फर्जी पासपोर्ट मामले में आचार्य बालकृष्ण और नरेश द्विवेदी दोषमुक्त
- देहरादून की विशेष अदालत का अहम फैसला, 15 साल पुराने मामले में मिली राहत

पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण और सह-आरोपी नरेश चंद्र द्विवेदी को फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र और पासपोर्ट मामले में कोर्ट ने सोमवार को बरी कर दिया। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) संदीप सिंह भंडारी की अदालत ने मामले में फैसला दिया। यह मामला तत्कालीन अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष की ओर से राष्ट्रपति को दी गई एक शिकायत से शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप था कि बालकृष्ण नेपाली नागरिक हैं और उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल किया है। इस आधार पर सीबीआई ने 24 जुलाई 2011 को मुकदमा दर्ज किया और 10 जुलाई 2012 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।
इस मुकदमे के दौरान बालकृष्ण ने 21 जुलाई 2012 को आत्मसमर्पण किया था। 27 दिन जेल में बिताने के बाद 17 अगस्त 2012 को उन्हें जमानत मिली थी। वहीं, सह आरोपी नरेश चंद्र द्विवेदी को छह अगस्त 2012 को गिरफ्तार किया गया और 14 सितंबर 2012 को जमानत मिली। 15 साल लंबे खिंचे इस मामले में सीबीआई की चार्जशीट में लगाए आरोप कोर्ट में साबित नहीं हो सके। ऐसे में बालकृष्ण और खुर्जा निवासी नरेश बरी कर दिए गए। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 471 (फर्जी दस्तावेज का असली के रूप में उपयोग) और पासपोर्ट अधिनियम 1967 की धारा 12(1)(बी) के तहत यह केस चला। वहीं इस सह आरोपी नरेश पर धारा 466 (सार्वजनिक रिकॉर्ड में जालसाजी) का आरोप था।


