patna aasara home death of two girls reavled from post mortem report in case of death of two girls of Asara Home - हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिवः आसरा होम की दो लड़कियों की मौत मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ ये बड़ा खुलासा DA Image

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हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिवः आसरा होम की दो लड़कियों की मौत मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ ये बड़ा खुलासा

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राजीवनगर थाना क्षेत्र के नेपालीनगर स्थित आसरा होम में रहने वाली पूनम भारती और बेबी की जान लापरवाही में चली गई। इसकी पुष्टि दोनों की मेडिकल रिपोर्ट से हुई है। बीमारी की वजह से गत 28 जुलाई से ही दोनों ने भोजन करना बंद कर दिया था। केवल चाय और बिस्किट खाकर रह रही थीं। जांच करने वाले डॉक्टर ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी थी। इसके बाद भी न संस्था संचालक और न ही जिम्मेदार अफसरों ने ध्यान दिया। 

सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थी संवासिन
डॉक्टर ने दोनों को अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह के साथ-साथ उन्हें दो टैबलेट देने की भी बात कही थी। जांच में यह भी पता चला कि उन्हें 102 डिग्री सेल्सियस बुखार है। उन्हें पौष्टिक आहार देने की सलाह दी गई थी। ऐसी हालत में भी दोनों को चाय और बिस्किट के सहारे ही 15 दिनों तक रहीं। यदि दोनों की मेडिकल रिपोर्ट को अधिकारी ध्यान में रखकर उचित कदम उठाते तो शायद उन्हें बचाया जा सकता था। 

भागलपुर और बेगूसराय की रिपोर्ट की हुई अनदेखी
पूनम भारती नेपालीनगर आसरा होम से पहले 2016 में बाल गृह सोनी सदन निरालानगर बेगूसराय में रहती थी। 9 सितंबर 2016 को उसके स्वास्थ्य परीक्षण में कहा गया है कि वह मूक बधिर है। उसकी सेहत में लगातार गिरावट आ रही है। दिन-प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है। 8 सितंबर 2016 को उसे बेगूसराय सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर ने उसके शरीर में खून की कमी पाई थी। डॉक्टर की सलाह पर उसे खून चढ़ाया गया। एक माह बाद जिला बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक ने बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी। साथ ही उन्होंने इसकी सूचना बेगूसराय जिला प्रशासन को भी दी लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। जुलाई 2018 में उसे पटना रेफर कर दिया गया। यहां भी उसकी सेहत को लेकर लापरवाही जारी रही।

संस्थागत देखरेख वाले संस्थाओं के लिए नहीं है कोई एसओपी
समाज में परित्यक्त या बेसहारा महिला, बच्चे और बच्चियों के लिए समाज कल्याण विभाग की ओर से कई प्रकार के आश्रय गृह चलाये जा रहे हैं। सरकार हर साल इनपर अरबों रुपये खर्च करती है। इसके बाद भी इन संस्थाओं के संचालन के लिए कोई एसओपी यानी स्टैंडर्ड ऑपरेटिव प्रोसिजर नहीं है। इसके माध्यम से आश्रय गृहों के अंदर किन-किन मानकों हो और पादर्शिता बनी रहे, ताकि यहां पीड़िताओं को समुचित और सामान्य जिन्दगी जीने की आधारभूत जरूरत पूरी हो। साथ ही साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाए। इन महत्वपूर्ण बातों की कोई एसओपी नहीं रहने के कारण संस्थागत देखरेख में अनदेखी होती है। कभी-कभी समस्याओं को दबा दिया जाता है। इस संबंध में पटना के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा है। 

सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थी संवासिन
मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया है कि संवासिन पूनम भारती और बेबी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थी। यह मानसिक बीमारी है, जिसमें दिमाग सही से काम नहीं करता है। इस बीमारी में मेमोरी भी धीरे-धीरे लॉस होने लगती है। ऐसे मरीजों का नियमित उपचार जरूरी होता है। समय से दवा और भोजन नहीं मिलने पर बीमारी गंभीर होती चली जाती है। 

पटना के डीएम कुमार रवि ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट के अध्ययन करने के बाद जांच कराई जा रही है कि किन-किन स्तर से लापरवाही बरती गई। मुझे तो अधिकारियों ने अंतिम क्षण में इसकी जानकारी दी। यदि पहले जानकारी मिली रहती तो उन्हें जरूर अस्पताल में भर्ती कराया जाता। जो भी दोषी हैं उन पर कार्रवाई होगी। 

बनारसी सिंह की रिहाई की उठने मांग 
 राजीव नगर आसरा गृह से चार संवासिनों को भगाने के आरोप में जेल में बंद बनारसी सिंह की रिहाई की मांग उठने लगी है। ऐपवा ने मांग की है कि इस पूरे मामले में मनीषा दयाल और चिरंतन कुमार दोषी हैं। आसरा गृह के अंदर संवासिनों के साथ गलत व्यवहार हो रहा है। बनारसी सिंह को संवासिनें अपने घर का पता बताती थीं और आसरा गृह में हो रहे अमानवीय व्यवहार के बारे में भी बता रही थीं। इसकी जानकारी जब मनीषा दयाल और चिरंतन कुमार को मिली तो प्लान बनाकर बनारसी सिंह को फंसा दिया गया। पुलिस ने भी आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर बनारसी पर प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेज दिया। अगर पुलिस जल्द से जल्द कोई कार्रवाई नहीं करती है तो महिला संगठन आंदोलन करेगी, ताकि एक निर्दोष को बचाया जा सके। 

मनीषा के एजीओ दफ्तर में पड़ा छापा
मनीषा को रिमांड पर लेने के बाद पटना पुलिस की स्पेशल टीम ने सोमवार की रात मनीषा के एनजीओ दफ्तर में छापेमारी कर दी। इस दौरान कुछ कम्प्यूटर और कागजात मिले हैं। खबर है कि पुलिस ने मनीषा के एक और रिश्तेदार के घर पर भी छापेमारी की है। 

जानकारी के अनुसार, खुद को संस्था की कोषाध्यक्ष बताने वाली मनीषा दयाल ने पुलिस के सामने बताया कि वह दिलीप कामत के कहने पर कर ही सब कुछ कर रही थी। उनकी संस्था को कामत ने सही बताया था। जिन संवासिनों की मौत हुई हैं,वह पंद्रह दिनों से बीमार थीं।

संस्था सचिव चिरंतन का 'एवीएन' से है रिश्ता
अनुमया ह्यूमन रिसोर्स फाउंडेशन के चेयरमैन प्रेमनाथ दास हैं। संस्था का सचिव प्रेमनाथ का बेटा चिरंतन है। इनका पाटलिपुत्रा में एवीएन इंग्लिश स्कूल है। दस साल पहले रामाशीष सिंह स्कूल का पार्टनर बना था। पिछले साल राजीवनगर में स्थित एवीएन स्कूल नीट फर्जीवाड़ा में पकड़ा गया था। इसके बाद स्कूल को बंद कर दिया गया था। इसका संचालक रामाशीष सिंह था। ताज्जुब की बात है कि एक ही संस्था के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में सचिव और चेयरमैन पद पर पिता-पुत्र हैं। जबकि एनजीओ की गाइडलाइन के अनुसार यह गलत है। .

67 लाख मिला था फंड
आसरा गृह में 58 महिलाएं ऐसी हैं जिनकी उम्र 20 साल से 40 साल के बीच है। जिला बाल संरक्षण ईकाई के सहायक निदेशक होम की निगरानी कर रहे थे। इस होम को चलाने के लिए संस्था को समाज कल्याण विभाग की ओर से 67 लाख रुपये का फंड मिला था। .

आखिरी बार दिलीप कामत ही गए थे निरीक्षण करने
राजीव नगर थाने के नेपालीनगर चंद्रविहार कॉलोनी में अनुमया ह्यूमन रिसोर्स फाउंडेशन का आसरा गृह है। आसरा गृह में सीसीटीवी कैमरा नहीं था। यहां एक सप्ताह पहले आखिरी बार निरीक्षण करने जिला बाल संरक्षण अधिकारी दिलीप कामत गए थे। उस समय सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया गया था। निरीक्षण के दौरान केवल रजिस्टर चेक किया जाता था। इसमें मानसिक विक्षिप्त संवासिनों को रखा जा रहा था। 10 अगस्त तक यहां 75 संवासनियां रह रही थीं। इनमें मात्र 17 संवासिनें 18 साल से कम उम्र की थी। 

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