जयगीर पहाड़ पर हाथियों का डेरा, इंसानों के जाने के बाद आबाद हुआ जंगल कभी नक्सलियों का गढ़ रहा इलाका, अब वन्यजीवों के लिए बना सुरक्षित आशियाना मनीष उपाध्याय
पलामू टाइगर रिजर्व के जयगीर पहाड़ पर अब जंगली हाथियों का नया ठिकाना बनता जा रहा है। ग्रामीणों के विस्थापन और मानव गतिविधियों के कम होने से हाथियों के साथ अन्य वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है। घने जंगल और जलस्रोतों के कारण ये हाथी इस क्षेत्र को अपने बसेरे के तौर पर पसंद कर रहे हैं।

लातेहार संवाददाता । पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के गारू प्रखंड स्थित जयगीर पहाड़ अब जंगली हाथियों का नया और सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। ग्रामीणों के विस्थापन के बाद मानव गतिविधियां लगभग समाप्त हो गई हैं, जिससे यह इलाका तेजी से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित हो रहा है। करीब तीन हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित जयगीर पहाड़ पर इन दिनों हाथियों का झुंड नियमित रूप से देखा जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शांत वातावरण, घने जंगल, बांस की प्रचुरता और सालभर उपलब्ध रहने वाले जलस्रोतों के कारण हाथियों ने इस क्षेत्र को अपना पसंदीदा बसेरा बना लिया है। पहले गांव बसने और खेती-बाड़ी होने से जंगली जानवर लंबे समय तक यहां नहीं रुकते थे, लेकिन अब मानव हस्तक्षेप कम होने से हाथियों के साथ अन्य वन्यजीवों की संख्या भी बढ़ी है। भोजन और पानी की पर्याप्त उपलब्धता के कारण हाथी आसपास की आबादी वाले क्षेत्रों की ओर भी कम जा रहे हैं。
नक्सलियों के गढ़ से वन्यजीवों के सुरक्षित आवास तक
एक समय जयगीर पहाड़ और बूढ़ा पहाड़ नक्सलियों के सबसे सुरक्षित ठिकानों में गिने जाते थे। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई बार मुठभेड़ हुई। हालांकि समय के साथ नक्सली गतिविधियां समाप्त हो गईं और ग्रामीणों के विस्थापन के बाद अब यह क्षेत्र वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में उभर रहा है।
भालू और जंगली सूअरों की संख्या भी बढ़ी
वन विभाग के अनुसार इस इलाके में भालू और जंगली सूअरों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। भालू अपेक्षाकृत आक्रामक माने जाते हैं और पूर्व में आसपास के ग्रामीणों पर हमले की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। वहीं जंगली सूअरों की सक्रियता भी बढ़ी है।
क्या कहते हैं डीएफओ
पीटीआर के डीएफओ कुमार आशीष ने बताया कि जयगीर पहाड़ वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि घने जंगल, बांस, पर्याप्त जलस्रोत और मानव गतिविधियों में कमी के कारण हाथियों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। वन विभाग क्षेत्र की नियमित निगरानी कर रहा है ताकि वन्यजीवों के संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो।
फोटो- 1- रविवार को जयगीर पहाड़ पर हाथियों का लगा जमावाड़ा


