सीएपीएफ के कैडर अधिकारियों ने नए कानून को दी चुनौती
पैरामिलिट्री अधिकारियों के समूह ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) सामान्य प्रशासन अधिनियम की धाराओं को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका आरोप है कि यह कानून उनके करियर में आगे बढ़ने के अवसर सीमित करेगा। कोर्ट मामले की सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में करेगी।

पैरामिलिट्री अधिकारियों के एक समूह ने हाल ही में लागू केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) सामान्य प्रशासन अधिनियम की कुछ धाराओं को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनका दावा है कि यह कानून उनके कॅरियर में आगे बढ़ने के मौकों को सीमित करेगा। कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई अगस्त के पहले सप्ताह में तय की है। अधिकारियों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने शनिवार को बताया कि सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी जैसे पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के लगभग 3,000 कैडर अधिकारियों ने रिट याचिकाएं दायर की हैं।
उन्होंने कहा कि ये याचिकाएं संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर की गई हैं, जो नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों को लागू करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति देता है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें शीर्ष अदालत का रुख करने के लिए ‘मजबूर’ होना पड़ा क्योंकि उन्हें लगता है कि नए एक्ट से उन्हें न्याय नहीं मिला और सुप्रीम कोर्ट के मई, 2025 के फैसले के निर्देशों को लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि नया एक्ट सीएपीएफ कैडर अधिकारियों के कॅरियर में ठहराव और आगे बढ़ने की समस्या का समाधान नहीं करेगा। याचिकाकर्ताओं में वीरता पदक विजेता और कुछ महिला अधिकारी भी शामिल हैं।


