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देशकोरोना के इंडियन वेरिएंट पर पूरी तरह असरदार नहीं फाइजर वैक्सीन, स्टडी में किया गया दावा

मदन जैड़ा,नई दिल्लीPublished By: Madan Tiwari
Wed, 12 May 2021 12:59 AM
कोरोना के इंडियन वेरिएंट पर पूरी तरह असरदार नहीं फाइजर वैक्सीन, स्टडी में किया गया दावा

कोरोना के भारतीय प्रकार पर फाइजर के टीके बीएनटी 162 बी2 का असर कम हो सकता है। वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में यह दावा किया है। यह अध्ययन बायोरैक्सीव जर्नल के ताजा अंक में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में कैंब्रिज विश्वविद्यालय के साथ-साथ सीएसआईआर के वैज्ञानिक भी शामिल हुए थे। इस अध्ययन में कहा गया है कि भारतीय प्रकार बी.1. 617 में तीन प्रमुख बदलाव दिखे हैं, जिनमें एल 452आर, ई484क्यू तथा पी681आर हैं। 

हालांकि, आमतौर पर इसमें पहले दो ही बदलावों का जिक्र होता है और इस डबल म्यूटेशन वायरस के रूप में जाना जाता है। शोध के अनुसार, पी 681आर से इसकी संक्रामक क्षमता में इजाफा हुआ है। जबकि इन सभी बदलावों का कुल नतीजा यह भी है कि इंसान के शरीर में टीकाकरण से बनी न्यूट्रीलाइजिंग एंटीबाडीज इस वायरस के खिलाफ कम प्रतिरोध पैदा करती हैं।

इस अध्ययन में शामिल सीएसआईआर की प्रयोगशाला इंस्टीट्यूट आफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के निदेशक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा कि यह अध्ययन फाइजर के टीके पर किया गया है। यह दर्शाता है कि फाइजर के टीके से उत्पन्न एंटीबाडीज इस वायरस के खिलाफ अपेक्षाकृत कम असर दिखा पाएंगी। जिससे टीके के बावजूद हल्के संक्रमण का खतरा हो सकता है। दूसरे, शब्दों में कहें तो टीका पूरी तरह से इस संक्रमण से बचाव नहीं कर पाएगा लेकिन बीमारी को गंभीर होने से जरूर रोक लेगा। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन फाइजर के टीके तक ही सीमित था भारतीय टीकों के लेकर अध्ययन नहीं किया गया है।

हालांकि, भारतीय वैज्ञानिक दावा कर चुके हैं कि दोनों टीके कोविशील्ड एवं कोवैक्सीन नए वेरिएंट के खिलाफ कारगर हैं। हालांकि यह भी कहा गया था कि यह दावा आरंभिक नतीजों के आधार पर है तथा विस्तृत अध्ययन जारी है। अग्रवाल ने कहा कि ब्रिटेन में पाए गए भारतीय प्रकार के नए स्वरूप बी. 1 617-2 को भी इस अध्ययन में शामिल नहीं किया गया है। इस नए वेरिएंट में ई484क्यू नहीं मिला है जबकि एक दूसरा बदलाव टी478के दर्ज किया गया है।

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