पासपोर्ट का फर्जीवाड़ा, एजेंटों के जाल में संगमनगरी, सप्ताहभर में दो मामले आए सामने
संगमनगरी में पासपोर्ट बनवाने के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े ने पुलिस और पासपोर्ट सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सप्ताहभर के भीतर दो फर्जी पासप

प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। संगमनगरी में पासपोर्ट बनवाने के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े ने पुलिस और पासपोर्ट सत्यापन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सप्ताहभर के भीतर दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें अलग-अलग नाम, जन्मतिथि, माता-पिता के नाम और पते के आधार पर एक ही व्यक्ति के दो पासपोर्ट बनवाने का खुलासा हुआ। दोनों मामलों में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय लखनऊ की जांच और निर्देश के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। दारागंज के बक्शी कला निवासी मोहम्मद शरीफ पर आरोप है कि अलग-अलग पहचान के साथ दो पासपोर्ट हासिल किए। पहले मोहम्मद शरीफ अहमद के नाम पर वर्ष 2005 और दूसरा वर्ष 2013 में शरीफ अहमद सिद्दीकी के नाम से पासपोर्ट बनवाया गया।
दोनों में जन्मतिथि, माता-पिता के नाम और पता भी अलग दर्ज था। इसी तरह एयरपोर्ट थाने में बलिया के सहतवार क्षेत्र निवासी उमाशंकर गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। वर्ष 2013 में नाम दयाशंकर गुप्ता और वर्ष 2024 में उमाशंकर गुप्ता के नाम पर पासपोर्ट बनाया गया। अब सवाल उठ रहा है कि क्या पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में सक्रिय एजेंट और बिचौलिए आवेदकों के दस्तावेजों में हेरफेर कर उन्हें अलग पहचान से पासपोर्ट हासिल कराने का खेल चला रहे हैं।डीसीपी क्राइम मनीष शांडिल्य का कहना है कि पुलिस दोनों मामलों में आवेदन के साथ लगाए गए दस्तावेज, सत्यापन प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका खंगालेगी। नामजद आरोपियों से पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य नाम सामने आने की भी उम्मीद है। ताकि इस तरह अन्य लोगों के भी फर्जी नाम व पता के आधार पर जारी पासपोर्ट की जानकारी मिल सके।


