डिजिटल साक्ष्यों से खुलेंगी नई कड़ियां, आतंकी शहरोज के संपर्कों की जांच तेज
बलरामपुर में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कथित जासूसी के आरोप में गिरफ्तार शहरोज अहमद से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों ने स्थानीय संपर्कों और संभावित नेटवर्क की पड़ताल तेज कर दी है। डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर शहरोज के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की जा रही है।

बलरामपुर संवाददाता। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कथित जासूसी के आरोप में गिरफ्तार शहरोज अहमद से पुलिस रिमांड के दौरान हुई पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों ने अब स्थानीय संपर्कों और संभावित नेटवर्क की पड़ताल तेज कर दी है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में मिले इनपुट, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) की टीम एक बार फिर बलरामपुर पहुंच सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक शहरोज के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, कॉल डिटेल और चैट रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि वह किन लोगों के संपर्क में था और उसकी गतिविधियों में किसी स्थानीय व्यक्ति की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही या नहीं। जांच का दायरा अब केवल शहरोज तक सीमित न रहकर उससे जुड़े संभावित नेटवर्क तक बढ़ा दिया गया है। बताया जा रहा है कि बलरामपुर के अलावा नेपाल, मुंबई और राजस्थान से जुड़े संपर्कों का भी सत्यापन कराया जा रहा है। मोबाइल से मिले नंबरों, लोकेशन हिस्ट्री और डिजिटल अकाउंट का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। यदि जांच में जिले से जुड़े नए तथ्य सामने आते हैं तो एटीएस संबंधित लोगों से पूछताछ और कुछ स्थानों का दोबारा सत्यापन कर सकती है। वहीं जांच एजेंसियां किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर तथ्य का साक्ष्य आधारित मिलान कर रही हैं。
डिजिटल साक्ष्य बने जांच की सबसे मजबूत कड़ी
पाकिस्तानी एजेंट शहरोज अहमद से जुड़े डिजिटल साक्ष्य इस पूरे मामले की जांच में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ई-मेल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और चैट हिस्ट्री की विशेषज्ञों द्वारा फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। तकनीकी टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि किन नंबरों और ऑनलाइन अकाउंट से नियमित संपर्क हुआ और उन बातचीत का उद्देश्य क्या था। लोकेशन डेटा और इंटरनेट गतिविधियों का भी मिलान किया जा रहा है ताकि उसके आने-जाने और संपर्कों की पुष्टि हो सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी। इसी कारण हर इलेक्ट्रॉनिक डेटा का वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण कराया जा रहा है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
स्थानीय संपर्कों और नेपाल कनेक्शन पर भी फोकस
जांच एजेंसियां अब शहरोज के स्थानीय संपर्कों के साथ-साथ नेपाल से जुड़े संभावित कनेक्शन की भी गहन पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों की मानें पूछताछ में सामने आए कुछ स्थानों, व्यक्तियों और संपर्कों का स्वतंत्र सत्यापन कराया जा रहा है। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उससे पूछताछ की जा सकती है। जांच का उद्देश्य केवल आरोप तय करना नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक पुष्टि करना है। इसके लिए मानव स्रोतों से मिली सूचनाओं का डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह साक्ष्य आधारित होगी और किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


