झारखंड में क्या लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई हैं : सुदेश
आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने झारखंड की शासन व्यवस्था और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अप्रांसगिकता और लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के ध्वस्त होने के संकेत दिए। मांगों को लेकर प्रवर्तन में असामान्यताएँ चिंताजनक हैं, विशेष तौर पर सरकार में शामिल दलों के लिए संवाद की कमी।

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने राज्य की वर्तमान शासन व्यवस्था और लोकतांत्रिक परंपराओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कहा कि हाल की कुछ घटनाओं ने राज्य की जनता के मन में कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अप्रासंगिक हो गए हैं? क्या झारखंड में लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गई हैं? क्या सरकार का राजनीतिक नेतृत्व विफल हो गया है? क्या शासन पर मुख्यमंत्री की पकड़ कमजोर हो गई है? लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत स्थापित परंपराओं, मर्यादाओं एवं शासन-व्यवस्था से जुड़े मानदंडों से विचलन की हालिया घटनाएं चिंताजनक हैं।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू को मुख्यमंत्री से समय नहीं मिलने के कारण अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन राज्य के मुख्य सचिव को सौंपना पड़ा। इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि सरकार में शामिल कांग्रेस एवं झामुमो के प्रतिनिधिमंडलों को भी अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन मुख्यमंत्री के बजाय मुख्य सचिव को सौंपना पड़ रहा है। यदि सत्ता पक्ष के सहयोगी दलों को भी संवाद के लिए मुख्यमंत्री की उपलब्धता नहीं है, तो यह शासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।उन्होंने जेपीएससी जेएसएससी से जुड़े कथित घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन मांगों को लेकर मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपे गए हैं, उसी संदर्भ में मुख्य सचिव कार्यालय से जुड़े एक सरकारी कर्मी की सीआईडी द्वारा गिरफ्तारी की खबर सामने आई है। इस मामले में संबंधित कर्मी से पूछताछ के दौरान क्या-क्या तथ्य सामने आए हैं, इसकी जानकारी राज्य की जनता को मिलनी चाहिए। सीआईडी को पूरे मामले में पारदर्शिता के साथ तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए।


