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कांग्रेस नेता ने प्रणब मुखर्जी को लिखा खत, RSS कार्यक्रम में न जाने का किया अनुरोध

प्रणब मुखर्जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। इस मुद्दे पर एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने प्रणब मुखर्जी से धर्मनिरपेक्षता के हित में अपने निर्णय पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री सीके जाफर शरीफ ने पूर्व राष्ट्रपति को पत्र लिख कर उनके इस कदम पर आश्चर्य व्यक्ति किया और कहा कि आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने के बारे में जानबूझ कर वह अन्य धर्मनिरपेक्ष लोगों की भांति ही स्तब्ध हैं।
       
शरीफ ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर उनका मानना है कि जो व्यक्ति दशकों तक राजनीति में धर्मनिरपेक्ष रहा, विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं, जिसमें राष्ट्रपति जैसे उच्च पद भी शामिल है, उनका संसदीय चुनाव से पहले संघ परिवार के कार्यक्रम में जाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, ''मैं आपसे इस पर फिर से विचार करने और धर्मनिरपेक्षता तथा देश हित में संघ परिवार के कार्यक्रम में जाने से बचने का अनुरोध करता हूं। 

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के आरएसएस मुख्यालय जाने पर विवाद

कांग्रेस प्रवक्ता टॉंम वडक्कन ने मंगलवार को कहा कि मीडिया के जरिए यह पता चला है कि इस तरह का कोई निमंत्रण आया है। अभी कार्यक्रम नहीं हुआ है, इसलिए वह इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। जहां तक पार्टी की विचारधारा का प्रश्न है, हमारी और उनकी विचारधारा में बहुत फर्क है। कांग्रेस ने कभी अपनी विचारधारा से कोई समझौता नहीं किया है।

अधिकारिक तौर पर पार्टी की चुप्पी के बावजूद संदीप दीक्षित सवाल उठा रहे हैं। दीक्षित का कहना है कि वह प्रणब मुखर्जी को काफी लंबे अरसे से जानते हैं। उन्होंने संघ के बारे में उनके विचार भी सुने हैं। पूर्व राष्ट्रपति संघ के कार्यक्रम में जा रहे हैं, तो क्या वह आरएसएस के बारे में अपनी राय बताएंगे। क्या आरएसएस में बदलाव आया है। संघ ने कार्यक्रम में एक ऐसे व्यक्ति को आमंत्रित किया है,जो उनके बारे में यह विचार रखता है।

नागपुर में RSS के मुख्यालय जाएंगे प्रणब, स्वयंसेवकों को करेंगे संबोधित

संदीप दीक्षित ने कहा कि आरएसएस और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के व्यक्तित्व में काफी अंतर है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि संघ के कार्यक्रम में प्रणब मुखर्जी क्या कहेंगे। दीक्षित नहीं पार्टी के दूसरे नेता भी प्रणब मुखर्जी के आरएसएस का निमंत्रण स्वीकार करने को लेकर अचंभित है। वह कहते हैं कि वर्ष 1976-77 और बाबरी मसजिद विध्वंस के बाद आरएसएस पर पाबंदी लगाई गई, उस वक्त प्रणब मुखर्जी सरकार का हिस्सा थे। ऐेसे में वह किसी ऐसी संस्था के मुख्यालय कैसे जा सकते हैं, जिस संस्था पर उन्होंने दो बार पाबंदी लगाई हो। 

संघ पाक का कोई संगठन नहीं

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने का न्योता स्वीकार करने पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है। इस पर उठ रहे सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ पाकिस्तान का कोई आईएसआई नहीं है। यह राष्ट्रवादियों का संगठन है।

मुखर्जी को सात जून को नागपुर में आरएसएस के संघ शिक्षा वर्ग-तृतीय वर्ष समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस कार्यक्रम में वह अपने विचार भी रखेंगे।

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  • Web Title:Pranab Mukherjee attending RSS meet has stunned secular people Congress leader Jaffer Sharief