संसद के समीकरण और बड़े एजेंडे को लेकर एक्शन मोड में शाह
नई दिल्ली। अलग-अलग राज्यों की सियासत अब दिल्ली की ओर बढ़ रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के एक्शन मोड में आने से बड़े बदलावों की संभावना बढ़ी है। विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क के साथ, केंद्र सरकार संसद सत्र में महत्वपूर्ण विधेयक लाने की तैयारी में है।

नई दिल्ली। अलग-अलग राज्यों में चल रही सियासी चहलकदमी का केंद्र अब दिल्ली शिफ्ट होता नजर आ रहा है। 20 जुलाई को शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का एक्शन मोड में आना कई बड़े सियासी घटनाक्रम का संकेत दे रहा है। मंगलवार को दिल्ली में शाह से उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मुलाकात हुई थी। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन भी उनसे मिले। महाराष्ट्र की सियासत में काफी महत्वपूर्ण किरदार बनकर उभरे उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की मुलाकात भी गृहमंत्री से हुई। इन मुलाकातों का भले ही अलग-अलग एजेंडा रहा हो, लेकिन एक साझा बिंदु स्पष्ट था कि आने वाले दिनों में बड़े बदलावों और चुनौतियों के लिए राज्य और केंद्र की तैयारियां एक लाइन पर होना चाहिए। केंद्र सरकार सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक लाना चाहती है। इनमें नारी वंदन संशोधन अधिनियम और परिसीमन विधेयक शामिल हैं। लेकिन यह तभी संभव होगा जब नंबर को लेकर केंद्र सरकार आश्वस्त हो। साथ ही केंद्रीय स्तर पर मंत्रिमंडल में बदलाव या विस्तार के साथ भाजपा की नई केंद्रीय टीम का गठन भी लंबित है। इन सभी एजेंडा पर आगे बढ़ने के लिए अलग-अलग स्तरों पर कई बैठकों का दौर पूरा हो चुका है।
केंद्र का प्रमुख एजेंडा
सूत्रों ने कहा कि केंद्र के सामने सबसे बड़ा एजेंडा फिलहाल लोकसभा और संसद में एनडीए की ताकत बढ़ाना है। तृणमूल का बड़ा धड़ा एनडीए के साथ आया है। शिवसेना उद्धव गुट के छह सांसद टूटकर एकनाथ शिंदे के साथ आए हैं और माना जा रहा है कि अब वे एनडीए के साथी होंगे। महाराष्ट्र में शरद पवार की पार्टी को लेकर भी तरह-तरह की अटकलें हैं। पवार गुट के कई नेता एनडीए के साथ आने की इच्छा जता रहे हैं। केंद्र सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि संसद में भाजपा और एनडीए की संख्या लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि इस नए समीकरण के सहारे वह अपने कई प्रमुख एजेंडों को सफलता पूर्वक आगे बढ़ाने में सक्षम हो। हालांकि, अभी भी संवैधानिक बदलाव के लिए जरूरी संख्या बल पूरा नहीं हुआ है। सूत्रों ने कहा कि शाह सभी प्रमुख राजनीतिक एजेंडों के मद्देनजर लगातार बैठकें कर रहे हैं। इसके अलावा अलग-अलग स्तरों पर भी कई अन्य बैठकें पर्दे के पीछे हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश की स्थिति
योगी की मुलाकात पर सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव मोदी सरकार के लिए बहुत अहम है। प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान खोई जमीन को वापस लाने की चुनौती पार्टी और सरकार के सामने है। अभी प्रदेश में नई टीम बनी है। इस टीम को भी जिम्मेदारी देकर सक्रियता बढ़ानी है। आने वाले दिनों में प्रदेश में चुनावी कवायद अचानक काफी तेज होगी। केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि प्रदेश का सही जमीनी फीडबैक सामने रखकर एक टीम के रूप में चुनाव लड़ा जाए। प्रदेश में मतभेद दूर करना केंद्र की प्राथमिकता है। जिसकी कवायद नितिन नवीन के यूपी दौरे के वक्त नजर आई थी। इसके अलावा सरकार विपक्ष द्वारा उठाये जाने वाले संभावित मुद्दों से निपटने की भी तैयारी कर रही है। सरकार को पता है कि संसद सत्र के दौरान विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण के मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगा। स्वयं प्रधानमंत्री की निगाह पूरे मामले पर है। मामला कोर्ट में भी है। केंद्र इस मामले में बहुत साधे हुए तरीके से आगे बढ़ना चाहता है। इस संबंध में भी मुख्यमंत्री से फीडबैक लिया गया है। साथ ही केंद्र ने अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट भी हासिल की है। सूत्रों ने यह भी दावा किया कि उत्तरप्रदेश में कई अन्य दलों के नेता भाजपा नेतृत्व के संपर्क में बताए जा रहे हैं उनको लेकर भी केंद्रीय स्तर पर फीडबैक लिया जा रहा है।
महाराष्ट्र का महत्व
महाराष्ट्र इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। क्योंकि तृणमूल के बाद अब सबसे बड़ी चहलकदमी वहां देखने को मिल रही है। मंगलवार को एकनाथ शिंदे के साथ उद्धव गुट के छह बागी सांसद भी शाह के साथ मुलाकात में मौजूद थे। सूत्रों ने कहा संसद सत्र के पहले अभी और भी चहलकदमी देखने को मिलेगी। केंद्र सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों से भी लगातार संपर्क बनाए हुए है और इसके लिए पर्दे के पीछे कई दौर की बातचीत चल रही है।
संख्याबल की स्थिति
सूत्रों के अनुसार, अब तक एनडीए के 299 सांसदों के अलावा एनसीपीआई के 20 और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के चार सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस तरह सरकार के पक्ष में कुल 323 सांसद दिखाई दे रहे हैं। यदि लोकसभा की प्रभावी सदस्य संख्या पूरी रहती है, तो संविधान संशोधन विधेयक पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में सरकार की नजर अब उन दलों पर हैं जिनका रुख अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। सबसे अधिक चर्चा डीएमके के 22 सांसदों को लेकर है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि डीएमके विधेयक का समर्थन करेगी, विरोध करेगी या मतदान से दूरी बनाए रखेगी। इसी तरह एनसीपी (एसपी) के आठ सांसदों का रुख भी काफी महत्वपूर्ण होगा। एनसीपी पवार गुट के नेताओं की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से मुलाकात और पवार की सक्रियता से कई तरह की अटकलों को बल मिला है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ये दल साथ आते हैं तो संसद में सरकार की राह आसान हो सकती है। वहीं, यदि वे महत्वपूर्ण विधेयकों पर मतदान में हिस्सा नहीं लेते, तो प्रभावी सदस्य संख्या कम होने से दो-तिहाई बहुमत का आवश्यक आंकड़ा भी घट सकता है। सूत्रों का कहना है कि सरकार विभिन्न विपक्षी दलों के साथ लगातार संवाद में है ऐसे में लोकसभा का अंकगणित आने वाले समय में और दिलचस्प हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के बारे में
Pankaj Kumar Pandeyपंकज कुमार पाण्डेय हिंदुस्तान मीडिया ग्रुप के साथ जुड़े वरिष्ठ पत्रकार और असिस्टेंट एडिटर हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें लगभग 24 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर और हिंदुस्तान जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में नेशनल रिपोर्टिंग की है। राजनीति, आंतरिक सुरक्षा, शिक्षा और विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ मानी जाती है।
और पढ़ें

