DA Image
8 अक्तूबर, 2020|3:09|IST

अगली स्टोरी

प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 के अवमानना केस में सुप्रीम कोर्ट ने AG से मांगी मदद, 12 अक्टूबर को सुनवाई

supreme court order on prashant bhushan contempt case sentencing on monday

सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ लंबित 2009 के अवमानना मामले में गुरुवार को अटॉर्नी जनरल के.के वेणुगोपाल से मदद करने का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने तहलका पत्रिका में प्रकाशित साक्षात्कार में शीर्ष अदालत के कुछ तत्कालीन पीठासीन और पूर्व न्यायाधीशों पर कथित रूप से लांछन लगाने को लेकर प्रशांत भूषण और तेजपाल को नवंबर 2009 में अवमानना के नोटिस जारी किए थे। तेजपाल उस वक्त इस पत्रिका के संपादक थे।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के लिए यह मामला आया। प्रशांत भूषण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि इस मामले में कानून के बड़े सवालों पर विचार होना है और ऐसी स्थिति में इसमें अटॉर्नी जनरल की मदद की जरूरत होगी।

रद्द हो सकता है प्रशांत भूषण का वकालत करने का लाइसेंस

राजीव धवन ने कहा, 'हम चाहते हैं कि हमारे द्वारा दिए गए सवालों पर अटॉर्नी जनरल इस न्यायालय की मदद करें। न्यायालय ने भी कुछ सवाल तैयार किये हैं। इस मामले में विचार के लिये उन्होंने कुछ सवाल दिये थे।' पीठ ने निर्देश दिया कि इसका सारा रिकार्ड अटॉर्नी जनरल के कार्यालय को दिया जाये और इसके साथ ही अवमानना के इस मामले को 12 अक्टूबर के लिये सूचबद्ध कर दिया। 

शीर्ष अदालत ने अवमानना के एक अन्य मामले में दोषी ठहराये गये अधिवक्ता प्रशांत भूषण पर 31 अगस्त को एक रुपए का सांकेतिक जुर्माना लगाया था। यह मामला प्रशांत भूषण के न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक दो ट्वीट का था, जिसमें न्यायालय ने कहा था कि उन्होंने न्याय प्रशासन की संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया था।

न्यायालय ने 2009 का अवमानना मामला 25 अगस्त को किसी दूसरी पीठ को भेजने का निश्चय किया था, जिसे अभिव्यक्ति की आजादी और न्यायपालिका के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित व्यापक सवालों पर विचार करना है।

फाइन भर चुके प्रशांत भूषण ने कोर्ट की अवमानना शक्ति को बताया खतरनाक

राजीव धवन ने न्यायालय से कहा था कि उन्होंने संवैधानिक महत्व के 10 सवाल उठाये हैं जिन पर संविधान पीठ द्वारा विचार करने की आवश्यकता है। इस मामले की न्यायालय ने समय के अभाव की वजह से 25 अगस्त को सुनवाई नहीं की थी क्योंकि पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा दो सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे थे। इस मामले में उठाये गये सवालों पर अटॉर्नी जनरल की मदद लेने के धवन के आग्रह से पीठ सहमत नहीं थी और उसने कहा था कि बेहतर होगा कि इसे प्रधान न्यायाधीश द्वारा गठित की जाने वाली नयी पीठ पर छोड़ दिया जाये।

शीर्ष अदालत ने 17 अगस्त को इस मामले में कुछ सवाल तय किये थे और संबंधित पक्षों से इन तीन सवालों पर विचार के लिये कहा था। ये सवाल थे-क्या न्यायाधीशों और न्यायपालिका के खिलाफ भ्रष्टाचार संबंधी बयान दिये जा सकते हैं और किन परिस्थितियों में ये दिये जा सकते हैं और पीठासीन तथा सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के मामले में क्या प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

प्रशांत भूषण ने भी अपने 10 सवाल दाखिल किये थे और इन पर संविधान पीठ द्वारा विचार करने का अनुरोध किया था। भूषण के सवालों में शामिल था कि , ''क्या न्यायपालिका के किसी भी क्षेत्र में भ्रष्टाचार के बारे में वास्तविक राय व्यक्त करना न्यायालय की अवमानना माना जायेगा? क्या इस तरह की राय व्यक्त करने वाले व्यक्ति को इसे सही साबित करना होगा या अपनी राय को वास्तविक बताना ही पर्याप्त होगा।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Prashant Bhushan 2009 Contempt Case Supreme Court Seeks Attorney General KK Venugopal Help