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हैदराबाद के विलय के लिए चला ऑपरेशन पोलो 13 सितंबर 1948 को सरदार पटेल

हैदराबाद के विलय के लिए चला ऑपरेशन पोलो 13 सितंबर 1948 को सरदार पटेल ने हैदराबाद रियासत को भारत में शामिल करने के लिए सैन्य अभियान को मंजूरी दी थी। इसे ऑपरेशन पोलो नाम दिया गया। 5 दिन तक चले इस अभियान के बाद निजाम मीर उस्मान अली खान का शासन खत्म हुआ और हैदराबाद भारत का हिस्सा बना।
15 अगस्त 1947 की स्थिति
- 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान स्वतंत्र रहना चाहते थे।
भारत सरकार की कोशिशें
- भारत सरकार चाहती थी कि भौगोलिक एकता के लिए हैदराबाद भारतीय संघ में शामिल हो, लेकिन बात नहीं बनी।
समझौते और तनाव
- नवंबर 1947 में एक समझौता हुआ जिसके तहत तत्काल स्थिति को बनाए रखने पर सहमति बनी।
- इस दौरान रजाकारों का प्रभाव बढ़ गया। कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भारत सरकार-हैदराबाद में तनाव बढ़ा।
ऑपरेशन पोलो की शुरुआत
- तत्कालीन उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने 13 सितंबर 1948 को ऑपरेशन पोलो शुरू करने की अनुमति दी।
- अभियान की कमान मेजर जनरल जयंत नाथ चौधरी ने संभाली। सेना ने अलग-अलग दिशाओं से हैदराबाद में घुस गई।
आत्मसमर्पण और विलय
- लगभग पांच दिनों के अभियान के बाद 17 सितंबर 1948 को निजाम ने आत्मसमर्पण किया और हैदराबाद का भारत में विलय हो गया।
- निजाम को राजप्रमुख बनाया गया और मेजर जनरल चौधरी हैदराबाद के सैन्य गवर्नर बनाए गए।


