ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News देशGST के दायरे में आएंगे पेट्रोल-डीजल; प्रशांत किशोर ने बताया- तीसरी बार PM बनते ही क्या-क्या करेंगे मोदी

GST के दायरे में आएंगे पेट्रोल-डीजल; प्रशांत किशोर ने बताया- तीसरी बार PM बनते ही क्या-क्या करेंगे मोदी

प्रशांत किशोर ने कहा कि राज्यों के पास वर्तमान में राजस्व के तीन प्रमुख स्रोत हैं है। पेट्रोलियम, शराब और भूमि। ऐसे में मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। 

GST के दायरे में आएंगे पेट्रोल-डीजल; प्रशांत किशोर ने बताया- तीसरी बार PM बनते ही क्या-क्या करेंगे मोदी
Himanshu Jhaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्ली।Wed, 22 May 2024 06:26 AM
ऐप पर पढ़ें

लोकसभा चुनाव के लिए पांच चरणों में वोट डाले जा चुके हैं। दो चरण अभी भी बाकी हैं। इस बीच राजनीतिक विश्लेषक प्रशांत किशोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत की भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी को पिछली बार के आसपास के बराबर ही सीटें आएंगी। इसके अलावा उन्होंने इस बात की भी भविष्यवाणी की है कि अगर केंद्र में पीएम मोदी की तीसरी बार सरकार बनती है तो क्या-क्या बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

पीके के नाम से मशहूर प्रशांत किशोर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पेट्रोलियम को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत लाया जा सकता है और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर महत्वपूर्ण अंकुश लग सकता है। इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में पीके ने मोदी सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में आने वाले बदलावों की भी भविष्यवाणी की है।

पीके ने कहा, "मुझे लगता है कि मोदी 3.0 सरकार धमाकेदार शुरुआत करेगी। केंद्र के पास शक्ति और संसाधन दोनों ही पहले से और अधिक होंगे। राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता में कटौती करने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास हो सकता है।" उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई व्यापक गुस्सा नहीं है, इसलिए भाजपा लगभग 303 सीटें जीतेगी।

प्रशांत किशोर ने कहा कि राज्यों के पास वर्तमान में राजस्व के तीन प्रमुख स्रोत हैं है। पेट्रोलियम, शराब और भूमि। ऐसे में मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। 

आपको बता दें कि फिलहाल पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और प्राकृतिक गैस जैसे पेट्रोलियम उत्पाद जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।  पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाना उद्योग जगत की लंबे समय से मांग रही है। अगर ऐसा होता है तो राज्यों को राजस्व का भारी नुकसान होगा। पेट्रोल को जीएसटी के तहत लाने से राज्य करों का अपना हिस्सा प्राप्त करने के लिए केंद्र पर और अधिक निर्भर हो जाएंगे।

उन्होंने यह भी भविष्यवाणी की कि केंद्र राज्यों को संसाधनों के हस्तांतरण में देरी कर सकता है और राजकोषीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) मानदंडों को सख्त बना सकता है।