पीएचडी नामांकन प्रक्रिया पर लोकभवन से फिर लगी रोक
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएचडी नामांकन प्रक्रिया को एक बार फिर रोक दिया गया है। राज्यपाल सचिवालय के निर्देश से यह निर्णय लिया गया। विवि ने सभी संबंधित व्यक्तियों को इस विषय में जानकारी दी है। प्रक्रिया को कुलाधिपति की स्वीकृति के बाद ही फिर से शुरू किया जाएगा।

राजीव रंजन झा,दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पीएटी-2024 के तहत चल रही पीएचडी नामांकन प्रक्रिया पर एक बार फिर रोक लग गई है। राज्यपाल सचिवालय से प्राप्त निर्देश के आलोक में विवि प्रशासन ने प्रवेश प्रक्रिया पर 12 सितंबर से रोक लगा दी है। पीएचडी नामांकन प्रक्रिया से संबंधित सभी लोगों, उम्मीदवारों, विभागाध्यक्षों, साक्षात्कार समिति के सदस्यों और संकायाध्यक्षों के लिए विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को इस आशय की सूचना जारी कर दी है। विवि की ओर से कहा गया है कि पूरे मामले को विचारार्थ कुलाधिपति के समक्ष रखा जाएगा। यदि मंजूरी मिलती है, तो प्रवेश प्रक्रिया कुलाधिपति की स्वीकृति के बाद ही फिर से शुरू की जाएगी।
राज्यपाल सचिवालय के निर्देश
गौरतलब है कि राज्यपाल सचिवालय से अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने शुक्रवार को विज्ञापित रिक्तियों में मनमाने ढंग से बढ़ोतरी के करण पीएचडी नामांकन प्रक्रिया को तुरंत रोकने का निर्देश कुलपति को भेजा, जिसके बाद आनन-फानन में विश्वविद्यालय की ओर से प्रक्रिया पर रोक संबंधी सूचना जारी कर दी गई है। अपर मुख्य सचिव ने कुलपति को भेजे पत्र में कहा है कि पीएचडी नामांकन के संबंध में पता चला है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान शुरू में बताई गई या विज्ञापित सीटों की संख्या में बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी मनमानी लगती है, क्योंकि इसके लिए योग्य रिसर्च सुपरवाइज़र और उनकी तय सुपरवाइज़री क्षमता उपलब्ध नहीं है। पत्र में कहा गया है कि अगर ऐसा किया जाता है, तो इसका मतलब यह भी होगा कि आने वाले कई सालों तक पीएचडी के लिए कोई सीट खाली नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी भी दिखती है। इसी आधार पर अपर मुख्य सचिव ने पीएचडी नामांकन की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने और इस मामले व इससे जुड़े मुद्दों को राज्यपाल सह कुलाधिपति के विचारार्थ प्रस्तुत करने का निर्देश लनामिवि के कुलपति को दिया है। राज्यपाल की मंज़ूरी मिलने के बाद ही यह प्रक्रिया फिर से शुरू की जाएगी। बता दें कि पीएचडी नामांकन के लिए साक्षात्कार की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू की गई है। पहले दिन भौतिकी, वनस्पति विज्ञान, संस्कृत, उर्दू, मैथिली, दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, गृह विज्ञान, एआईएच एवं संगीत सहित 11 विषयों के साक्षात्कार संपन्न हो गए हैं। गणित और मैनेजमेंट विषय को छोड़ अन्य 10 विषयों के साक्षात्कार भी शुक्रवार को आयोजित हुए हैं। इन 10 विषयों में अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने के कारण इनका साक्षात्कार 12, 15, 16 एवं 18 सितंबर को प्रस्तावित था, जिस पर अब रोक लगा दी गई है。
पहले के आदेशों का असर
गौरतलब है कि इससे पूर्व 15 जुलाई को राज्यपाल सचिवालय ने नामांकन प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए अधिसूचना को निरस्त करने और बिहार राज्य विश्वविद्यालय पीएचडी अध्यादेश एवं नियमावली, 2026 के तहत नया विज्ञापन जारी करने का निर्देश दिया था। हालांकि 11 अगस्त को राज्यपाल सचिवालय ने अपने पूर्व के आदेश को वापस लेते हुए पीएटी-2024 की प्रक्रिया जारी रखते हुए पीएचडी कोर्सवर्क में नामांकन पूर्ण करने की स्वीकृति प्रदान की थी। अब एक बार फिर प्रक्रिया पर रोक लगने से अभ्यर्थियों में निराशा छा गई है.


