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ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार, नवीन पटनायक राज 24 साल बाद खत्म; खुद भी हारे

भाजपा ओडिशा में सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। भाजपा की जीत के साथ ही पटनायक का देश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनने का सपना टूट गया है।

ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार, नवीन पटनायक राज 24 साल बाद खत्म; खुद भी हारे
naveen patnaik
Himanshu Tiwariलाइव हिन्दुस्तान,भुवनेश्वरTue, 04 Jun 2024 09:14 PM
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ओडिशा में भाजपा बड़ी जीत की तरफ आगे बढ़ रही है। भाजपा ने बड़ी बढ़त हासिल की है और 60 से अधिक सीटों को अपने नाम कर चुकी है। भाजपा राज्य में सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। भाजपा की जीत के साथ ही पटनायक का देश के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री बनने का सपना टूट गया है। बता दें यह रिकॉर्ड सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के पास है।

नवीन पटनायक ने राजनीति में कदम रखते ही अपना पहला चुनाव अस्का निर्वाचन क्षेत्र से जीता और 1998 और 1999 में दो बार उस निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बने। उन्होंने 2024 के ओडिशा विधानसभा चुनाव सहित हिन्जिली से छह बार जीत हासिल की है। बीजद ने 40 से अधिक सीटें जीतीं, लेकिन उसके विपक्ष में बैठने की संभावना है, क्योंकि भाजपा ने राज्य में जीत हासिल कर इतिहास रच दिया है।

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की कांटाबांजी सीट से हार हुई है। बीजू जनता दल (बीजद) सुप्रीमो पटनायक इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लक्ष्मण बाग से चुनाव हार गए हैं। यह पहली बार है जब नवीन पटनायक को चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। 1998 से अब तक उन्होंने हर चुनाव जीता है। हालांकि, उन्होंने हिन्जिली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के शिशिर कुमार मिश्रा को हराकर जीत हासिल की है।

बता दें कि लोकसभा चुनावं के साथ-साथ ओडिशा विधानसभा के भी चुनाव हुए थे। राज्य विधानसभा में कुल 147 सीटें हैं। इसमें भाजपा को 77 सीटों पर जीत मिलती दिख रही हैं। पटनायक की पार्टी बीजद को 52 सीटों पर संतोष करना पड़ सकता है। कांग्रेस 14 सीट जीतती दिख रही है।

बता दें कि ओडिशा में साल 2000 से बीजू जनता दल की सरकार है और नवीन पटनायक तब से लगातार राज्य के मुख्यमंत्री बने हुए थे। उन्होंने 5 मार्च 2000 को पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। शुरुआदी दौर में भाजपा और बीजू जनता दल दोनों दो विधानसभा चुनाव- 2000 और 2004 मिलकर लड़ी थी, तब बीजद ने 68 और भाजपा ने 38 सीटें जीती थीं। साल 2000 में 147 सदस्यीय विधानसभा में 106 सीटें जीतकर दोनों पार्टियों ने पहली बार गठबंधन की सरकार बनाई थी और कांग्रेस को राज्य की सत्ता से बेदखल कर दिया था। 

2004 के चुनाव में भी भाजपा और BJD ने कुल 93 सीटें जीतीं थीं और  दोबारा सत्ता में वापसी की थी लेकिन 2009 के बाद से दोनों की राहें जुदा हो गई थीं। 2009 के असेंबली चुनाव से पहले दोनों की 11 साल की दोस्ती टूट गई थी। इस बार के चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नवीन पटनायक और उनकी पार्टी पर काफी हमलावर थी। भाजपा ने वहां चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगा दिया था। लोकसभा चुनावों में भी बीजद की करारी हार हुई है। राज्य में लोकसभा की 21 सीटों में से 19 पर भाजपा और एक-एक पर बीजद और कांग्रेस ने जीत दर्ज की है।