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अब CM नहीं... तो क्या करेंगे लाडली बहनों के मामा? सियासत में शिवराज के लिए ये हैं विकल्प

मोहन यादव के नाम को सीएम पद के लिए आगे किए जाने के बाद से ही सलाव उठने लगे हैं कि शिवराज सिंह चौहान अब सीएम नहीं होंगे तो क्या करेंगे? क्या वह दिल्ली की राजनीति में दाखिल होंगे? 

अब CM नहीं... तो क्या करेंगे लाडली बहनों के मामा? सियासत में शिवराज के लिए ये हैं विकल्प
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीMon, 11 Dec 2023 09:34 PM
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आठ दिन की लंबी चर्चा के बाद आखिर यह तय हो गया है कि मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बठेगा। मोहन यादव के नाम के ऐलान के बाद मध्य प्रदेश में 18 सालों से चले आ रहे शिव'राज' का अंत हो गया। विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा की जीत के बाद अब लाडली बहनों के मामा शिवराज सिंह चौहान फिर से मध्य प्रदेश के सीएम की कुर्सी पर नहीं दिखेंगे। इस दौरान कयासों का बाजार गर्म है कि यदि शिवराज सिंह चौहान सीएम नहीं होंगे तो क्या करेंगे? क्या वह दिल्ली की राजनीति में दाखिल होंगे या फिर पार्टी की तरफ से उन्हें कोई नई जिम्मेदारी दी जाएगी। 

15 महीनों की कांग्रेस की सरकार को छोड़ दें तो शिवराज 18 सालों से मध्य प्रदेश के सीएम के पद पर काबिज रहे। मगर अब शिवराज के सियासी विकल्पों को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि अब उनका रुख किस ओर होगा। शिवराज ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह दिल्ली नहीं जाएंगे और मध्य प्रदेश में ही रह कर लोगों की सेवा करेंगे। मगर आलाकमान द्वारा मोहन यादव को सीएम बनाए जाने के निर्णय के बाद क्या अब शिवराज के रोल को लेकर भी कोई आदेश होगा? 

पार्टी में मिलेगी कोई जिम्मेदारी?
क्या शिवराज सिंह चौहान को पार्टी में किसी तरह की कोई जिम्मेदारी मिलेगी? ऐसा देखा गया है कि साल 2018 में जब मध्य प्रदेश में भाजपा की हार हुई थी तब पार्टी ने उन्हें उपाध्यक्ष का पद दिया था। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान सदस्यता अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी के तौर पर काम कर रहे थे। हालांकि, शिवराज ने दबे मन से यह कार्य किया मगर उनके लिए पार्टी का यही फैसला था। 

'मिशन 29' के लिए तैयार शिवराज
आम तौर पर मुख्यमंत्रियों को उनके पद छोड़ने के बाद उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल नियुक्त कर दिया जाता है। यह किसी नेता के सियासी करियर को विराम देने की अवस्था होती है, मगर इसके लिए शिवराज शायद ही तैयार हों। लोकसभा चुनाव 2024 के लिए शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव के बाद से ही कमर कस चुके हैं। वह जनता के सामने जाते हैं और सीधे-सीधे तौर पर कहते हैं कि भले वह मुख्यमंत्री न रहें लेकिन मध्य प्रदेश की जनता को 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट देकर पीएम नरेंद्र मोदी को एक बार फिर से देश का प्रधानमंत्री बनाना है। वह 'मिशन 29' के लिए पार्टी के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह मध्य प्रदेश नहीं छोड़ रहे लेकिन उनका निश्चय है कि वह मध्य प्रदेश में 29 लोकसभा सीटों का गिफ्ट पीएम मोदी को करना चाहते हैं। 

क्या दिल्ली होगा अगला पड़ाव?
शिवराज सिंह चौहान के लिए अन्य विकल्प के तौर पर दिल्ली की सियासत बच जाती है। क्या उन्हें सरकार में किसी तरह का कोई पद मिल सकता है? मगर ऐसा होने के निकट भविष्य में कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं, क्योंकि पार्टी का अब पूरा का पूरा ध्यान अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव पर है और इस चुनाव में पार्टी उन्हें चुनाव अभियान के लिए सबसे आगे के सेनापतियों के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है और सियासी बिसात पर अन्य पार्टियों को शिकस्त देने की रणनीति बना सकती है।

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