इंस्पेक्टर नीरज मालिक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
इंस्पेक्टर नीरज मालिक की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

बुलंदशहर में युवक का अपहरण कर 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगने, छह लाख रुपये की वसूली, मारपीट, ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के मुकदमे में नामजद इंस्पेक्टर नीरज मलिक की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), न्यायालय संख्या-2 सुधाकर दबे की कोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने गंभीर अपराध पाते हुए याचिका को खारिज कर दिया है.
शिकायतकर्ता का आरोप
बुलंदशहर के सिकंदराबाद निवासी सलमान ने डीआईजी मेरठ को एक शिकायती पत्र देते हुए आरोप लगाया था कि 30 अप्रैल को तत्कालीन इंस्पेक्टर सिकंदराबाद नीरज मलिक, दरोगा अरुण कुमार, कांस्टेबल योगेश समेत सात लोगों ने उसे गुलावठी टोल प्लाजा से उठाया और सिकंदराबाद कोतवाली ले गए। यहां धमकी देते हुए 20 लाख की मांग की। रकम नहीं देने पर ड्रग्स केस में फंसाने, एनकाउंटर करने और परिवार को फंसाने की धमकी दी गई थी। छह लाख रुपये वसूली के बाद छोड़ा। डीआईजी ने पूरे मामले में जांच शुरू कराई। इसी आधार पर 31 जुलाई को नीरज मलिक समेत सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ सिकंदराबाद थाने में बीएनएस की धारा 115(2), 308(7), 127(2), 352, 351(2) और धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। इंस्पेक्टर नीरज मलिक ने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट में याचिका लगाई थी.
अग्रिम जमानत की दलीलें
अग्रिम जमानत के लिए नीरज मलिक की ओर से दलील दी गई कि उन्हें झूठा फंसाया गया है और घटना के समय वह मौके पर मौजूद नहीं थे। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि एफआईआर में नीरज मलिक द्वारा शिकायतकर्ता को उठाने अथवा उससे पैसे मांगने का कोई विशिष्ट आरोप नहीं है तथा सीसीटीवी फुटेज में भी वह शिकायतकर्ता के साथ दिखाई नहीं दे रहे हैं। वहीं, अभियोजन की ओर से सरकारी वकील महेंद्र सिंह प्रजापति ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि नीरज मलिक और उनके साथी शिकायतकर्ता को जबरन टोल प्लाजा से उठाकर थाने लाए थे और एनडीपीएस के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। अदालत ने केस डायरी और पुलिस प्रपत्रों का अवलोकन करने के बाद कहा कि आरोपी स्वयं थाना प्रभारी था और उसके विरुद्ध शिकायतकर्ता को झूठे मुकदमे में फंसाने, पैर में गोली मारने की धमकी देने तथा रिश्वत के रूप में पांच लाख 86 हजार रुपये प्राप्त करने जैसे गंभीर आरोप हैं। इन परिस्थितियों में अदालत ने अग्रिम जमानत दिए जाने का पर्याप्त आधार नहीं पाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना नीरज मलिक की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त की जाती है.


