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पीएम मोदी को पनौती कहे जाने पर क्या बोले गौतम गंभीर, मनमोहन सिंह का जिक्र कर कह दी बड़ी बात

गौतम गंभीर ने कहा इससे पहले 2011 के सेमीफाइनल मुकाबले में मनमोहन सिंह भी वहीं थे। अगर हम वह मैच हार गए होते और मनमोहन सिंह भी हमसे मिलते तो इसमें क्या खराबी होती?

पीएम मोदी को पनौती कहे जाने पर क्या बोले गौतम गंभीर, मनमोहन सिंह का जिक्र कर कह दी बड़ी बात
Madan Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीSun, 10 Dec 2023 09:12 PM
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World Cup Final: पिछले महीने खेले गए विश्व कप फाइनल में टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया के हाथों बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। इससे करोड़ों फैन्स के दिल टूट गए। मैच में हार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ड्रेसिंग रूम में जाकर खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। पीएम मोदी मैच के दौरान भी नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मौजूद रहे और फाइनल मुकाबले को देखा। लेकिन टीम इंडिया की हार के बाद विवाद शुरू हो गया। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को पनौती बता दिया, जिस पर जमकर बवाल हुआ। पीएम मोदी को पनौती बताने और ड्रेसिंग रूम में उनके जाने को लेकर पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसमें पू्र्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भी जिक्र किया है।

गौतम गंभीर ने न्यूज एजेंसी 'एएनआई' के साथ पॉडकास्ट में बताया कि यह जो पनौती शब्द का इस्तेमाल किया गया था, वह सबसे खराब शब्द था। यह शब्द आईपीएल के समय भी कई खिलाड़ी और एक्सपर्ट्स के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था। यह इतना खराब शब्द है कि आप किसी के खिलाफ इस्तेमाल करना नहीं चाहते। जब भगवान ने किसी को बनाया तो एक मकसद से बनाया है और आप किसी को पनौती क्यों कहें? प्रधानमंत्री के पास पूरे राइट्स हैं कि वे ड्रेसिंग रूम में जाएं। इससे पहले 2011 के सेमीफाइनल मुकाबले में मनमोहन सिंह भी वहीं थे। अगर हम वह मैच हार गए होते और मनमोहन सिंह भी हमसे मिलते तो इसमें क्या खराबी होती? 

उन्होंने आगे कहा कि मुझे पता है जब कोई टीम हारती है तो उनके खिलाड़ियों का कैसा मूड होता है? कोई और यह नहीं समझ सकता है। कोई नेता, कोई एक्टर या कोई और दुनिया में वह बात नहीं समझ सकता है कि जो खिलाड़ी फील कर रहे होते हैं। देश के प्रधानमंत्री अगर वहां दो मिनट या दो शब्द उनको बेहतर फील कराते हैं तो उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। हमारे देश में कई दिक्कत शुरू हो गई है कि हर चीज का राजनीतिकरण कर दो। सोशल मीडिया पर पैसा खर्च करके किसी को भी ट्रोल कराया जा सकता है। सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री का वहां होना बिल्कुल सही था और उन्हें वहां होना भी चाहिए था। अगर दो मिनट किसी कंधे पर हाथ रखकर उसे खुशी दे सकते हैं तो उससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है। 

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