जमशेदपुर : नक्सल विरोधी सर्च अभियान में निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने 5 घंटे बनाया बंधक
बाटालुका गांव में शनिवार की सुबह पुलिस की नक्सल विरोधी सर्च अभियान को स्थानीय ग्रामीणों का विरोध झेलना पड़ा। ग्रामीणों ने पुलिस टीम को लगभग पांच घंटे तक बंधक बनाए रखा और नक्सलियों को छोड़ने की मांग की। बाद में स्थानीय जिला पार्षद की पहल पर मामला सुलझा और पुलिस टीम को वहां से जाने दिया गया।

बाटालुका गांव स्थित कितापाठ जाहेरथान के समीप शनिवार की सुबह नक्सल विरोधी सर्च अभियान पर निकली पुलिस की एलआरपी टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। लाठी-डंडों से लैस सैकड़ों ग्रामीणों ने पटमदा थाना प्रभारी समेत पूरी टीम को करीब पांच घंटे तक बंधक बनाए रखा। टीम में भुइयांसिनान कैंप के दर्जनों कोबरा बटालियन के जवान भी शामिल थे। सुबह करीब पांच बजे से 10 बजे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान बारिश के बीच पुलिसकर्मी वरीय अधिकारियों के निर्देश का इंतजार करते रहे। सूत्रों के अनुसार, पटमदा थाना प्रभारी विष्णु चरण भोगता के नेतृत्व में पुलिस एवं सुरक्षा बलों की टीम शुक्रवार शाम दलमा रेंज के विभिन्न इलाकों में नक्सलियों की तलाश में अभियान पर निकली थी।
बताया जाता है कि अभियान के दौरान एक करोड़ के इनामी भाकपा माओवादी आकाश उर्फ असीम मंडल और 15 लाख के इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन समेत अन्य नक्सलियों की तलाश की जा रही थी। टीम ने झुंझका, मेघादह, राजाबासा, अपो और सारी होते हुए बाटालुका गांव में भी तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस द्वारा गांव के कई घरों में नक्सलियों और उनके कथित मददगारों की तलाश करने की बात सामने आई। बताया जाता है कि शनिवार सुबह करीब पांच बजे एलआरपी टीम बाटालुका निवासी लखन सोरेन और उनकी दोनों पत्नियों भारती सोरेन एवं सूमी सोरेन को साथ लेकर पैदल लौट रही थी। इस दौरान घर में मौजूद लखन सोरेन की 10 वर्षीय बेटी पार्वती के रोने और शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण जुटने लगे। देखते ही देखते बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर घटनास्थल पर पहुंच गए और पुलिस टीम को चारों ओर से घेर लिया। ग्रामीणों ने लखन सोरेन और उनकी दोनों पत्नियों को छोड़ने के साथ ही बुधवार से पटमदा थाने में हिरासत में रखे गए बाटालुका निवासी युधिष्ठिर महतो को भी मुक्त करने की मांग की। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि मांग पूरी होने तक पुलिस टीम को वहां से जाने नहीं दिया जाएगा। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर मामले को सुलझाने का प्रयास शुरू किया गया। सुबह करीब नौ बजे स्थानीय जिला पार्षद प्रदीप बेसरा की पहल पर पटमदा थाना से युधिष्ठिर महतो को घटनास्थल पर लाया गया। इसके बाद संबंधित लोगों को छोड़ने पर ग्रामीणों ने पुलिस टीम को वहां से जाने दिया। करीब पांच घंटे बाद स्थिति सामान्य हो सकी। पटमदा का बाटालुका गांव एक दशक से अधिक समय से नक्सल विरोधी पुलिस अभियानों के रडार पर रहा है। गांव दलमा की तराई के उन इलाकों के बीच है, जहां से जंगल के रास्तों के जरिए आवाजाही अपेक्षाकृत आसान रही है।


