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1 जून, 2020|10:49|IST

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प्रधानमंत्री मोदी ने गांधी की 150वीं जयंती पर ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में लिखा लेख

prime minister narendra modi pays tribute to mahatma gandhi on his 150th birth anniversary at parlia

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर उनके चमत्कारी व्यक्तित्व को याद करते हुए अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में एक लेख लिखा। ‘भारत और दुनिया को गांधी की जरूरत क्यों है’ शीर्षक से प्रकाशित इस लेख में उन्होंने बापू को एक ऐसी शख्सियत बताया, जिसमें चरखा, खादी और नमक जैसी साधारण चीजों के दम पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की ताकत थी।
 

लेख की शुरुआत अमेरिका में नागरिक अधिकार आंदोलनों के अग्रणी नेता मार्टिन लूथर किंग के उस कथन से की गई है, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘मैं अन्य देशों में एक पर्यटक के रूप में जाता हूं लेकिन भारत में तीर्थयात्री के तौर पर कदम रखता हूं।’ प्रधानमंत्री ने लिखा, ‘मार्टिन लूथर किंग भारत को धार्मिक स्थल सरीखा मानते थे क्योंकि वह गांधी से काफी प्रभावित थे। दरअसल, बापू के पास मानव समाज के कुछ सबसे बड़े विरोधाभासों के बीच कड़ी बनने की अद्वितीय क्षमता थी। वह समाज के सभी वर्गों के बीच विश्वास के प्रतीक थे।’
 

उन्होंने आगे लिखा, ‘दुनिया में कई जन आंदोलन हुए। भारत में भी स्वतंत्रता संग्राम के कई तरीके अपनाए गए, लेकिन गांधीवादी संघर्ष सबसे अलग था। इसमें व्यापक जन भागीदारी देखी गई। वो भी तब, जब गांधी कभी प्रशासनिक या निर्वाचित पद पर नहीं रहे। उन्हें कभी सत्ता का मोह नहीं रहा।’

मोदी ने लिखा, ‘बापू के पास साधारण चीजों से बड़े पैमाने पर लोगों को जागरूक करने की क्षमता थी। वरना कौन चरखा-खादी को आर्थिक आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण का प्रतीक बना सकता है? चुटकी भर नमक के दम पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की ताकत सिर्फ बापू में थी।’ उन्होंने कहा कि गांधी के पास हर चीज का समाधान था। उनके रूप में हमारे पास सही राह दिखाने वाला सर्वश्रेष्ठ गुरु है।

मानवता की सेवा पर आधारित गांधी का राष्ट्रवाद
-लेख में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रवाद के बारे में गांधी के दृष्टिकोण का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने लिखा, बापू ने ऐसे भारतीय राष्ट्रवाद की परिकल्पना की थी, जो संकीर्ण नहीं था, बल्कि मानवता की सेवा के लिए काम करने वाला था। मानवता, सतत विकास या आर्थिक आत्मनिर्भरता हो, गांधी के पास सबका समाधान था।’ 

भारत गांधी के सपने साकार करने की राह पर
-प्रधानमंत्री ने लिखा, ‘भारत बापू के सपने साकार करने की राह में आगे बढ़ रहा है। यह सबसे तेजी से गरीबी मिटाने वाले देशों में शामिल है। स्वच्छता को लेकर हमारे प्रयासों ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में हम अग्रणी भूमिका में हैं। हम दुनिया के साथ, दुनिया भर के लिए और भी बहुत कुछ करना चाहते हैं।’

‘आइंस्टीन चैलेंज’ की शुरुआत की
-मोदी ने लेख में गांधी पर महान वैज्ञानिक एल्बर्ट आइंस्टीन के उस कथन का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘आने वाली पीढ़ियों को विश्वास ही नहीं होगा कि धरती पर कभी हाड़-मांस का ऐसा कोई व्यक्ति पैदा हुआ था।’ उन्होंने ‘आइंस्टीन चैलेंज’ की शुरुआत करते हुए दुनिया भर के विचारकों, उद्योगपतियों और टेक गुरुओं से ऐसी तकनीक लाने का आह्वान किया, जिससे बापू के विचारों का प्रचार-प्रसार हो सके।

आइए नफरत, हिंसा, पीड़ा मिलकर खत्म करें
-मोदी ने लेख का अंत वैश्विक समुदाय से नफरत, हिंसा और पीड़ा खत्म करने की दिशा में कंधा से कंधा मिलाकर काम करने की अपील के साथ किया। उन्होंने लिखा, ‘हम ऐसा करके ही बापू के पसंदीदा भजन ‘वैष्णव जन...’ में छिपे उनके सपने को साकार कर सकेंगे। यह भजन हमें सिखाता है कि असली इनसान वही है, जो दूसरों का दर्द समझे, उनके कष्ट दूर करे और कभी अहंकार न दिखाए।’

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  • Web Title:PM writes article on Gandhi 150th birth anniversary in New York Times