अमरोहा में दबोचे 8 शातिर साइबर ठग, देशभर में फैला था नेटवर्क

हिन्दुस्तान, अमरोहा
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ऑपरेशन साइबर वज्र के तहत पुलिस ने 130 संदिग्ध बैंक खातों का सत्यापन करने के बाद आठ शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। अपराधी वर्क फ्रॉम होम, फर्जी गेमिंग ऐप और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी कर रहे थे। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ कई राज्यों में शिकायतें दर्ज थीं।

अमरोहा में दबोचे 8 शातिर साइबर ठग, देशभर में फैला था नेटवर्क

'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत प्रदेश में चल रहे विशेष अभियान में जिले में पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने जिले भर में 130 संदिग्ध बैंक खातों और 101 मोबाइल नंबरों का सत्यापन करने के बाद देशभर में ठगी का नेटवर्क चलाने वाले आठ शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। एसपी लखन सिंह यादव ने बताया कि इस विशेष अभियान के दौरान कुल 279 संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की गई थी। सत्यापन में साइबर अपराधों में संलिप्तता पूरी तरह पुख्ता होने के बाद इन आठों अभियुक्तों के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में आठ अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पकड़े गए अपराधी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए वर्क फ्रॉम होम, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी गेमिंग ऐप, जनसेवा केंद्र की फ्रेंचाइजी और ऑनलाइन स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इनके खिलाफ पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, तेलंगाना और दिल्ली समेत कई राज्यों से शिकायतें दर्ज थीं।

गिरफ्तार किए गए अपराधी

इसी क्रम में गजरौला पुलिस ने सबसे पहले गांव पपसरा खादर निवासी आसुद्दीन पुत्र ग्यासुद्दीन को गिरफ्तार किया। आरोपी अपने भरतपुर-मेवात स्थित साथियों के साथ मिलकर फेसबुक, व्हाट्सएप एवं इंस्टाग्राम पर वर्क फ्रॉम होम एवं पेंसिल पैकिंग जॉब के फर्जी विज्ञापन प्रसारित कर लोगों को अधिक कमाई का लालच देकर साइबर ठगी करता था। एनसीआरपी पोर्टल पर झारखंड के गोड्डा जिले से उसके खिलाफ दो शिकायतें दर्ज हुई थीं। वहीं, नौगावां सादात पुलिस ने गांव कौराल निवासी महेंद्र सिंह पुत्र राम सिंह की गिरफ्तारी की है। अभियुक्त स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाता था तथा म्यूल बैंक खातों में धनराशि जमा कराकर साइबर ठगी करता था। पोर्टल पर पंजाब के तरनतारन एवं उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से उसके खिलाफ शिकायतें दर्ज थीं। खाते में साइबर ठगी के 2,46,274 रुपये मिले हैं। रहरा पुलिस ने मुकुल पुत्र आनंद, निवासी गगांव पोरारा की गिरफ्तारी की है। ये फर्जी यू-मनी गेमिंग एप के जरिए लोगों को जोड़कर उनसे अवैध रूप से धन ऐंठ रहा था। मंडी धनौरा पुलिस ने रिंकू कुमार पुत्र चंद्रपाल, निवासी गांव कलाली को गिरफ्तार किया है जो जन सेवा केंद्र की ऑनलाइन फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करता था। पोर्टल पर हैदराबाद (तेलंगाना) एवं गुवाहाटी (असम) से उसके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। गजरौला पुलिस ने एक और अभियुक्त दीपू कुमार पुत्र हरिशंकर, निवासी गौराबाजार, सारण, बिहार को भी गिरफ्तार किया है। अभियुक्त ऑनलाइन स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर लोगों से धनराशि अपने म्यूल बैंक खातों में जमा करा रहा था। इसके खिलाफ पोर्टल पर पुणे (महाराष्ट्र) से शिकायत दर्ज थी।

अन्य गिरफ्तारियां

अमरोहा नगर पुलिस ने उमैर पुत्र कामिल अहमद, निवासी मोहल्ला बटवाल को गिरफ्तार किया है जो विभिन्न प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि किराए के बैंक खातों में मंगाकर एटीएम के माध्यम से नकदी निकालता था। पोर्टल पर इसके खिलाफ अहमदाबाद (गुजरात) से शिकायत दर्ज है। मंडी धनौरा पुलिस ने इसी कड़ी में साजिद पुत्र मोहब्बे हुसैन, निवासी गांव पारा खालसा की गिरफ्तारी की है जो फर्जी पहचान बनाकर ऑनलाइन लोन दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे ठग रहा था। पोर्टल पर संत कबीर नगर (उत्तर प्रदेश) एवं दक्षिण दिल्ली से शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। खाते में 19,747 की साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि प्राप्त हुई है। गजरौला पुलिस ने मोनू कुमार पुत्र राकेश कुमार, निवासी गगांव शाहपुर को भी गिरफ्तार किया है। ये ऑनलाइन स्टॉक मार्केट एवं निवेश योजनाओं में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों के साथ साइबर ठगी करता था। पोर्टल पर पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गुजरात एवं सुल्तानपुर से शिकायतें दर्ज हैं।

पूछताछ में साइबर ठगी का नेटवर्क सामने आया

अमरोहा। एसपी ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि गिरफ्तार अभियुक्त सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर आमजन को अपने जाल में फंसाते थे। वर्क फ्रॉम होम एवं घर बैठे कमाई का झूठा लालच देते थे। ऑनलाइन टास्क, गेमिंग एप, फर्जी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म एवं स्टॉक मार्केट में भारी मुनाफे का प्रलोभन देते थे। इसके अलावा क्रिप्टोकरेंसी, ऑनलाइन ट्रेडिंग एवं फर्जी कंपनियों में निवेश के नाम पर भी धनराशि ठगते थे। स्वयं को पुलिस अधिकारी, बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी अथवा परिचित व्यक्ति बताकर लोगों से ओटीपी, बैंक विवरण एवं अन्य गोपनीय जानकारी प्राप्त करते थे। इसके बाद साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को म्यूल बैंक खातों के माध्यम से विभिन्न खातों में स्थानांतरित कर उसकी वास्तविक पहचान छिपाने का प्रयास करते थे।

सतर्क रहने के उपाय

ऐसा हरगिज न करें

-किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी,

बैंक खाता संख्या अथवा अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी साझा न करें।

-सोशल मीडिया पर मिलने वाले

वर्क फ्रॉम होम, अधिक मुनाफा, ऑनलाइन निवेश, ट्रेडिंग अथवा लोन संबंधी आकर्षक प्रस्तावों से सतर्क रहें।

-किसी भी अज्ञात लिंक, क्यूआर कोड, मोबाइल एप या वेबसाइट

पर बिना सत्यापन के विश्वास न करें।

-यदि आप किसी साइबर धोखाधड़ी के शिकार होते हैं तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें

की जांच की जा रही है। साथ ही इनके अन्य सहयोगियों एवं संगठित साइबर गिरोह से जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की भी गहन विवेचना जारी है। कुछ अन्य लोग भी रडार पर आए हैं, जिनसे पूछताछ की जाएगी।

- लखन सिंह यादव, एसपी

सामान्य प्रश्न

ऑपरेशन साइबर वज्र में कितने अभियुक्त पकड़े गए?
इस ऑपरेशन में कुल 8 अभियुक्त पकड़े गए हैं।
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