स्वतंत्रता दिवस पैकेज::स्वतंत्रता दिवस समारोह में पीएम ने पहनी बंधेज पगड़ी
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल रंग की बंधेज पगड़ी पहनी, जो राजस्थानी और गुजराती संस्कृति का प्रतीक है। पिछले वर्षों में उनके अद्वितीय पगड़ी पहनने की परंपरा ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया है। बंधेज पगड़ी पारंपरिक हस्तकला का एक उदाहरण है, जिसका महत्व भारतीय समारोहों में विशेष होता है।

लाल रंग की बंधेज पगड़ी पहनी पिछले सभी सालों में पीएम ने अलग-अलग रंग की पगड़िया पहनी हैं
नई दिल्ली, एजेंसी। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हर बार की तरह इस बार भी प्रधानमंत्री का खास अंदाज और पहनावा आकर्षण का केंद्र रहा।
मोदी का पहनावा
मोदी ने सफेद कुर्ते और चॉकलेट भूरे रंग के जैकेट के साथ राजस्थानी और गुजराती संस्कृति में प्रचलित लाल रंग की बंधेज पगड़ी पहन रखी थी। उन्होंने केसरिया, हरे और सफेद रंग के तीन पॉकेट स्क्वायर भी लगाए हुए थे।
पगड़ी की अनूठी परंपरा
लाल किले से भाषण देते समय अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक पगड़ी पहनना अब पीएम मोदी की खास परंपरा बन चुकी है। पिछले वर्ष उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती नारंगी, पीले और हरे रंगों वाली राजस्थानी 'लहरिया' पगड़ी पहनी थी।
स्वतंत्रता दिवस पर मोदी का पहनावा
2023: पीले, हरे और लाल रंगों वाली बांधनी प्रिंट की पगड़ी पहनी थी, जिसे उन्होंने काले रंग की 'वी-नेक जैकेट' के साथ पहना था।
2022: लाल बूटेदार केसरिया पगड़ी में नजर आए थे। इसके साथ उन्होंने नीली जैकेट और स्टोल पहना था।
2021: क्रीम और केसरिया रंग की पगड़ी पहनी थी, जो उनके आधी आस्तीन वाले कुर्ते के साथ खूब जंच रही थी।
2020: कोविड-19 महामारी के बीच उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से भगवा किनारी वाला सफेद गमछा चेहरे पर बांधा था।
2014 में जोधपुरी साफा पहना
प्रधानमंत्री के रूप में 2014 में उनके पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह की पहचान चटख लाल रंग का जोधपुरी साफा बना था। इसके बाद के वर्षों में उनकी पगड़ियों में रंगों की अद्भुत विविधता देखने को मिली-2015 में पीले और बहुरंगी आड़ी-तिरछी धारियों वाली पगड़ी, 2016 में गुलाबी-पीले रंग की पगड़ी और 2017 में चटख लाल-पीले रंग की पगड़ी पहनी थी। इसके बाद, 2018 में केसरिया रंग के साफे से उन्होंने अपनी मजबूत और प्रभावशाली छाप छोड़ी।
क्यों खास है बंधेज पगड़ी
बंधेज पगड़ी पारंपरिक 'टाई एंड डाई' हस्तकला है। इसे बनाने के लिए कपड़े को बारीक धागों से छोटे-छोटे हिस्सों में बांधकर पारंपरिक तरीके से रंगा जाता है। विशेष रूप से राजस्थान और गुजरात में इस पगड़ी को सम्मान, गौरव और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक पीएम मोदी की आज की यह पगड़ी वोकल फॉर लोकल का संदेश दे रही है।
बंधेज पगड़ की खासियत
-बंधेज पगड़ी में अक्सर लाल, पीला, केसरिया, हरा और गहरा गुलाबी जैसे चटक रंगों का इस्तेमाल होता है। ये रंग राजस्थान की मरूभूमि में खुशहाली, उमंग और ऊर्जा का प्रतीक माने जाते हैं।
-शादी-विवाह, तीज, स्वतंत्रता दिवस और अन्य मांगलिक अवसरों पर बंधेज की पगड़ी पहनना बेहद शुभ और सम्मानजनक माना जाता है।
-पारंपरिक बंधेज पगड़ियां आमतौर पर मलमल या कॉटन के बहुत हल्के कपड़े पर बनाई जाती हैं, जिससे इतनी बड़ी पगड़ी बांधने के बावजूद यह सिर पर ज्यादा भारी नहीं लगती।


