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भारतीय वायुसेना के पायलट जमीन पर भी करेंगे उड़ान का अभ्यास

Pilots of Indian Air Force

वायुसेना में लड़ाकू विमानों के पायलटों के लिए सिमुलेटर पर अभ्यास अनिवार्य कर दिया गया है। विमानों की कमी के कारण यह व्यवस्था की गई है। विमान हादसों में कमी लाना भी इसका मकसद है। वायुसेना का मानना है कि सिमुलेटर पर ऐसा अभ्यास करना संभव है, जिसमें विमानों को संभावित विषम परिस्थितियों में सुरक्षित निकाल लिया जाता है। 

सिमुलेटर की खरीद अनिवार्य
वायुसेना के सूत्रों के अनुसार, नए पायलटों के प्रशिक्षण में सिमुलेटर को पहले ही शामिल किया जा चुका है। लेकिन अब लड़ाकू विमानों के पायलटों को भी अपने नियमित अभ्यास (रिहर्सल) का एक हिस्सा सिमुलेटर पर पूरा करना होता है। वायुसेना ने संसद को दी जानकारी में यह भी बताया है कि अब विमानों की खरीद के साथ सिमुलेटर की खरीद अनिवार्य कर दी गई है। हाल में राफेल विमानों की खरीद में भी सिमुलेटर खरीदे गए। 

विमान कम, पायलट ज्यादा
वायुसेना से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस समय लड़ाकू विमान कम हैं जबकि पायलट ज्यादा हैं। दरअसल पायलटों की कमी का आकलन वायुसेना की 42 स्क्वाड्रन के हिसाब से किया जाता है। इस हिसाब से लड़ाकू विमानों के लिए एक हजार पायलट होने चाहिए लेकिन अभी 31 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं। इस प्रकार कुल 558 विमान ही उपलब्ध हैं। लेकिन इनमें से भी करीब 30 फीसदी विमान मरम्मत आदि के कारण सेवा में नहीं होते। इस प्रकार असल में 390-400 विमान ही किसी समय में उड़ान के लिए तैयार होते हैं। 

कॉकपिट-पायलट अनुपात
वायुसेना के अनुसार, एक लड़ाकू विमान के लिए 1.25 पायलट का अनुपात रखा गया है। इस प्रकार करीब 500 पायलटों की उपलब्धता अभी पर्याप्त है। जबकि पायलट 900-1000 के बीच हैं। ऐसे में पायलटों के लिए विमान की उपलब्धता कम रहती है। वायुसेना सूत्रों के अनुसार, साल में लड़ाकू विमान करीब 2.5 लाख घंटे उड़ान भरते हैं। पायलटों के लिए कम से कम सौ घंटे प्रतिमाह उड़ान भरना अनिवार्य है। इसलिए उन्हें उड़ान के साथ-साथ सिमुलेटर पर अभ्यास करके अपने घंटे पूरे करने होते हैं। सिमुलेटर में, उड़ान के दौरान संभावित अनेक विषम परिस्थितियों से विमान को निकालने के तरीकों का अभ्यास करना संभव है। इससे पायलटों को बिना उड़ान भरे ऐसी विषम परिस्थितियों का अनुभव हो जाता है। वायुसेना ने कहा कि सिमुलेटर पर अभ्यास से हादसों में कमी आएगी।

विमानों के उड़ान के घंटे भी तय
वायुसेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि कोई विमान जब बेड़े में शामिल होता है तब उसके उड़ान के घंटे तय होते हैं। इसलिए यह भी तय किया जाता है कि किस विमान को महीने कितने घंटे उड़ाना है। किसी विमान के उड़ान के घंटे कुछ ही साल में खत्म करने से भी नुकसान यह होता है कि उस विमान को या तो अपग्रेड करना होगा या बेड़े से हटाना होगा और जल्दी नए विमान लेने पड़ेंगे। इस वजह से भी सिमुलेटर पर अभ्यास करना जरूरी है, ताकि विमानों को लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सके।

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  • Web Title:Pilots of Indian Air Force will also practice on land in flight simulators