विद्यालयों में 22 को होगी अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी
बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, नियमित उपस्थिति, स्वास्थ्य, पोषण और घर पर पढ़ाई के माहौल पर करेंगे विचार-विमर्श अभिभावकों को प्रेरित करने के लिए शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को दिया है निर्देश

बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, नियमित उपस्थिति, स्वास्थ्य, पोषण और घर पर पढ़ाई के माहौल पर करेंगे विचार-विमर्श ‘निपुण पथ: पढ़ना, लिखना एवं गणना’ थीम पर अभिभावकों और शिक्षकों में संवाद अभिभावकों को प्रेरित करने के लिए शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को दिया है निर्देश (युवा पेज की लीड खबर) भभुआ, नगर संवाददाता। जिले के सभी प्रारंभिक विद्यालयों में 22 सितंबर को अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इस बार संगोष्ठी का विषय ‘निपुण पथ: पढ़ना, लिखना एवं गणना’ रखा गया है।
संगोष्ठी का उद्देश्य
प्राथमिक शिक्षा निदेशक कुमार निशांत विवेक के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने प्रखंडों को पत्र जारी कर कार्यक्रम के सफल आयोजन का निर्देश दिया है। पत्र में कहा गया है कि विद्यालय के शिक्षक और अभिभावकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित कर बच्चों की बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान को मजबूत बनाना इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य है। विभाग ने अधिक से अधिक अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया है, ताकि इस संगोष्ठी में ज्यादा से ज्यादा अभिभावक भाग ले सकें। संगोष्ठी के दौरान बच्चों की उपलब्धियों, उनकी प्रतिभाओं और प्रेरक उदाहरणों को अभिभावकों के साथ साझा किया जाएगा, ताकि बच्चों के प्रति परिवार की जिम्मेदारी और सहयोग की भावना और मजबूत हो सके।
अभिभावकों की भूमिका
कार्यक्रम के आयोजन एवं अनुश्रवण की जिम्मेदारी जिला और प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों को सौंपी गई है। अभिभावकों को जागरूक करने पर रहेगा जोर विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार, संगोष्ठी में अभिभावकों को बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान के महत्व से अवगत कराया जाएगा। साथ ही बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में अभिभावकों की भूमिका पर विशेष चर्चा होगी। शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वह अभिभावकों के साथ बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, कक्षा में प्रदर्शन और सीखने की स्थिति पर विस्तार से संवाद करें। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजने तथा घर पर नियमित पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए भी अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा।
कार्यक्रम की निगरानी
जिला व प्रखंड स्तर पर होगी निगरानी निर्देशिका में जिला और प्रखंड स्तर की भूमिकाएं भी स्पष्ट की गई हैं। जिला शिक्षा प्रशासन को सभी विद्यालयों में संगोष्ठी का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने, इसकी समीक्षा करने तथा मीडिया और जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है। प्रखंड स्तर पर विद्यालयों को शैक्षणिक और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यक्रम के दिन विद्यालयों का भ्रमण कर गतिविधियों का अवलोकन भी किया जाएगा। बेहतर आयोजन करने वाले विद्यालयों और सीआरसी को प्रोत्साहित करने की भी योजना है।
स्वास्थ्य और पोषण
संगोष्ठी में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की जाएगी। अभिभावकों को बताया जाएगा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में नियमित दिनचर्या, संतुलित भोजन और स्वच्छ वातावरण की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है। विद्यालयों को लगभग 80 से 90 मिनट की रूपरेखा के अनुसार कार्यक्रम संचालित करने का निर्देश दिया गया है। कार्यक्रम के समापन के बाद प्रत्येक विद्यालय को निर्धारित गूगल फॉर्म के माध्यम से अपनी रिपोर्ट राज्य स्तर पर उपलब्ध करानी होगी। विभाग का मानना है कि अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी से बच्चों की सीखने की क्षमता और शैक्षणिक उपलब्धियों में सकारात्मक सुधार होगा। फोटो- 11 सितंबर भभुआ- 9 कैप्शन- भभुआ प्रखंड के कूड़ासन मध्य विद्यालय में शुक्रवार को पढ़ाई करते बच्चे।


