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15 अप्रैल, 2021|7:54|IST

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लद्दाख के बाद सिक्किम में भी नरम हुए चीन के तेवर, नाकु ला में कम की पेट्रोलिंग

pangong tso disengagement accord reduces military friction at naku la

पैंगोंग त्सो पर भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के संयुक्त प्रयास से सामान्य हो रही स्थिति के प्रभाव ने जाहिर तौर पर नाकु ला पर भी तनाव को कम किया है। यहां मई 2020 के बाद से तनाव की स्थिति बनी हुई थी। कंचनजंगा चोटी के दक्षिण-पश्चिम में स्थित उत्तर सिक्किम में 14,000 फुट से अधिक ऊंचे दर्रे पर 9 मई, 2020 को दोनों सेनाओं के बीच जमकर गोलीबारी हुई और 20 जनवरी, 2021 तक दोनों पक्षों के सैनिकों को चोटें भी आईं।

नरेन्द्र मोदी सरकार नकु ला को लेकर फिलहाल कुछ भी बोलने से इनकार कर रही है। लेकिन, सेना के शीर्ष सैन्य कमांडरों और राजनयिकों से बात करने के बाद हिंदुस्तान टाइम्स यह पता लगा पाने में सक्षम हुआ है कि पैंगोंग त्सो विघटन की तरह, नकु ला पर तनावों को कम करने के लिए बीजिंग में उच्चतम स्तर पर भरोसा और संबंधों को सामान्य बनाने के लिए नए सिरे से प्रयास किया गए हैं। यहां भी पेट्रोलिंग कम कर दी गई है। आपको बता दें कि पीएलए के मामले में निर्णय लेने का अधिकार राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व वाले केंद्रीय सैन्य आयोग के पास है, जो कि चीन के रक्षा बलों के कमांडर-इन-चीफ भी हैं।

एक पूर्व आर्मी चीफ का कहना है, "जिस गति से पीएलए ने पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर फिंगर 8 से आगे और श्रीजाप मैदानों की ओर अपने सैनिकों को वापस कर लिया है, साथ ही दक्षिणी किनारे से 220 के करीब चीनी टैंकों की वापसी से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि चीन में ये निर्देश उच्चतम स्तर से आए हैं।” इससे यह समझा जाता है कि उत्तरी किनारे में चीन की वापसी कमोबेश पूरा हो गया है और दक्षिणी किनारों में झील से कैलाश रेंज की ओर जाने की कवायद जारी है।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, भारतीय सेना के कमांडरों ने नाकू ला में जारी घर्षण का हवाला देते हुए अपने पीएलए समकक्षों के साथ गंभीर अविश्वास का सवाल उठाया था। इसके बाद 10 फरवरी को पैंगोंग त्सो डिसइंगेजमेंट का समझौता हुआ था। यह पता चला है कि सिर्फ यह साबित करने के लिए कि पीएलए भारतीय सेना के साथ वास्तविक असहमति के लिए प्रतिबद्ध था, एक बटालियन कमांडर ने उसी दिन नकु ला में अपने भारतीय समकक्ष के साथ बैठक की, जिसमें चीनी पक्ष से और कोई बदलाव नहीं करने का आश्वासन दिया।

पिछले छह वर्षों में, पीएलए के गश्ती दल ने नकु ला क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की भारतीय धारणा के विपरीत रिज के नीचे आने का प्रयास किया है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देश की सेनाओं का आमना-सामना हुआ है। हालांकि चीनी बेस रिज लाइन से काफी पीछे है, लेकिन अतीत में पीएलए ने नकु ला को पार करने और स्थानीय भारतीय चरवाहों द्वारा निर्मित दीवार तक पहुंचने का प्रयास किया है।

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  • Web Title:Pangong Tso disengagement accord reduces military friction at Naku La