पीएम-सीएम को पद से हटाने वाले विधेयक पर जेपीसी की रिपोर्ट टली
गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने से संबंधित विधेयक की संयुक्त समिति ने शुक्रवार को ड्राफ्ट रिपोर्ट को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया। समिति ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों से और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता है।

गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार और 30 दिन तक हिरासत में रहने पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने से जुड़े विधेयक की जांच कर रही संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) ने शुक्रवार को अपने मसौदा रिपोर्ट (ड्राफ्ट रिपोर्ट) को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया। खास बात यह रही कि यह फैसला तब लिया गया, जब समिति की पांच सिफारिशों पर एक-एक करके मतदान चल रहा था। संविधान (130वां संशोधन) विधेयक पर बनी संयुक्त समिति ने हाल ही में सदस्यों के बीच अपनी रिपोर्ट साझा की थी, जिसमें पांच सिफारिशें की गई थीं। शुक्रवार को जब समिति इन सिफारिशों पर अलग-अलग मतदान कर रही थी, तभी यह तय किया गया कि इस विषय पर सभी संबंधित पक्षों से और अधिक सलाह-मशविरा तथा सदस्यों के बीच आगे चर्चा की जरूरत है।
असहमति और मतदान
एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने अपनी असहमति दर्ज कराई थी, लेकिन समिति द्वारा अंतिम समय में रिपोर्ट को टालने का फैसला लेने के बाद उन्होंने अपनी आपत्तियां वापस ले लीं। समिति की अध्यक्ष और भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से माना कि इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों से और अधिक बातचीत की जरूरत है।
मतदान की स्थिति
बैठक में मौजूद सदस्यों के अनुसार, पहली दो सिफारिशों पर मतदान हो चुका था और तीसरी पर चर्चा चल रही थी, तभी रिपोर्ट को अपनाने का फैसला टाल दिया गया। सत्तारूढ़ दल के कुछ सांसदों ने भी पहली दो सिफारिशों के खिलाफ मतदान किया। हालांकि, वे बहुमत से मंजूर हो गई थीं।
समिति की सिफारिशें
समिति ने सिफारिश की थी कि यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री या मुख्यमंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें स्थायी रूप से पद से नहीं हटाया जाए, बल्कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक केवल निलंबित किया जाए। समिति ने यह भी प्रस्ताव दिया था कि यदि बाद में अदालत उन्हें बरी कर दे या तय समय के भीतर अभियोजन आगे न बढ़े, तो उनका निलंबन अपने आप समाप्त हो जाए और उन्हें दोबारा पद मिल सके।


