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हिंदी न्यूज़ देश1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ही हो जाना चाहिए था PoK का फैसला: राजनाथ सिंह

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ही हो जाना चाहिए था PoK का फैसला: राजनाथ सिंह

राजनाथ ने कहा कि हमने हाल ही में 1971 के युद्ध में जीत की स्वर्ण जयंती मनाई। उस युद्ध को इतिहास में याद रखा जाएगा, क्योंकि वह युद्ध संपत्ति, कब्जे या सत्ता के बदले मानवता के लिए लड़ा गया था।

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ही हो जाना चाहिए था PoK का फैसला: राजनाथ सिंह
Nisarg Dixitहिन्दुस्तान,नई दिल्लीTue, 27 Sep 2022 07:08 AM

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के बारे में फैसला 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ही कर लिया जाना चाहिए था। यह बात उन्होंने सोमवार को हिमाचल प्रदेश में देश के लिए बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के परिजनों के सम्मान में आयोजित एक समारोह के दौरान कही।

राजनाथ ने कहा कि हमने हाल ही में 1971 के युद्ध में जीत की स्वर्ण जयंती मनाई। उस युद्ध को इतिहास में याद रखा जाएगा, क्योंकि वह युद्ध संपत्ति, कब्जे या सत्ता के बदले मानवता के लिए लड़ा गया था। लेकिन इसमें एक कसक रह गई। काश उसी समय पर ही पीओके पर निर्णय हो गया होता। राजनाथ सिंह ने कहा कि देश बहादुर सैनिकों के बलिदानों का हमेशा ऋणी रहेगा। सशस्त्र सेनाएं हमेशा लोगों विशेष रूप से युवाओं की प्रेरणा की स्रोत बनी रहेंगी।

भारत ने सारे विश्व को दिया शांति का संदेश राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने सारे विश्व को शांति का संदेश दिया है और अपनी बहादुरी के कारण हमारी सेनाएं पूरी दुनिया में सम्मान की दृष्टि से देखी जाती हैं। भारत ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया है, न ही उसने किसी की एक इंच विदेशी भूमि पर कब्जा किया है।

सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश का मुंहतोड़ जवाब देंगे रक्षामंत्री ने देशवासियों को आश्वासन दिया कि अगर भारत में सद्भाव को बिगाड़ने का कोई प्रयास किया जाता है, तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा, भारत अगर शांतिप्रिय देश है तो उसका अर्थ यह नहीं है कि हम कमजोर हैं, अथवा युद्ध से किसी प्रकार से भय खाते हैं।

चाहे कितनी बड़ी ताकत क्यों न हो, भारत झुकेगा नहीं रक्षा मंत्री ने कहा पूरी दुनिया के साथ जिस समय हम कोरोना की समस्या से जूझ रहे थे, उसी समय उत्तरी सीमा पर हमें चीन के साथ भी तनाव का सामना करना पड़ा। पर हमारे देश की सेना ने जो शौर्य और पराक्रम का परिचय गलवान में दिया उसने यह साबित किया है कि सामने चाहे कितनी बड़ी ताकत क्यों न हो, भारत झुकेगा नहीं।

आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई रणनीति’
रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत की नई रणनीति ने उन लोगों की कमर तोड़ दी है जो राष्ट्र की एकता और अखंडता को चोट पहुंचाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, पाकिस्तान द्वारा, एक सोची समझी नीति के तहत सीमा पार से आतंकी गतिविधियां चलाई जाती रही थीं। उरी और पुलवामा हमलों के बाद हमारी सरकार और सेनाओं ने 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक व 2019 के बालाकोट हवाई हमलों के माध्यम से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया।

युद्ध नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समारोह में युद्ध नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, कांगड़ा जिले के बडोली में आयोजित सम्मान समारोह में परमवीर चक्र के पहले प्राप्तकर्ता मेजर सोमनाथ शर्मा (1947) सहित ब्रिगेडियर शेर जंग थापा, महावीर चक्र (1948); लेफ्टिनेंट कर्नल धन सिंह थापा, परमवीर चक्र (1962); कैप्टन विक्रम बत्रा, परमवीर चक्र (1999) और सूबेदार मेजर संजय कुमार, परमवीर चक्र (1999) आदि युद्ध नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही उनके परिजनों को सम्मानित किया।

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