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दिल्ली से लेकर पंजाब तक किसान संगठनों ने कृषि कानूनों की कॉपियां जलाकर मनाई लोहड़ी

दिल्ली बॉर्डर से लेकर पंजाब के विभिन्न हिस्सों में किसान संगठनों ने लोहड़ी के मौके पर तीन कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध प्रकट किया। सुप्रीम कोर्ट के दखल व 15 जनवरी को केंद्र सरकार के साथ...

दिल्ली से लेकर पंजाब तक किसान संगठनों ने कृषि कानूनों की कॉपियां जलाकर मनाई लोहड़ी
विशेष संवाददाता,नई दिल्लीWed, 13 Jan 2021 07:59 PM
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दिल्ली बॉर्डर से लेकर पंजाब के विभिन्न हिस्सों में किसान संगठनों ने लोहड़ी के मौके पर तीन कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध प्रकट किया। सुप्रीम कोर्ट के दखल व 15 जनवरी को केंद्र सरकार के साथ प्रस्तावित बैठक के बीच संयुक्त किसान मोर्चा के पूर्व घोषित आंदोलन की रूपरेखा में कोई बदलाव नहीं है। इसके अलावा किसान संगठन आगामी 26 जनवरी को ट्रैक्टर किसान रैली के लिए जनसमर्थन जुटाने के प्रयास में लगे हुए हैं।

विदित हो कि बसंत की शुरुआत में उत्तर भारत के अधिकांश स्थानों पर लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन लोग लकड़ियां जमाकर जलाते हैं और सुख व समृद्धि की कामना करते हैं। त्योहार के इस मौके पर दिल्ली के सिंघु बॉर्डर से लेकर पंजाब के अमृतसर, होशियारपुर, संगरूर, कपूरथला आदि स्थानों पर किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के विवादित नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध प्रकट किया। संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान मे 40 से अधिक किसान संगठन दिल्ली के विभिन्न बार्डरों पर 48 दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल, दर्शनपाल, आदि नेताओं ने शाम साढ़े पांच बजे कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर लोहड़ी मनाई। किसानों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और देशभक्ति के गीत गाकर तैयार मनाया। उन्होंने बताया कि सभी प्रदर्शन स्थलों पर कानूनों की प्रतियां जलाकर लोहड़ी मनाई गई। मोर्चा आंदोलन को तेज करने की रणनीति के लिए बैठक करेगा।

किसान संगठनों ने मंगलवार को कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति के समक्ष किसान नेता पेश नहीं होंगे। आरोप लगाया कि सरकार यह सरकार समर्थक समिति है, किसान समिति नहीं कृषि कानून रद्द कराना चाहते हैं। हालांकि तीन कानूनों के अमल पर रोक के सुप्रीम कोर्ट का स्वागत करते हैं। नए कानूनों के विरोध में दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर के बड़ी संख्या में किसान 28 नवंबर से धरना दे रहे हैं।

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