कहना है कि भाजपा के खिलाफ जमीन पर कुछ नाराजगी तो दिखती है, लेकिन उतना गुस्सा नहीं है कि वह हार जाए। ऐसी स्थिति में मौजूदा पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार लौट भी तो सकती है।

प्रशांत किशोर की नई थ्योरी- ऐसे 4 तरह के हिंदू और मुसलमान एकजुट हों तो हार सकती है भाजपा
prashant kishor to work with andhra pradesh
Surya Prakashलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 20 May 2024 05:21 PM
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चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भविष्य की राजनीति को लेकर गोलबंदी की एक नई थ्योरी दी है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा के विपक्ष में रहने वाला मतदाता जीत चाहता है तो उसे एक चीज करनी होगी। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि 2019 में भाजपा को 38 फीसदी वोट मिले थे। मुसलमान तो देश में इतने नहीं हैं कि वोट इतना कम हुआ। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में हिंदुओं ने ही भाजपा के पक्ष में मतदान नहीं किया। पीके ने कहा कि आधे से ज्यादा हिंदू यदि राष्ट्रवाद, हिंदुत्व के बाद भी भाजपा के खिलाफ था तो यह देखना चाहिए कि वे कौन हैं। पीके ने कहा कि करीब-करीब आधे हिंदू जो भाजपा को वोट नहीं दे रहे हैं, वे 4 प्रकार के हिंदू हैं। 

प्रशांत किशोर ने कहा कि गांधीवादी हिंदू भाजपा के हिंदुत्व को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी तरह अंबेडकरवादी हिंदू भी इनसे असहमत हैं। कम्युनिस्ट हिंदू भी इनकी विचारधारा से असहमति रखते हैं। लोहियावादी जो भारत के सोशलिस्ट लोग हैं, वे भी इनकी विचारधारा के विपरीत हैं। जरूरत है कि इन 4 विचारधाराओं के लोग मुसलमानों के साथ मिलकर गठजोड़ बनाएं। इससे नया विकल्प खड़ा हो सकता है। प्रशांत किशोर कहते हैं कि गांधी ही इन सभी लोगों को एक छतरी के नीचे ला सकते हैं। 

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उन्होंने कहा कि आजादी से पहले की कांग्रेस में गांधी ही वह शख्स थे, जो सबको लेकर चले। आंबेडकर से उनके मतभेद थे, लेकिन फिर भी बाबासाहेब ने उनके नेतृत्व को माना। हालांकि प्रशांत कुमार ने इस इंटरव्यू में यह भी स्वीकार किया कि उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार लौटती दिख रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने नंबरों को सुधार सकती है।  प्रशांत किशोर ने कहा कि जो लोग विपक्ष की बात कर रहे हैं। 

जमीन पर गुस्सा तो है, पर नाराजगी नहीं; राहुल पर दिलचस्प है जवाब

उनका कहना है कि लड़ाई बहुत है। मैं पूछता हूं कि आप जो जमीन पर दिख रहा है, उसमें नाराजगी तो है, लेकिन गुस्सा नहीं है। चुनाव में दो ही चीजें होती हैं कि किसी को हटा ही देना है या फिर दूसरे को लाना है।  इस चुनाव में ये दोनों ही चीजें मिसिंग हैं। ऐसी स्थिति में लगता है कि वोटर बहुत ज्यादा बदल नहीं रहा है। वोटरों से पूछो कि क्या पीएम मोदी से गुस्सा है तो वे कहते हैं कि ऐसा नहीं है। या फिर ऐसा पूछो कि क्या कहीं आपने सुना कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री लाना है, वह चीजें सुधार सकता है। इस पर लोग कहते हैं कि हमने ऐसा भी नहीं सुना है। 

इतनी नाराजगी काफी नहीं, लगता है फिर लौट आएगी भाजपा

चुनावी रणनीतिकार का कहना है कि जमीन पर कुछ नाराजगी दिख रही है। इसकी वजह यह है कि असल में भाजपा को अकेले तो वोट 38 फीसदी ही मिला था। इसका अर्थ है कि 10 में से 6 लोग मोदी के खिलाफ थे और आज भी ऐसा ही हाल दिखता है। हम जमीन पर जाकर जब 6 को मोदी के खिलाफ देखते हैं तो लगता है कि जनता में गुस्सा है, लेकिन इतने ही लोग तो 2019 में भी बोलते थे। ऐसी स्थिति में तो यथास्थिति है और नरेंद्र मोदी को तो ऐसी स्थिति में फिर से सत्ता मिल जाएगी।