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जिस EVM को लेकर विपक्ष कर रहा हंगामा, जानें उसे लेकर क्या है चुनाव आयोग के दावे

लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले विपक्षी दलों ने ईवीएम पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। वहीं कुछ वीडियों सोशल मीडिया पर वायरल हैं जिसमें दावे किए जा रहे हैं कि ईवीएम का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसमें ज्यादातर वीडियो यूपी और बिहार के हैं। हालांकि इस मामले में चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है यह सारे दावे झूठे हैं। आयोग का कहना है कि देश के सभी स्ट्रांग रूम में ईवीएम पूरी तरह से सुरक्षित हैं और उन्हें किसी तरह का कोई खतरा नहीं है। सोशल मीडिया पर कल से वायरल हो रही खबरों और वीडियो का संज्ञान लेते हुए आयोग ने मंगलवार को अपना स्पष्टीकरण जारी करते हुए उन खबरों का खंडन किया और कहा कि सभी ईवीएम नियमानुसार सील बंद कर स्ट्रांग रूम में बंद कर दी गयी हैं और उनके बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किये गये हैं।

यूपी में 4 जगह EVM के दुरुपयोग के आरोपों पर चुनाव आयोग ने दिया ये जवाब

जानें EVM को लेकर क्या है चुनाव आयोग के दावे

1- यूपी के निवार्चन आयोग ने कहा है कि स्ट्रांग रूम में रखी ईवीएम मशीनें त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे में होती हैं और वह बिल्कुल महफूज हैं। 

2- आयोग ने कहा है कि ईवीएम को सीलबंद करने की पूरी कार्रवाई को सीसीटीवी कैमरों में दर्ज किया गया है, इसलिए ये आरोप बेबुनियाद, गलत और झूठे हैं। 

3- पर्यवेक्षकों और उम्मीदवारों के सामने ही ईवीएम और वीवीपैट सीलबंद किये जाते हैं। हर स्ट्रांग रूम के सामने केन्द्रीय सुरक्षा बल के सुरक्षा कर्मी मौजूद रहते हैं। वहां राजनीतिक दलों के एजेंट रात-दिन रहते हैं।

4- मतदान शुरू होने से पहले ईवीएम तथा वीवीपैट के टैग सील आदि की जांच की जाती है। आयोग ने यह भी कहा है कि अगर किसी ईवीएम में हेराफेरी की कोई शिकायत सामने आती है तो आयोग उसकी जांच करता है। 

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इतना ही नहीं ईवीएम भी बहुत सुरक्षित होती है तो आइए जानते हैं भारतीय ईवीएम कैसे काम करती है और इस पर मतदान कितना सुरक्षित है-

दो हिस्सों में बंटी
5. बैलटिंग यूनिट
यह वोटिंग कंपार्टमेंट में रखी होती है। इसमें संबंधित सीट से चुनाव मैदान में उतरे सभी प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिह्न दिए होते हैं। मतदाता जिस प्रत्याशी को वोट देना चाहता है, उसे उसके नाम के सामने मौजूद नीला बटन दबाना पड़ता है।

6. कंट्रोल यूनिट
डिसप्ले, बैटरी, रिजल्ट और बैलट सेक्शन से लैस कंट्रोल यूनिट मतदान अधिकारी के पास रखी होती है। अधिकारी को हर मतदाता के मतदान करने के बाद बैलट बटन को दोबारा सक्रिय करना होता है, ताकि अगला वोटर अपना वोट डाल सके। 5 मीटर के तार से आपस में जुड़े होते हैं दोनों यूनिट

7. वीवीपैट
वोटर वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट वास्तव में प्रिंटर की तरह होती है जो वोटर को उसके डाले गए वोट के बारे में विस्तृत जानकारी देती है।  

8- इसलिए मुश्किल हैकिंग
भारतीय ईवीएम स्वतंत्र रूप से काम करती है, जबकि ज्यादातर देशों में इंटरनेट पर आश्रित वोटिंग मशीनें इस्तेमाल की जाती हैं, जिनके हैक होने का खतरा रहता है। निर्माण के समय ईवीएम में प्रयुक्त माइक्रोचिप को सीलबंद कर दिया जाता है, ताकि उसकी प्रोग्रामिंग में बदला से नतीजों को प्रभावित करना असंभव हो  खोलने की कोशिश करने पर भारतीय ईवीएम खुद बखुद निष्क्रीय हो जाती है, दोबारा शुरू करने पर हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर से हुई छेड़खानी की जानकारी देने में सक्षम।
 

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