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30 अक्तूबर, 2020|3:40|IST

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अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश नहीं, मगर...: प्रशांत भूषण पर 1 रु. का जुर्माना लगा सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

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1 / 2Prashant Bhushan contempt case Supreme Court imposes a fine of Re 1 fine on him

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कोर्ट की अवमानना मामले में दोषी पाए गए प्रशांत भूषण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। न्यायपालिका के खिलाफ अपने दो ट्वीट को लेकर न्यायालय की अवमानना के दोषी ठहराए गए वकील प्रशांत भूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने 1 रुपए का आर्थिक जुर्माना लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जुर्माना राशि 15 सितंबर तक जमा कराने में विफल रहने पर तीन माह की जेल हो सकती है और वकालत से तीन साल तक प्रतिबंधित किया जा सकता है। 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण को शीर्ष अदालत और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे की आलोचना करते हुए दो ट्वीट करने के लिए दोषी पाया था।

अवमानना केस: प्रशांत भूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया 1 रुपए का जुर्माना, नहीं चुकाने पर 3 माह की जेल

अवमानना केस में फैसला सुनाते वक्त सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि फ्रीडम ऑफ स्पीच (अभिव्यक्ति की आजादी) पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता है, मगर दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने की आवश्यकता है। अवमानना मामले में फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्रशांत भूषण 1 रुपए का जुर्माना नहीं भरते हैं तो इस स्थिति में उन्हें तीन महीने की जेल हो सकती है या फिर तीन साल तक वाकलत करने से रोक दिया जाएगा।    

 जानें प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामले में कब-क्या हुआ

27 जून: पहला ट्वीट

प्रशांत भूषण ने पिछले छह वर्षों में सुप्रीम कोर्ट के कामकाज को लेकर दो ट्वीट किए। ट्वीट में आरोप लगाया गया कि इतिहासकार लोकतंत्र के विनाश (जैसा कि भूषण ने आरोप लगाए) में मानने में योगदान देने के रूप में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को चिह्नित करेंगे।

ट्वीट में आरोप लगाया गया , "जब भविष्य में इतिहासकार पिछले छह वर्षों को देखेंते तो वह पाएंगे कि औपचारिक आपातकाल के बिना भी भारत में लोकतंत्र कैसे नष्ट हो गया है। विशेष रूप से इस विनाश में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को चिह्नित करेंगे। इससे भी विशेष रूप से पिछले चार मुख्य न्यायाधिशों की भूमिका को भी चिह्नित करेंगे।”

29 जून: दूसरा ट्वीट

प्रशांत भूषण ने अपने दूसरे ट्वीट में आरोप लगाया, ''सीजेआई ने बिना मास्क या हेलमेट पहने नागपुर में एक भाजपा नेता की 50 लाख रुपये की मोटर साइकिल की सवारी की। उन्होंने ऐसे समय में यह सवारी की जब वह सुप्रीम कोर्ट को लॉकडाउन मोड पर रखते हैं और नागरिकों को न्याय पाने के उसे उनके मौलिक अधिकार से वंचित करते हैं।” 

9 जुलाई: प्रशांत भूषण के खिलाफ याचिका

एक वकील मेहेक माहेश्वरी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर कर प्रशांत भूषण के खिलाफ उनके ट्वीट के लिए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। माहेश्वरी की याचिका पर इतनी सहमति नहीं थी, लेकिन अदालत ने फिर भी माहेश्वरी की याचिका के आधार पर मुकदमा (अपने प्रस्ताव पर) करने का फैसला किया।

 

22 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई, प्रशांत भूषण को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने माहेश्वरी की याचिका के आधार पर मुकदमा दायर किया और प्रशांत भूषण को नोटिस जारी कर उनकी प्रतिक्रिया मांगी। अदालत ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को भी नोटिस जारी किया और अपनी व्यक्तिगत क्षमता में अनुभवी वकील की सहायता मांगी।

2 अगस्त: भूषण ने माफी मांगने से इनकार कर दिया

प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने अपने ट्वीट्स के लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह बोलने की आजादी के तहत आता है। हालांकि इस मामले में यह पहली बार होगा जब प्रशांत भूषण माफी मांगने से इनकार करेंगे। प्रशांत भूषण ने अपने बचाव में सुप्रीम कोर्ट की इसी तरह की आलोचना का हवाला दिया, जिसमें वर्तमान और पूर्व जजों ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की थी।

5 अगस्त: सुनवाई

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति बीआर गवई और कृष्ण मुरारी की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने एक दिन के लिए मामले की सुनवाई की और अपना फैसला सुरक्षित रखा।

14 अगस्त: भूषण को दोषी ठहराया, सजा की सुनवाई टाल दी

कड़े शब्दों में दिए गए फैसले में तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत और सीजेआई के खिलाफ ट्वीट्स में लगाए गए आरोप प्रकृति में दुर्भावनापूर्ण हैं और एससी के खिलाफ लांछन लगाने की प्रवृत्ति है। प्रशांत भूषण से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद नहीं थी। उन्हें अदालत की आपराधिक अवमानना ​​का दोषी माना गया है। इसके बाद कोर्ट ने सजा पर फैसला के लिए मामले को 20 अगस्त तक के लिए टाल दिया।

20 अगस्त: एजी केके वेणुगोपाल ने अदालत से भूषण को सजा नहीं देने का आग्रह किया

जब सजा पर सुनवाई हो रही थी तो सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल केके केके वेणुगोपाल ने प्रशांत भूषण को सजा नहीं देने की अपील कोर्ट से की।

भूषण ने कहा कि वे माफी नहीं मांगेंगे और राष्ट्र पिता महात्मा गांधी को उद्धृत करेंगे:

प्रशांत भूषण ने कहा, “मैं दया नहीं मांगूंगा। मैं भव्यता की अपील नहीं करता हूं। मैं किसी भी दंड को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकर करने के लिए यहां हूं, जो कि अदालत ने निर्धारित किया है। यह एक नागरिक का सर्वोच्च कर्तव्य है।" अदालत ने भूषण को सोचने के लिए समय दिया और सुनवाई समाप्त की।

24 अगस्त: भूषण ने अपना पक्ष रखा
प्रशांत भूषण ने शीर्ष अदालत के समक्ष एक और बयान दिया कि वह माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने कहा कि उनके ट्वीट के माध्यम से उनके द्वारा व्यक्त किए गए विचारों ने उनकी विश्वासनीयता का प्रतिनिधित्व किया और परिणामस्वरूप इस तरह के विश्वासों को व्यक्त करने के लिए एक माफी निष्ठाहीन होगी।

उन्होंने कहा, ''माफी, माफी मात्र नहीं हो सकती है और किसी भी माफी को ईमानदारी से मांगनी चाहिए। अगर मैं इस अदालत के सामने एक बयान से पीछे हट जाता हूं और माफी की पेशकश करता हूं, तो मेरी नजर में मेरे विवेक और सुप्रीम की अवमानना ​​होगी, जिसके लिए मैं सर्वोच्च सम्मान में रखता हूं।" 

25 अगस्त: सजा सुनाए जाने पर फैसला सुरक्षित
अदालत ने भूषण को उसके एक दिन पहले दिए गए बयान पर सुनवाई की। जबकि एजी ने सुप्रीम कोरट से प्रशांत भूषण को चेतावनी देकर छोड़ देने का आग्रह किया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा तब तक नहीं किया जा सकता जब तक भूषण अपने ट्वीट के लिए खेद व्यक्त नहीं करते। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को बंद नहीं करेगा और प्रशांत भूषण को दी जाने वाली सजा पर अपना फैसला सुरक्षित रख दिया।

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  • Web Title:Prashant Bhushan contempt case Supreme Court imposes a fine of Re 1 fine on him says Freedom of speech can not be curtailed