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30 मार्च, 2021|5:15|IST

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PM Narendra modi Full Speech: पीएम मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, आत्मनिर्भर भारत, पैकेज का ऐलान... यहां पढ़िए पूरा भाषण

pm modi full speech

PM Narendra modi Full Speech:  सभी देशवासियों को नमस्कार, कोरोना संक्रमण से मुकाबला करते हुए दुनिया को अब चार महीने से ज्यादा हो गया है। इस दौरान तमाम देशों के 42 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं। पौने तीन लाख से ज्यादा लोगों की दुखद मृत्यु हुई है। भारत में भी अनेक परिवारों ने स्वजन खोए हैं। मैं सभी के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। 

साथियो एक वायरस ने दुनिया को तहस नहस कर दिया है। विश्वभर में करोड़ों जिंदगियां संकट का सामना कर रही है। सारी दुनिया जिंदगी बचाने में एक प्रकार से जंग में जुटी है। हमने ऐसा संकट ना देखा है ना ही सुना है। निश्चित तौर पर मानव जाति के लिए यह सबकुछ अकल्पनीय है। यह क्राइसिस अभूतपूर्व है। लेकिन थकना, हारना, टूटना, बिखरना, मानव को मंजूर नहीं है।

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सतर्क रहते हुए ऐसी जंग के सभी नियमों का पालन करते हुए अब हमें बचना भी है और आगे बढ़ना भी है। आज जब दुनिया संकट में है तब हमें अपना संकल्प और मजबूत करना होगा। हमारा संकल्प इस संकट से भी विराट होगा। हम पिछली शताब्दी से ही लगातार सुनते आए हैं कि 21वीं सदी हिन्दुस्तान की है। हमें कोरोना से पहले की दुनिया को वैश्विक व्यवस्थाओं को विस्तार से देखने समझने का मौका मिला है।

आत्मनिर्भर भारत....
कोरोना संकट के बाद भी दुनिया में जो स्थिति बन रही है उसे भी हम देख रहे हैं। जब इन दोनों कालखंडों को भारत के नजरिए से देखते हैं तो लगता है 21 सदी भारत का हो यह हमारा सपना ही नहीं, हम सबक की जिम्मेदारी है। लेकिन इसका मार्ग क्या होगा? विश्व की आज की स्थिति हमें सिखाती है कि इसका मार्ग एक ही, आत्मनिर्भर भारत। हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है एश: पंथ: यानी यही रास्ता है- आत्मनिर्भर भारत। एक राष्ट्र के रूप में आज हम बहुत अहम मोड़ पर खड़े हैं। इतनी बड़ी आपदा भारत के लिए एक संकेत लेकर आई है, संदेश लेकर आई है, एक अवसर लेकर आई है।

हर दिन दो लाख पीपीई किट का उत्पादन
मैं एक उदाहरण के साथ अपनी बात बताने का प्रयास करता हूं देता हूं, जब कोरोना संकट शुरू हुआ तो भारत में एक भी पीपीई किट और एन95 मास्क का नाममात्र उत्पादन होता था। आज भारत में 2 लाख पीपीई किट और 2 लाख एन95 मास्क बनाए जा रहे हैं। यह हम इसलिए कर पाए, क्योंकि भारत ने आपदा को अवसर में बदल दिया।

भारत का चिंतन दुनिया के लिए आशा
भारत की यह दृष्टि आत्मनिर्भर भारत के लिए उतनी ही प्रभावी सिद्ध होने वाली है। आज विश्व में आत्मनिर्भर शब्द के मायने पूरी तरह बदल गए हैं। अर्थ केंद्रित वैश्वीकरण बनाम मानव केंद्रित वैश्वीकरण की चर्चा आज जोरो पर है। विश्व के सामने भारत का मूलभूत चिंतन आशा की किरण नजर आता है। भारत की संस्कृति, भारत के संस्कार आत्मनिर्भरता की बात करते हैं, उस आत्मनिर्भरता की बात करते हैं जिसकी आत्मा वसुधैव कुटुंम्बकम है। विश्व एक परिवार। भारत जब आत्मनिर्भरता की बात करता है तो आत्मकेंद्रित व्यवस्था की वकालत नहीं करता है। 

भारत की आत्मनिर्भरता में दुनिया का भी हित
भारत की आत्मनिर्भरता में संसार के सुख सहयोग और शांति की चिंता होती है। जो संस्कृति जय जगत में विश्वास करती हो, जो जीव मात्र का कल्याण चाहती हो, जो पूरे विश्व को परिवार मानती हो, जो अपनी आस्था में माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या की सोच रखती हो, जो पृथ्वी को मां मानती हो वह संस्कृति वह भारत भूमि जब आत्मनिर्भर बनती है तो उससे सुखी विश्व की संभावना भी सुनिश्चित होती है।   

भारत में बदलाव का दुनिया पर असर
भारत की प्रगति में हमेशा विश्व की प्रगति समाहित रही है। भारत के लक्ष्यों का प्रभाव, भारत के कार्यों का प्रभाव विश्व कल्याण पर पड़ता ही है। जब भारत खुले में शौच से मुक्त होता है तो दुनिया की भी तस्वीर बदलती है। टीवी हो, कुपोषण हो, पोलिया हो, भारत के अभियानों का असर दुनिया पर पड़ता ही है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ भारत की दुनिया को सौगता है। अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस की पहल मानव जीवन को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए भारत का उपहार है।

जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रही दुनिया के लिए भारत की दवाइयां नई आशा लेकर पहुंचती है। इन कदमों से दुनियाभर में भारत की प्रशंसा होती है। तो स्वभाविक है कि हर भारतीय गर्व करता है। दुनिया को विश्वास होने लगा है कि भारत बहुत अच्छा कर सकता है। मानव जाति की कल्याण के लिए भारत बहुत कुछ अच्छा दे सकता है।

भारत विश्व कल्याण की राह पर अटल
सवाल यह है कि आखिर कैसे? इस सवाल का भी उत्तर है 130 करोड़ देशवासियों का आत्मनिर्भर भारत का संकल्प। हमारा सदियों का गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। भारत जब समृद्ध था, सोने की चिड़िया कहा जाता था, संपन्न था, तब सदा विश्व कल्याण की राह पर चला। वक्त बदल गया, देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ गया। हम विकास के लिए तरसते रहे। आज फिर भारत विकास की तरफ सफलतापूर्वक कदम बढ़ा रहा है तब भी विश्व कल्याण की राह पर अटल है।  

हम बनाएंगे बेस्ट प्रॉडक्ट्स
याद करिए इस शताब्दी की शुरुआत के समय Y2 संकट आया था, भारत के टेक्नॉलजी एक्सपर्ट्स ने दुनिया को उस संकट से निकाला था। आज हमारे पास साधन है, सामर्थ्य है, हमारे पास दुनिया की सबसे बेहतरीन टैलेंट है। हम बेस्ट प्रॉडक्ट्स बनाएंगे। अपनी क्वॉलिटी और बेहतर बनाएंगे। सप्लाई चेन को आधुनिक बनाएंगे। यह हम कर सकते हैं और हम जरूर करेंगे। 

तबाह कच्छ चल पड़ा
मैंने अपनी आंखों के सामने कच्छ भूकंप के वे दिन देखे हैं। हर तरफ सिर्फ मलबा ही मलबा था। सबकुछ ध्वस्त हो गया था। ऐसा लगता था कि मानो कच्छ मौत की चादर ओढ़कर सो गया। तब कोई सोच नहीं सकता था कि कभी हालात बदलेंगे, लेकिन देखते ही देखते कच्छ उठ खड़ा हुआ, कच्छ चल पड़ा, कच्छ बढ चला। यह हम भारतीयों की संकल्प शक्ति है। हम ठान लें तो कोई लक्ष्य, कोई राह मुश्किल नहीं है। आज तो चाह भी है और राह भी है। यह है भारत को आत्मनिर्भर बनाना। भारत की संकल्प शक्ति ऐसी है कि भारत आत्मनिर्भर बन सकता है। 

आत्मनिर्भर भारत के पांच पिलर
आत्मनिर्भर भारत की यह भव्य इमारत पांच पिलर पर खड़ी होगी। पहला पिलर- इकॉनमी, एक ऐसी इकॉनमी जो इंक्रिमेंटल चेंज नहीं बल्कि क्वांटम जंप लाए। दूसरा पिलर है- इंफ्रास्ट्रक्चर, एक ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर जो आधुनिक भारत की पहचान बने। तीसरा पिलर हमारा सिस्टम- एक ऐसा सिस्टम जो बीती शताब्दी की रीति नीति नहीं नहीं बल्कि 21 सदी के सपनों को साकार करने वाली टेक्नॉलजी ड्रिवन व्यवस्था पर आधारित हो। चौथ पिलर- हमारी डेमोग्राफी। दुनिया की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी में हमारी वाइब्रैंट डेमोग्रेफी हमारी ताकत है। आत्मनिर्भर भारत के लिए हमारी ऊर्जा का स्त्रोत है। पांचवा पिलर है  डिमांड। हमारी अर्थव्यवस्था में डिमांड और सप्लाई का जो चक्र है, जो जो ताकत है उसे पूरी क्षमता से इस्तेमाल किए जाने की जरूरत है। देश में डिमांड बढ़ाने के लिए डिमांड को पूरा करने के लिए हमारी सप्लाई चेन के हर स्टेक होल्डर का सशक्त होना जरूरी है। हमारी सप्लाई चेन, हमारी आपूर्ति की उस व्यवस्था को हम मजबूत करेंगे, जिसमें मेरे देश की मिट्टी की महक हो, हमारे मजदूरों के पसीने की खूशबू हो।


20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा
कोरोना संकट का सामना करते हुए मैं नए संकल्प के साथ विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करता हूं। यह आर्थिक पैकेज आत्मनिर्भर भारत अभियान की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा। हाल में सरकार ने कोरोना संकट से जुड़ी जो आर्थिक घोषणाएं की थी, जो आरबीआई के फैसले थे और जो आज जिस आर्थिक पैकेज का ऐलान हो रहा है तो यह करीब 20 लाख करोड़ रुपए का है। यह पैकेज भारत की जीडीपी का करीब 10 फीसदी है। इसके जरिए विभिन्न वर्गों को आर्थिक व्यवस्था के कड़ियों को 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा। 20 लाख करोड़ रुपए का यह पैकेजे 2020 में देश की विकास यात्रा को आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति देगा। आत्मनिर्भर भारत संकल्प को सिद्ध करने के लिए लैंड लैबर, लिक्विडिटी और लॉस सभी पर बल दिया गया है। 

हर तबके को पैकेज में स्थान
यह आर्थिक पैकेज हमारे कुटीर उद्योग, गृह उद्योग, मंझोले उद्योग के लिए हैं, जो करोड़ों लोगों की आजिवीका का साधन है। जो आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का मजबूत आधार है। यह आर्थिक पैकेज देश के उन श्रमिकों के लिए है, उन किसानों के लिए है जो हर स्थिति, हर मौसम में देशवासियों के लिए दिनरात परिश्रम करते हैं। यह आर्थिक पैकेज हमारे देश के मध्यम वर्ग के लिए है जो ईमानदारी से टैक्स देता है। देश के विकास में अपना योगदान देता है। यह आर्थिक पैकेज के उद्योग जगत के लिए है जो भारत के आर्थिक सामर्थ्य को बुलिंदियों पर ले जाने के लिए संकल्पित है। कल से आने वाले कुछ दिनों तक वित्त मंत्री द्वारा आर्थिक पैकेज की विस्तार से जानकारी दी जाएगी। आत्मनिर्भर भारत के लिए रिफॉर्म की प्रतिबद्धता के साथ भारत का आगे बढ़ना अनिवार्य है। 

आपने भी अनुभव किया है कि बीते छह वर्षों में जो रिफॉर्म हुए हैं उनके कारण आज इस संकट में भारत की व्यवस्था ज्यादा सक्षम नजर आई है। कौन सोच सकता था कि भारत सरकार जो पैसा भेजेगी वह पूरा का पूरा गरीब और किसान की जेब में पहुंचेगा। यह तब हुआ जब सभी सरकारी दफ्तर बंद थे, ट्रांसपोर्ट के साधन बंद थे।  जनधन आधार, मोबाइल, जेएएम की त्रिशक्ति से जुड़ा एक रिफॉर्म था जिसका असर हमने देखा। अब रिफॉर्म के उसके दायरे को व्यापक करना है।  

होंगे बड़े रिफॉर्म
यह रिफॉर्म खेती से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन में होंगे ताकि किसान भी  सशक्त हों और भविष्य में कोरोना जैसे किसी दूसरे संकट में कृषि पर कम से कम असर हो। ये रिफॉर्म टैक्स सिस्टम, उत्तम इनफ्रास्ट्रक्चर, समर्थ ह्यूमन रिसोर्सेज और मजबूत फाइनैंशल सिस्टम के निर्माण के लिए होंगे। ये रिफॉर्म बिजनेस को प्रोत्साहित करेंगे। निवेश को बढ़ाएंगे और मेक इन इंडिया के संकल्प को मजबूत करेंगे। 

आत्मनिर्भरता, आत्मबल और आत्मविश्वास से ही संभव है। आत्मनिर्भरता ग्लोबल सप्लाई चेन में कड़ी प्रतिस्पर्धा के लिए भी देश को तैयार करती है। आज समय की मांग है कि भारत हर स्पर्धा में जीते। ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभाए। इसे समझते हुए आर्थिक पैकेज में अनेक प्रावधान किए गए हैं। आर्थिक पैकेज में अनेक प्रावधान किए गए हैं। इससे हमारे सभी सेक्टर की एफिशिएंसी बढ़ेगी और क्वालिटी सुनिश्चित होंगी।

गरीबों और मजदूरों का ध्यान
यह संकट इतना बड़ा है कि बड़ी से बड़ी व्यवस्थाएं हिल गई। लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में हमने, देश ने, हमारे गरीब भाई बहनों की संघर्ष शक्ति, उनकी संयम शक्ति का दर्शन किया है। खासकर हमारे रेहड़ी, ठेला लगाने वाले, पटरी पर सामान बेचने वाले हैं, श्रमिक साथी हैं, घरों में काम करने वाले भाई-बहन हैं। उन्होंने इस दौरान बहुत कष्ट झेले हैं, तपस्या की है, त्याग किया है। ऐसा कौन है जिसने उनकी अनुपस्थिति को महसूस नहीं किया। अब हमारा कर्त्व्य है उन्हें ताकतवर बनाने का। उनके आर्थिक हितों के लिए कुछ बड़े कदम उठाने का। इसे ध्यान में रखते हुए गरीब हो श्रमिक हो प्रवासी मजदूर हो, पशुपालक हो, मछुआरे साथी हो, संगठित क्षेत्र से हो या असंगठित क्षेत्र से, हर तबके के लिए आर्थिक पैकेज में कुछ महत्वपूर्ण फैसलों का ऐलान किया जाएगा।  

लोकल के लिए हों वोकल
को
रोना संकट ने में हमें लोकल मैन्युफैक्चरिंग और लोकल मार्केट का महत्व समझा दिया है। संकट में लोकल ने ही हमारी डिमांड पूरी की है। हमें इस लोकल ने ही बचाया है, लोकल सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि हम सबकी जिम्मेदारी है। समय ने हमे सिखाया है कि लोकल को हमें अपना जीवन मंत्र बनाना ही  होगा। आज जो आपको ग्लोबल ब्रैंड्स लगते हैं वे भी कभी लोकल थे, लेकिन जब वहां के लोगों ने उनका इस्तेमाल और प्राचर शुरू किया तो वे प्रोडक्ट्स लोकल से ग्लोबल बन गए। इसलिए आज भारतवासी को अपने लोकल के लिए वोकल बनना है। 

ना सिर्फ लोकल प्रॉडक्ट खरीदने हैं बल्कि प्रचार भी करना है। हमारा देश ऐसा कर सकता है। आपके प्रयासों ने आपके प्रति मेरी श्रद्धा को और बढ़ाया है। मैं गर्व के साथ अहसास करता हूं जब मैंने देश से खादी खऱीदने को कहा था तो बहुत ही कम समय में खादी और हैंडलूम दोनों को ही डिमांड बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। आपने उसे ब्रैंड बना दिया। 

लॉकडाउन 4
साथियो सभी एक्सपर्ट वैज्ञानिक बताते हैं कि कोरोना लंबे समय तक हमारे जीवन का हिस्सा बना रहेगा। लेकिन साथ ही हम ऐसा भी नहीं होने दे सकते कि हमारी जिंदगी कोरोना के ईर्द-गिर्द ही सिमट कर रह जाए। हम मास्क पहनेंगे, दो गज की दूरी रखेंगे लेकिन अपने लक्ष्य दूर नहीं होने देंगे। इसलिए लॉकडाउन का चौथा चरण पूरी तरह नए रंग-रूप वाला होगा और नए नियमों वाला होगा। राज्यों से हमें जो सुझाव मिल रहे हैं उनके आधार पर लॉकडाउन 4, इससे जुड़ी जानकारी भी आपको 18 मई से पहले दी जाएगी। 

मुझे पूरा भरोसा है कि नियमों का पालन करते हुए हम कोरोना से लड़ेंगे भी और आगे भी बढ़ेंगे। हमारे यहां कहा गया है सर्वम आत्मवशं सुखम, यानी जो हमारे वश में है, जो हमारे नियंत्रण में है वही सुख है। आत्मनिर्भरता हमें सुख और संतोष देने के साथ सशक्त करता है। 21वीं सदी भारत की सदी बनाने का हमारा दायित्व, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प से ही पूरा होगा। इस दायित्व को 130 करोड़ देशवासियों की प्राणशक्ति से ही ऊर्जा मिलेगी। आत्मनिर्भर भारत का यह युग हमारे लिए नूतन प्रण भी होगा, नूतण पर्व होगा। नई संकल्प शक्ति लेकर हमें आगे बढ़ना है। जब आचार, विचार, कर्मठता की पराकाष्टा हो, कर्तव्य भाव से सराबोर हो, कौशल की पूंजी हो तो आत्मनिर्भर भारत बनने से कौन रोक सकता है। हम भारत को आत्म निर्भर भारत बना सकते हैं। हम भारत को आत्मनिर्भर बनाकर रहेंगे। 

मैं आपको बहुत शुभकामनाएं देता हूं आप अपने स्वास्थ्य का अपनों का जरूर ध्यान रखिए।  

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  • Web Title:pm narendra modi address to nation full speech on aatm nirbhar bharat