कोरोना महामारी को अब भी षडयंत्र मान रहे लोग, 25 देशों पर हुए सर्वे के परिणामों ने बढ़ाई चिंता
कोरोना महामारी को अब भी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा षडयंत्र मान रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि कोरोना से हो रही मौतों को दुनिया में बढ़ाचढ़ाकर दिखाया जा रहा है। वहीं, कुछ देशों में लोग मान रहे हैं कि...

कोरोना महामारी को अब भी दुनिया का एक बड़ा हिस्सा षडयंत्र मान रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि कोरोना से हो रही मौतों को दुनिया में बढ़ाचढ़ाकर दिखाया जा रहा है। वहीं, कुछ देशों में लोग मान रहे हैं कि कोरोना एक राजनीतिक षड़यंत्र तहत पैदा किया गया वायरस है। कैंब्रिज द्वारा दुनिया के 25 देशों में किए गए एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे के आधार पर यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है। रिपोर्ट में बताया गया कि गौरतलब है कि महामारी को दुनिया में फैले दस महीने से अधिक समय हो चुका है और अब तक 11 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
सर्वे से पता लगा कि लोगों में सबसे बड़ा भ्रम कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या को लेकर है। लोगों को लगता है कि सरकारें वास्तविकता से ज्यादा मौतें बता रही है। नाइजीरिया में सबसे ज्यादा 60% आबादी ऐसा मानती है। जबकि ग्रीस, दक्षिण अफ्रीका, पोलैंड और मैक्सिको में 40% से ज्यादा लोग ऐसा मान रहे हैं। अमेरिका में 38%, हंगरी में 36%, इटली में 30% और जर्मनी में 28% लोग मानते हैं कि कोरोना से इतने लोग नहीं मर रहे जितने सरकार बता रही है।
वायरस को चीन या अमेरिका का फैलाया मानते
यूरोप और मध्य एशिया के कई देशों के लोगों ने कहा कि कोरोना वायरस कोई प्राकृतिक महामारी नहीं है बल्कि चीन या अमेरिका ने इसे दुनिया में फैलाया है। पोलैंड में हर पांच में से एक व्यक्ति मानता है कि शक्तिशाली देश ने इसे पैदा किया। दूसरी ओर, टर्की, इजिप्ट, सऊदी अरब में भी लगभग इतने ही लोग इस भ्रम के शिकार हैं। अमेरिका में वायरस को चीन का बनाया मानने वालों की संख्या 13% है जबकि 17% मानते हैं कि उनकी सरकार ने ही इसे पैदा किया। टर्की में 37%, फ्रांस में 13%, ब्रिटेन में 5% लोग वायरस के लिए अमेरिका को जिम्मेदार मानते हैं।
5-जी तकनीक की उपज
कोरोना से जुड़ी फर्जी सूचनाओं का आलम यह है कि बहुत से देशों में यहां तक माना जाने लगा कि 5-जी इंटरनेट तकनीक के कारण कोरोना वायरस फैला। जुलाई से अगस्त तक कराए गए सर्वे से पता लगा कि टर्की, इजिप्ट, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया में हर पांच में से एक व्यक्ति ऐसा मानता है।
टीके को लेकर भी भ्रम
सर्वे में 19 देशों के 20% से अधिक लोगों ने कहा कि कोविड-19 का जो टीका तैयार किया जा रहा है, उसके हानिकारक असर के बारे में सरकारें जनता को नहीं बता रहीं। दक्षिण अफ्रीका में 57%, टर्की में 48%, फ्रांस में 38%, अमेरिका में 33%, जर्मनी में 31% और स्वीडन में 26% लोग ऐसा मानत हैं।
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लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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