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गुरु नानक ने यहां गुजारे थे 18 साल, पंजाब सीएम ने सुषमा स्वराज को पत्र लिखकर की गलियारा खोलने की मांग

kartarpur sahib

पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने विदेशमंत्री सुषमा स्वराज को एक पत्र लिख उनसे पाकिस्तान सरकार के समक्ष ‘डेराबाबा नानक’ से ‘करतारपुर साहिब’ तक एक गलियारा खोलने का मुद्दा उठाने की अपील की है।

आधिकारिक बयान में शुक्रवार को कहा गया कि मुख्यमंत्री ने स्वराज को लिखे पत्र में कहा कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिला स्थित करतारपुर साहिब सिखों के लिए बेहद पवित्र स्थल है क्योंकि गुरु नानक ने अपने जीवन का अधिकतर समय वहां बिताया है। यह गुरुद्वारा गुरदासपुर जिले के डेराबाबा नानक से चार किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बार-बार केंद्र से अंतरराष्ट्रीय सीमा से करतारपुर साहिब तक एक गलियारा खोलने का मुद्दा पड़ोसी देश के समक्ष उठाने की अपील की है। 

नवंबर में गुरु नानक की 550वीं जयंती का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने स्वराज को बताया कि 27 अगस्त को पंजाब विधानसभा में गलियारे के निर्बाध उद्घाटन की मांग के लिए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया था। अमरिंदर ने अगस्त में भी सुषमा से मुद्दा उठाने की अपील की थी।

करतारपुर साहिब की अहमियत
करतारपुर गलियारा सिखों के लिए सबसे पवित्र जगह है। करतारपुर साहिब सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देवजी का निवास स्थान था। जहां पर आज गुरुद्वारा है वहीं पर 22 सितंबर 1539 को गुरुनानक देवजी ने आखिरी सांस ली थी। गुरुनानक देव ने इस जगह पर अपनी जिंदगी के 18 वर्ष बिताए थे। बाद में उनकी याद में यहां पर एक गुरुद्वारा भी बनाया गया। करतारपुर साहिब, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में है। यह जगह लाहौर से 120 किलोमीटर दूर है। 

 

पटियाला के महाराजा ने दी रकम
गुरुद्वारे का वर्तमान भवन करीब 1,35,600 रुपये की लागत से तैयार हुई थी। इस रकम को पटियाला के महाराज सरदार भूपिंदर सिंह की ओर से दान में दिया गया था। बाद में साल 1995 में पाकिस्तान की सरकार ने इसकी मरम्मत कराई थी और साल 2004 में यह काम पूरा हो सका। हालांकि इसके करीब स्थित रावी नदी इसकी देखभाल में कई मुश्किलें भी पैदा करती है। साल 2000 में पाकिस्तान ने भारत से आने वाले सिख श्रद्धालुओं को सीमा पर एक पुल बनाकर वीजा मुक्त आवागमन देने का फैसला किया था। साल 2017 में भारत की संसदीय समिति ने कहा कि आपसी संबंध इतने बिगड़ चुके हैं कि किसी भी तरह का गलियारा संभव नहीं है।

सिर्फ तीन किलोमीटर की दूरी
यह गुरुद्वारा रावी नदी के करीब स्थित है और डेरा साहिब रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी चार किलोमीटर है। यह गुरुद्वारा भारत-पाकिस्तान सीमा से सिर्फ तीन किलोमीटर दूर है। गुरुद्वारा भारत की तरफ से साफ नजर आता है। पाकिस्तानी अधिकारी इस बात का ध्यान रखते हैं कि इस धर्मस्थल के आसपास घास न जमा हो पाए और वह समय-समय पर इसकी कटाई-छटाई करते रहते हैं ताकि इसे देखा जा सके। भारत की तरफ बसे श्रद्धालु सीमा पर खड़े होकर ही इसका दर्शन करते हैं। 

गलियारे पर पाकिस्तान
इसी साल 7 सितंबर को पाकिस्तान गलियारा को भारत में रहने वाले सिखों के लिए खोलने को राजी हो गया। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने कांग्रेस सांसद और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू के अनुरोध को मान लिया था। लेकिन बाद में कुछ विवाद होने पर यह मामला अटक गया।

सिद्धू के दौरे पर विवाद हुआ था
भारतीय पूर्व क्रिकेटर और पंजाब में कांग्रेस सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू जब पाकिस्तान गए थे तो उनके दौरे को लेकर काफी विवाद हुआ था। यहां पर सिद्धू पाक आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा से गले मिले थे। उनके गर्मजोशी से गले मिलने को लेकर काफी आलोचना हुई। लेकिन कहा जा रहा है कि सिद्धू के प्रयासों का ही नतीजा है जो पाक गलियारा को खोलने पर राजी हुआ है। सिद्धू ने जनरल बाजवा से गले मिलने पर जब मीडिया को जानकारी दी तो उन्होंने कहा था, ‘पाकिस्तान, भारतीयों के लिए करतारपुर साहिब के दरवाजे खोलने का फैसला ले सकता है और इसलिए ही मैंने उन्हें गले लगाया था।’

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  • Web Title:panjab CM writes sushma swaraj to open derababa nanak to kartarpur sahib Corridor