सहसवान-रामपुर घराने के उस्ताद इफ्तिखार हुसैन का निधन

हिन्दुस्तान, बदायूं
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सहसवान-रामपुर घराने के उस्ताद इफ्तिखार हुसैन का निधन सहसवान-रामपुर घराने के उस्ताद इफ्तिखार हुसैन का निधन सहसवान-रामपुर घराने के उस्ताद इफ्तिखार हुसैन

सहसवान-रामपुर घराने के उस्ताद इफ्तिखार हुसैन का निधन

पद्म भूषण उस्ताद निसार हुसैन खान के पुत्र और भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध गायक और सहसवान-रामपुर घराने के उस्ताद इफ्तिखार हुसैन खान का 83 वर्ष की आयु में निधन में हो गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। बदायूं की धरती से निकलकर देश-विदेश में भारतीय शास्त्रीय संगीत की पहचान बनाने वाले उस्ताद इफ्तिखार हुसैन खान ने अपनी गायकी और संगीत साधना से अलग पहचान बनाई। बदायूं शहर के मोहल्ला वेदों टोला निवासी उस्ताद इफ्तिखार हुसैन साहब के निधन की खबर सुनकर संगीत प्रेमियों में और उनके चाहने वालों में गम छा गया। शनिवार दोपहर बाद नमाजे जोहर उस्ताद इफ्तिखार हुसैन खान को बदायूं स्थित छोटे सरकार के पीछे कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनके जनाजे में परिजन, परिचित, संगीत प्रेमी और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। उनके निधन को भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के लिए अपूर्णीय क्षति माना जा रहा है।

इफ्तिखार की संगीत शिक्षा

इफ्तिखार पद्म भूषण उस्ताद निसार हुसैन खान के पुत्र थे। उन्हें बचपन से ही अपने पिता से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा मिली। सहसवान-रामपुर-ग्वालियर घराने की समृद्ध सेनिया परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ख्याल, ठुमरी, दादरा और तराना गायन में विशेष दक्षता हासिल की। उन्होंने विभिन्न रागों पर आधारित अनेक बंदिशों की भी रचना की।

संगीत के प्रति जीवनभर समर्पण

उनकी शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां आकाशवाणी और दूरदर्शन से प्रसारित होती रही हैं। अपनी विशिष्ट आवाज और गायन शैली के कारण वह श्रोताओं के बीच खास पहचान रखते थे। संगीत के प्रति उनका समर्पण जीवनभर बना रहा और उन्होंने नई पीढ़ी को भी इस परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया।

देश-विदेश में फैले हैं शिष्य

पिता उस्ताद निसार हुसैन ख़ान की स्मृति में उन्होंने परंपरा-उस्ताद निसार हुसैन ख़ान संगीत समिति की स्थापना की थी। इसके माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा और प्रचार-प्रसार का कार्य किया जाता रहा। उनके अनेक शिष्य देश-विदेश में संगीत साधना कर इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

हर साल करते थे पौधरोपण

इफ्तिखार हुसैन खान पर्यावरण दिवस पर हर वर्ष बदायूं क्लब में एक पौधा लगाते थे। क्लब के सचिव अक्षत अशेष बताते हैं, वे हर वर्ष पर्यावरण दिवस पर क्लब में आते थे और हम सबके साथ एक पौधा लगाते थे।

इफ्तिखार के पुत्र जाने माने सितार वादक

उस्ताद इफ्तिखार हुसैन खान के पुत्र मुजतबा हसन जाने माने सितार वादक हैं। उन्होंने देश-विदेश में जाकर हिन्दुस्तान का नाम ऊंचा कर रहे हैं। मुजतबा हसन सितार वादन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके हैं। उनके अनेकों कार्यक्रम देश-विदेश में होते हैं। वे अपने पिता की विरासत को आगे ले जा रहे हैं

सामान्य प्रश्न

✦उस्ताद इफ्तिखार हुसैन खान का निधन कब हुआ?−
उस्ताद इफ्तिखार हुसैन खान का निधन 83 वर्ष की आयु में हुआ।
Hindustan | Bureau

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