Population control in India Plea in Supreme Court against Delhi High Court order BY BJP Leader - जनसंख्या नियंत्रण पर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी, जानें क्या दिया तर्क DA Image
15 दिसंबर, 2019|9:51|IST

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जनसंख्या नियंत्रण पर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी, जानें क्या दिया तर्क

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देश में जनसंख्या नियंत्रण के लिये दो बच्चों के मानदंड सहित कुछ उपायों पर अमल के लिये उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी है। यह याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर की है। उच्च न्यायालय ने तीन सितंबर को अपने आदेश में कहा था कि इस बारे में कानून बनाना अदालत का नहीं बल्कि संसद और विधानमंडल का काम है।

शीर्ष अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में आदेश पारित करते समय इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया कि संविधान के अनुच्छेद 21 और 21ए में प्रदत्त शुद्ध वायु, पेय जल, स्वास्थ्य, शांति से सोना, आवास, आजीविका और शिक्षा का अधिकार जनसंख्या पर नियंत्रण के बगैर सभी नागरिकों को नहीं मिल सकता है।

याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने इस तथ्य को भी नजरअंदाज किया कि विस्तृत और विभिन्न स्रोतों से एकत्र की गयी जानकारी के बाद 1976 में संविधान के 42वें संशोधन के माध्यम से सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची में 20-ए प्रविष्टि शामिल की गयी थी। यह केन्द्र और राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के लिये कानून बनाने की अनुमति देती है।

याचिका के अनुसार अदालत ने इस तथ्य पर भी ध्यान नहीं दिया कि देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश एम एन वेंकटचलैया की अध्यक्षता वाले संविधान समीक्षा आयोग ने 31 मार्च, 2002 को विस्फोटक रूप ले रही आबादी पर अंकुश के लिये संविधान में अनुच्छेद 47-ए शामिल करने की सिफारिश की थी।

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