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PM मोदी हमेशा प्रणब मुखर्जी के पैर छूकर लेते थे आशीर्वाद, शर्मिष्ठा का खुलासा

Sharmistha New Book: शर्मिष्ठा ने कहा, "उन्होंने मुझे बताया कि वह एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों के लिए दिल्ली आते थे और वह सुबह की सैर पर बाबा से मिलते थे।''

PM मोदी हमेशा प्रणब मुखर्जी के पैर छूकर लेते थे आशीर्वाद, शर्मिष्ठा का खुलासा
Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Thu, 07 Dec 2023 11:46 AM
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की सियासी विचारधारा भले ही एक दूसरे के विपरीत हो, लेकिन दोनों एक दूसरे का बहुत सम्मान करते थे। प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा सम्मान के लिए प्रणब दा का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपनी किताब में इसका खुलासा किया है। उन्होंने अपनी नई किताब - "प्रणब माई फादर" में लिखा है जब उनके पिता राष्ट्रपति चुने गए तो वे अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के बारे में बहुत स्पष्ट थे। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा था कि भले ही वे अलग-अलग विचारधाराओं के हों, लेकिन वह शासन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

शर्मिष्टा ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा. "मुझे लगता है कि उनकी अलग-अलग विचारधाराओं को देखते हुए यह बहुत अजीब बात थी। लेकिन मुझे लगता है कि यह रिश्ता वास्तव में कई साल पुराना है। नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री बनने से भी पहले भी दोनों एक-दूसरे से ऐसे ही मिलते थे।"

शर्मिष्ठा ने कहा, "उन्होंने मुझे बताया कि वह एक साधारण पार्टी कार्यकर्ता के रूप में विभिन्न कार्यक्रमों के लिए दिल्ली आते थे और वह सुबह की सैर पर बाबा से मिलते थे। बाबा हमेशा बहुत अच्छी तरह से बात करते थे। वह हमेशा बाबा के पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे।”

शर्मिष्ठा मुखर्जी पूर्व कांग्रेसी नेता हैं। उन्होंने अपने दिवंगत पिता की डायरियों और अपने संस्मरण पर आधारित एक किताब लिखी है। 

शर्मिष्ठा ने एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में कहा, "जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार राष्ट्रपति से मिलने आए तो बाबा ने अपनी डायरी में लिखा- वह कांग्रेस सरकार और उसकी नीतियों के कटु आलोचक हैं, लेकिन निजी तौर पर वह हमेशा मेरे पैर छूते हैं।" शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस किस्से की पुष्टि की है।

उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच संबंध केवल व्यक्तिगत सम्मान पर नहीं बने थे। राष्ट्रपति के रूप में बाबा का मानना था कि निर्वाचित सरकार में हस्तक्षेप न करना भी उनकी जिम्मेदारी है।"

वह बताती हैं, पहली ही बैठक में प्रणब मुखर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत स्पष्ट रूप से कहा- 'हम दो अलग-अलग विचारधाराओं के हैं, लेकिन लोगों ने आपको जनादेश दिया है। मैं शासन में हस्तक्षेप नहीं करूंगा। यह आपका काम है। लेकिन अगर आपको किसी संवैधानिक मामले में मदद की जरूरत होगी, तो मैं वहां मौजूद रहूंगा।"

उन्होंने कहा, "मुझे इस बारे में खुद पीएम मोदी ने बताया था। उन्होंने कहा था- 'दादा (बड़े भाई) के लिए यह कहना बहुत बड़ी बात थी। शुरू से ही उनके बीच खुलापन और ईमानदारी थी।" शर्मिष्ठा ने आगे कहा, हालांकि, इसका मतलब यह नहीं था कि राष्ट्रपति ने संसद को दरकिनार करने और अध्यादेश पारित करने की सरकार की प्रवृत्ति सहित प्रमुख मुद्दों पर प्रधानमंत्री से सवाल नहीं किया था।

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