opposition demand become strong for removal of evm in elections after up result - यूपी के नतीजों के बाद ईवीएम का विरोध हुआ बुलंद DA Image
13 नबम्बर, 2019|8:35|IST

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यूपी के नतीजों के बाद ईवीएम का विरोध हुआ बुलंद

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ईवीएम में होने वाली गड़बड़ियों को पहले कभी-कभार ही कोई आवाज उठती थी। लेकिन पिछले साल हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा की शानदार जीत के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था। सपा समेत कई दलों ने इसका समर्थन किया था। पिछले एक साल में इस मांग का समर्थन करने वाले दलों की संख्या बढ़ती गई है।

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सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस चुनाव आयोग से आगामी चुनाव ईवीएम के बजाए बैलेट पेपर से कराने का आग्रह कर चुकी है। पार्टी के मार्च में हुई महाधिवेशन में पारित राजनीतिक प्रस्ताव में कहा गया है कि ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया की विश्वनीयता का कायम रखने के लिए बैलेट पेपर की व्यवस्था को फिर से लागू करना चाहिए। सपा भी ईवीएम के बजाए बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर चुकी है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव कह चुके हैं कि अगला चुनाव बैलेट पेपर से होना चाहिए। उन्होंने हाल में ही ‘बैलेट सत्याग्रह' करने का भी ऐलान किया है। लोकतंत्र के भविष्य के लिए ईवीएम को हटाने की मांग को लेकर सभी से समर्थन की अपील भी की थी।

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दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने बाकायदा विधानसभा में डेमा टेस्ट के जरिए यह दावा किया था कि ईवीएम मशीनों को आसानी से टैंपर किया जा सकता है। हालांकि, इस पर सवाल उठते रहे हैं कि ईवीएम मशीन थी या उसके जैसी कोई और मशीन। ईवीएम हटाए जाने की मांग करने वाले दलों में राजद, आरएलडी, आईयूएमएल आदि भी शामिल हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने जब ईवीएम हैक करने को चुनौती दी थी तो उसमें कोई भी राजनीति दल नहीं पहुंचा।

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