आयुर्वेद चिकित्सा विश्व को भारत की दी गई प्रथम चिकित्सा पद्धति
लोहरदगा, पतंजलि योग समिति ने आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस पर वृक्षारोपण एवं गुरुदक्षिणा कार्यक्रम का आयोजन किया। योगाभ्यास के बाद जिला प्रभारी ने आयुर्वेद की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और गिलोय के लाभ बताए। इस अवसर पर गिलोय का वितरण किया गया और उपस्थित लोगों ने गिलोय लगाने का संकल्प लिया।

लोहरदगा, संवाददाता। पतंजलि योग समिति भारत स्वाभिमान जिला लोहरदगा के तत्वावधान में आचार्य बालकृष्ण के जन्मदिवस पर वृक्षारोपण सप्ताह एवं गुरुदक्षिणा कार्यक्रम अवसर पर स्थानीय सुंदरी देवी सरस्वती शिशु मंदिर प्रांगण में कार्यक्रम आयोजित किया गया। सर्वप्रथम योगाभ्यास किया गया एवं उसके बाद जिला प्रभारी एवं मुख्य योग प्रशिक्षक प्रवीण कुमार भारती के द्वारा आयुर्वेद मनीषी आचार्य बालकृष्ण जी के आयुर्वेद क्षेत्र में किये रहे पुरुषार्थ पर विशेष प्रकाश डाला गया।
आयुर्वेद की विशेषताएं
जिला प्रभारी ने कहा कि आयुर्वेद चिकित्सा विश्व को भारत की दी गई प्रथम चिकित्सा पद्धति है। आयुर्वेद चिकित्सा में कोई जोखिम नहीं होता और यह मनुष्य बीमार ही न पड़े इस सिद्धांत पर आधारित है तथा मनुष्य जीवन को रागरहित बनाता है। उन्होंने कहा वर्तमान में आचार्य बालकृष्ण जी हमारे देश आध्यात्मिक योग एवं आयुर्वेद परंपरा के महान विद्वान और संत हैं। जिला प्रभारी ने उपस्थित जनों को गिलोय एवं अन्य औषधीय पौधों का प्रयोग और लाभ भी बताए। जिसमें बताया गया कि गिलोय अद्भुत लाभकारी है जो अनेक रोगों सर्दी,खांसी, कफ, अस्थमा, बुखार, डेंगू, चिकनगुनिया, आर्थराइटिस, मधुमेह आदि अनेक रोगों का नाश करती है।
गिलोय का वितरण
इस अवसर पर पतंजलि राज्य कार्यकारिणी सदस्य शिवशंकर सिंह एवं पतंजलि जिला प्रभारी अभय भारती द्वारा सभी को गिलोय का वितरण किया गया। साथ ही बेल के पौधे का भी वितरण किया गया एवं सभी ने गिलोय लगाने एवं इसके प्रयोग का संकल्प लिया।
वनवासी कल्याण आश्रम के कृपा प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संचालक सच्चिदानंद अग्रवाल, शिवशंकर सिंह, रघुनन्दन शर्मा, दिनेश प्रजापति, राम कुमार, राम सुभग राय, विनय केशरी, अनिल गुप्ता, महेंद्र सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।


