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2 जून, 2020|1:50|IST

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पाकिस्तान के दबाव में अब्दुल्ला और मुफ्ती ने किया पंचायत चुनाव का बहिष्कार: सत्यपाल मलिक

satyapal malik

गोवा से पहले जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक ने शनिवार को कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव शांतिपूर्वक कराने में सफलता मिली, जबकि पाकिस्तान के दबाव में केंद्र शासित प्रदेश के बड़े नेताओं ने सहयोग नहीं किया। सत्यपाल मलिक अक्टूबर 2019 तक जम्मू-कश्मीर के गवर्नर रहे और इसके बाद उन्होंने गोवा में यह पद संभाला।

सत्यपाल मलिक ने कहा, ''प्रधानमंत्री ने कहा था कि हम जम्मू और कश्मीर में पंचायत चुनाव कराएंगे। मैंने प्रोटोकॉल तोड़ा और उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के घर गया। उन्होंने पाकिस्तान के दबाव में हिस्सा (पंचायत चुनाव में) लेने से इनकार कर दिया। आतंकवादियों ने धमकी भी दी थी, लेकिन चुनाव सफलतापूर्वक हुए। हुर्रियत ने बहिष्कार की घोषणा की, लेकिन कुछ जगहों को छोड़कर रिकॉर्ड वोटिंग के साथ चुनाव संपन्न हुए और चुनाव में कहीं भी हिंसा नहीं हुई।''

उन्होंने यह भी कहा कि तब प्रशासन इसलिए ऐसा कर पाया क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश के लोगों ने सिस्टम को स्वीकार किया था, क्योंक उन्हें इससे फायदा मिल रहा था। मलिक ने कहा, ''हमने एक जांच कराई तो पता चला कि राज्य में 50 हजार सरकारी पद खाली हैं। हमने घोषणा की कि 50 हजार कश्मीरी युवाओं को नौकरी देंगे। मुझे उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इन्हें लोगों को देगी।''

जम्मू-कश्मीर में अपने कार्यकाल को लेकर उन्होंने कहा, ''जब मैं जम्मू-कश्मीर का गवर्नर था तो मैंने राजभवन सबके लिए खोल दिया। मेरे सभी सलाहकारों को सप्ताह में एक दिन लोगों की समस्याएं सुनने का काम दिया गया था। मेरे दफ्तर को 95 हजार शिकायतें मिली थीं। गोवा आने से पहले मैंने 93 हजार का समाधान किया था। इसलिए लोगों ने सहज महसूस किया। उन्होंने लगा कि यह उनकी सरकार है। इसलिए लोगों में नाराजगी कम थी।'' मलिक ने कहा, ''हमने एक साल में 51 डिग्री कॉलेज, 8 मेडिकल कॉलेज, 282 जूनियर स्कूलों को हायर सेकेंड्री में बदला गया।''

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  • Web Title:Omar Abdullah and Mehbooba Mufti boycotted Panchayat polls under Pakistan pressure says Satya Pal Malik