डाकघर में निजी कंपनी के जिम्मे होगी खातों की सुरक्षा
डाक विभाग बचत खातों और डाक बीमा योजनाओं पर नजर रखने के लिए निजी कंपनियों को बतौर सिस्टम इंटिग्रेटर तैनात करेगा। यह सिस्टम गड़बड़ियों की जानकारी तुरंत विभाग के अधिकारियों को देगा। इससे अवैध निकासी की घटनाओं पर अंकुश लगेगा और वित्तीय सेवाएं अधिक सुरक्षित होंगी।

मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। डाक विभाग बचत खातों और डाक बीमा योजनाओं पर नजर रखने के लिए सिस्टम इंटिग्रेटर की मदद लेगा। इसके लिए निजी कंपनियों को बतौर सिस्टम इंटिग्रेटर तैनात करने की तैयारी है। सिस्टम इंटिग्रेटर बचत और बीमा खातों के साथ डाक विभाग के अन्य प्रशासनिक कार्यों के बीच तालमेल बैठाएंगे। इससे खातों में होनी वाली किसी भी तरह की गड़बड़ी की जानकारी तुरंत विभाग के वरीय अधिकारियों को अलर्ट के तौर पर मिल जाएगी。
डाक विभाग की महत्वाकांक्षी योजना
उत्तरी डाक परिमंडल के पीएमजी पवन कुमार सिंह ने बताया कि यह डाक विभाग की महत्वाकांक्षी योजना है। इसके लागू हो जाने से बचत खातों के साथ ही बीमा खातों में होने वाली गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। सिस्टम इंटिग्रेटर बचत और बीमा खातों को विभिन्न बैंकिंग, डाक और तकनीकी प्रणालियों से एक साथ जोड़ता है। यह कोर बैंकिग के साथ ही पोस्टल विभाग के नेट बैंकिंग, डाक पत्र बुकिंग और वितरण के लिए शुरू डिजीपिन तक पर पैनी नजर रखेगा। ऐसे में करोड़ों ग्राहकों को सभी वित्तीय सेवाएं निर्बाध मिल सकेंगी।
सुरक्षा और डाटा प्रबंधन
पीएमजी ने बताया कि देश भर के 1.55 लाख से अधिक डाकघर एक ही वाइड एरिया नेटवर्क से जुड़ सकेंगे। इससे डाटा प्रबंधन करने के साथ ही विभागीय कार्यों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। इसका लाभ मुजफ्फरपुर जिले के 59 उप डाकघरों के अलावा 260 शाखा डाकघरों में लेनदेन पहले की अपेक्षा अधिक सुरक्षित हो जाएगा। रियल टाइम में पता चल जाएगा कि किस सिस्टम और किसके आईडी से कार्य संपादित किया गया है।
अवैध निकासी की घटनाएं
दरअसल, पिछले चार-पांच साल में प्रधान डाकघर के अलावा अन्य डाकघरों में बचत खाता के अलावा बीमा खाता से भी करोड़ रुपये की अवैध निकासी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनकी जांच में कर्मचारियों के आईडी और पासवर्ड के उपयोग की बात सामने आई। प्रधान डाकघर से पेंशन खातों से 95 लाख की अवैध निकासी और मनिका हरिकेश उप डाकघर से 15 लाख की अवैध निकासी के मामले बेहद चर्चित रहे। इसके अलावा, आरपीएलआई में तीस लाख का अतिरिक्त भुगतान का मामला भी सामने आया था। नई व्यवस्था से ऐसी गड़बडियों पर लगाम लगने की उम्मीद है।


