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21 अक्तूबर, 2020|7:37|IST

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मन की बात: PM मोदी ने कहा, नौजवानों को भगवान 'बिरसा मुंडा' से प्रेरणा लेने की जरूरत, 10 खास बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (HT)

लोकसभा चुनाव से पहले 'मन की बात कार्यक्रम के अपने अंतिम और 53वें प्रसारण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलवामा हमले में शहीद दुए जवानों और उनके परिवार के त्याग को सराहा। इस मौके पर उन्होंने इंडिया गेट पर बने #NationalWarMemorial का भी जिक्र किया और उसे तीर्थ स्थल जाने के समान बताया। पीएम मोदी ने आज के नौजवानों को बिरसा मुंडा के जीवन से सीख लेने की सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने जमशेदजी टाटा सही मायने में एक दूरदृष्टा बताया।

'मन की बात' की 10 खास बातें
 
1. 10 दिन पूर्व, भारत-माता ने अपने वीर सपूतों को खो दिया। इन पराक्रमी वीरों ने, हम सवा-सौ करोड़ भारतीयों की रक्षा में ख़ुद को खपा दिया. देशवासी चैन की नींद सो सकें, इसलिए, इन हमारे वीर सपूतों ने, रात-दिन एक करके रखा था। इस आतंकी हिंसा के विरोध में जो आवेग आपके और मेरे मन में है, वही भाव हर देशवासी के अंतर्मन में है और मानवता में विश्वास करने वाले विश्व के मानवतावादी समुदायों में भी है। भारत-माता की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले देश के सभी वीर सपूतों को मैं नमन करता हूँ।

2. यह शहादत आतंक को समूल नष्ट करने के लिए हमें निरन्तर प्रेरित करेगी। देश के सामने आयी इस चुनौती का सामना, हम सबको जातिवाद, सम्प्रदायवाद, क्षेत्रवाद और बाकि सभी मतभेदों को भुलाकर करना है ताकि आतंक के खिलाफ़ हमारे कदम पहले से कहीं अधिक दृढ़ हों, सशक्त हों और निर्णायक हों। हमारे सशस्त्र बल हमेशा ही अद्वितीय साहस और पराक्रम का परिचय देते आये हैं। शांति की स्थापना के लिए जहाँ उन्होंने अद्भुत क्षमता दिखायी है वहीँ हमलावरों को भी उन्हीं की भाषा में जबाव देने का काम किया है। सेना ने आतंकवादियों और उनके मददगारों के समूल नाश का संकल्प ले लिया है। वीर सैनिकों की शहादत के बाद, मीडिया के माध्यम से उनके परिजनों की जो प्रेरणादायी बातें सामने आयी हैं उसने पूरे देश के हौंसले को और बल दिया है।

3. शहीदों के हर परिवार की कहानी, प्रेरणा से भरी हुई हैं। मैं युवा-पीढ़ी से अनुरोध करूँगा कि वो, इन परिवारों ने जो जज़्बा दिखाया है, जो भावना दिखायी है उसको जानें, समझने का प्रयास करें। देशभक्ति क्या होती है, त्याग-तपस्या क्या होती है – उसके लिए हमें इतिहास की पुरानी घटनाओं की ओर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। हमारी आँखों के सामने, ये जीते-जागते उदहारण हैं और यही उज्ज्वल भारत के भविष्य के लिए प्रेरणा का कारण हैं।

4. इंडिया गेट और अमर जवान ज्योति के पास ही ये एक नया स्मारक #NationalWarMemorial बनाया गया है। मुझे विश्वास है ये देशवासियों के लिए राष्ट्रीय सैनिक स्मारक जाना किसी तीर्थ स्थल जाने के समान होगा। यह स्मारक स्वतंत्रता के बाद सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के प्रति राष्ट्र की कृतज्ञता का प्रतीक है। यहाँ उन बलिदानियों की कहानी है जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण नयौछावर कर दिए हैं ताकि हम जीवित रह सकें ताकि देश सुरक्षित रहे और विकास कर सके। देश के विकास में हमारे सशस्त्र बलों, पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के महान योगदान को शब्दों में अभिव्यक्त करना संभव नहीं है।

5. आज, अगर हमारे नौजवानों को मार्गदर्शन के लिए किसी प्रेरणादायी व्यक्तित्व की जरुरत है तो वह है भगवान 'बिरसा मुंडा'। अंग्रेजों ने छिप कर, बड़ी ही चालाकी से उन्हें उस वक़्त पकड़ा था जब वे सो रहे थे। क्या आप जानते हैं कि उन्होंने ऐसी कायरतापूर्ण कार्यवाही का सहारा क्यों लिया? क्योंकि इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा करने वाले अंग्रेज भी उनसे भयभीत रहते थे। भगवान ‘बिरसा मुंडा’ ने सिर्फ अपने पारंपरिक तीर-कमान से ही बंदूकों और तोपों से लैस अंग्रेजी शासन को हिलाकर रख दिया था। दरअसल, जब लोगों को एक प्रेरणादायी नेतृत्व मिलता है तो फिर हथियारों की शक्ति पर लोगों की सामूहिक इच्छाशक्ति भारी पड़ती है। भगवान ‘बिरसा मुंडा’ ने अंग्रेजों से न केवल राजनीतिक आज़ादी के लिए संघर्ष किया बल्कि आदिवासियों के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों के लिए भी लड़ाई लड़ी। अपने छोटे से जीवन में उन्होंने ये सब कर दिखाया। वंचितों और शोषितों के अंधेरे से भरे जीवन में सूरज की तरह चमक बिखेरी। भगवान बिरसा मुंडा ने 25 वर्ष की अल्प आयु में ही अपना बलिदान दे दिया। बिरसा मुंडा जैसे भारत माँ के सपूत, देश के हर भाग में हुए है। शायद हिंदुस्तान का कोई कोना ऐसा होगा कि सदियों तक चली हुई आज़ादी की इस जंग में, किसी ने योगदान ना दिया हो। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इनके त्याग, शौर्य और बलिदान की कहानियाँ नई पीढ़ी तक पहुँची ही नहीं। अगर, भगवान ‘बिरसा मुंडा’ जैसे व्यक्तित्व ने हमें अपने अस्तित्व का बोध कराया तो जमशेदजी टाटा जैसी शख्सियत ने देश को बड़े-बड़े संस्थान दिए।

6. जमशेदजी टाटा सही मायने में एक दूरदृष्टा थे, जिन्होंने ना केवल भारत के भविष्य को देखा बल्कि उसकी मजबूत नींव भी रखी। वे भलीभांति जानते थे कि भारत को science, technology और industry का hub बनाना भविष्य के लिए आवश्यक है। ये उनका ही vision था जिसके परिणामस्वरूप Tata Institute of Science की स्थापना हुई जिसे अब Indian Institute of Science कहा जाता है। यही नहीं उन्होंने Tata Steel जैसे कई विश्वस्तरीय संस्थानों को और उद्योगों की भी स्थापना की। ‘जमशेदजी टाटा’ और ‘स्वामी विवेकानंद जी’ की मुलाकात अमेरिकी यात्रा के दौरान ship में हुई थी, तब उन दोनों की चर्चा में एक महत्वपूर्ण topic भारत में science और technology के प्रचार-प्रसार से जुड़ा हुआ था। कहते हैं इसी चर्चा से Indian Institute of Science की नींव पड़ी।

7. हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी भाई देसाई का जन्म 29 फरवरी को हुआ था और यह दिन 4 वर्ष में एक बार ही आता है। सहज, शांतिपूर्ण व्यक्तित्व के धनी, मोरारजी भाई देश के सबसे अनुशासित नेताओं में से थे। भारतीय लोकतंत्र के महात्म्य को बनाए रखने में मोरारजी भाई देसाई के अमूल्य योगदान को, आने वाली पीढ़ियाँ हमेशा याद रखेंगे। एक बार फिर ऐसे महान नेता को मैं अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

8. देशभर  में अलग-अलग शिक्षा बोर्ड अगले कुछ हफ़्तों में दसवीं और बारहवीं कक्षा के board के इम्तिहान के लिए प्रक्रिया प्रारंभ करेंगें। परीक्षा देने वाले सभी विद्यार्थियों को, उनके अभिभावकों को और सभी teachers को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ हैं। कुछ दिन पहले दिल्ली में ‘परीक्षा पे चर्चा’ का एक बहुत बड़ा आयोजन Town Hall के format में हुआ। इस Town Hall कार्यक्रम में मुझे technology के माध्यम से, देश-विदेश के करोड़ों students के साथ, उनके अभिभावकों के साथ, teachers के साथ, बात करने का अवसर मिला। सभी विद्यार्थी, उनके शिक्षक, माता-पिता YouTube पर इस पूरे कार्यक्रम की recording देख सकते हैं, तो आने वाली परीक्षा के लिए मेरे सभी exam warriors को ढ़ेरो शुभकामनाएँ।

9. भारत की बात हो और त्यौहार की बात न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। शायद ही हमारे देश में कोई दिन ऐसा नहीं होता है, जिसका महत्व ही न हो, जिसका कोई त्यौहार न हो। क्योंकि हज़ारों वर्ष पुरानी संस्कृति की ये विरासत हमारे पास है. कुछ दिन बाद महाशिवरात्रि का पर्व आने वाला है और इस बार तो शिवरात्रि सोमवार को है और जब शिवरात्रि सोमवार को हो तो उसका एक विशेष महत्व हमारे मन-मंदिर में छा जाता है। इस शिवरात्रि के पावन पर्व पर मेरी आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ हैं।

10. चुनाव लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव होता है। अगले दो महीने, हम सभी चुनाव की गहमा-गहमी में व्यस्त होगें। मैं स्वयं भी इस चुनाव में एक प्रत्याशी रहूँगा। स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का सम्मान करते हुए अगली ‘मन की बात’ मई महीने के आखरी रविवार को होगी।

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  • Web Title:PM Narendra Modi Mann Ki Baat 10 Key Points