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Parakram Diwas 2023: क्या है पराक्रम दिवस का इतिहास, आज 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे जाएंगे द्वीपों के नाम

आज पराक्रम दिवस है। इस दिन का नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती से गहरा नाता है। साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद नेताजी की जयंती पर इस पर्व की शुरुआत हुई है।

Parakram Diwas 2023: क्या है पराक्रम दिवस का इतिहास, आज 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे जाएंगे द्वीपों के नाम
Gaurav Kalaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 23 Jan 2023 09:32 AM
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Parakram Diwas 2023: आज पराक्रम दिवस है। इस दिन का नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती से गहरा नाता है। साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान के बाद नेताजी की जयंती पर इस पर्व की शुरुआत हुई है। भारतीय स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को आधिकारिक तौर पर पराक्रम दिवस के रूप में जाना जाता है। आज का दिन इसलिए भी बेहद खास है, क्योंकि आज के दिन 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर अंडमान निकोबार के 21 बड़े और अनाम द्वीपों के नाम रखे जाएंगे। इसकी घोषणा खुद प्रधानमंत्री मोदी एक कार्यक्रम के दौरान करेंगे। चलिए, जानते हैं पराक्रम दिवस का इतिहास और इसका नेताजी से नाता क्या है...

नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 को ओडिशा के कटक में हुआ था। इसलिए 232 जनवरी का दिन पराक्रम दिवस के रूप में देशभर में मनाया जाता है। पहली बार इस दिवस को साल 2021 में नेताजी के 124वें जयंती के अवसर पर पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया। पश्चिम बंगाल, झारखंड, त्रिपुरा और असम में इस दिन राजकीय अवकाश भी घोषित है। इस दिन केंद्र सरकार नेताजी को सम्मानित करते है। उन्हें देश का महान छात्र और सच्चा राष्ट्रवादी माना जाता है। 

नेताजी के बारे में
आज देशभर में नेताजी सुभाषचंद्र बोस का 126वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। उन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज से बीए दर्शनशास्त्र किया था, यह कॉलेज कलकत्ता विश्वविद्यालय का हिस्सा है। बाद में, 1919 में उन्होंने भारतीय सिविल सेवा (I.C.S.) को पूरा करने के लिए इंग्लैंड की यात्रा की। अपनी कक्षा में उच्चतम अंग्रेजी अंकों के साथ वह चौथे स्थान पर रहे। वह ब्रिटिश सरकार के लिए काम नहीं करना चाहते थे, इसलिए 1921 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया और भारत वापस चले गए। माना जाता है कि देशबंधु चितरंजन दास, जो बाद में उनके राजनीतिक गुरु भी हुए, ने नेताजी को भारत लौटने पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था।

आजाद हिन्द फौज की स्थापना की
नेताजी सुभाषचंद्र बोस देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद कराना चाहते थे। 21 अक्टूबर 1943 को देश से बाहर अविभाजित भारत की पहली सरकार बनी थी। उस सरकार का नाम था आजाद हिंद सरकार। ब्रिटिश राज को नकारते हुए ये अखंड भारत की सरकार थी। 4 जुलाई 1943 को सिंगापुर के कैथे भवन में समारोह के दौरान आजाद हिंद फौज की कमान सुभाष चंद्र बोस के पास आई। फिर 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिंद सरकार की स्थापना हुई। इसे नौ देशों ने मान्यता दी थी। जिसमें जर्मनी, जापान फिलीपींस जैसे देश शामिल थे।

ये हैं वे परमवीर चक्र विजेता
आज 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के मौके पर परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर 21 द्वीपों के नाम रखे जाएंगे। इस अवसर पर प्रधान मंत्री मोदी द्वारा एक समारोह में अंडमान और निकोबार के 21 बड़े अनाम द्वीपों का नाम परमवीर चक्र पुरस्कार विजेताओं के नाम पर रखा जाएगा। परमवीर चक्र विजेताओं में मेजर सोमनाथ शर्मा, सूबेदार और मानद कप्तान (तत्कालीन लांस नायक) करम सिंह, एम.एम,; द्वितीय लेफ्टिनेंट राम राघोबा राणे; नायक जदुनाथ सिंह, कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह, कैप्टन जीएस सलारिया, लेफ्टिनेंट कर्नल (तत्कालीन मेजर) धन सिंह थापा, सूबेदार जोगिंदर सिंह, मेजर शैतान सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुर्जोरजी तारापोर, लांस नायक अल्बर्ट एक्का, मेजर होशियार सिंह, सैकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल, फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों, मेजर रामास्वामी परमेश्वरन, नायब सूबेदार बाना सिंह, कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार मेजर (तत्कालीन राइफलमैन) संजय कुमार और सूबेदार मेजर सेवानिवृत्त (माननीय कप्तान) ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव के नाम हैं।

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