पोषण पाठशाला बन रहे जिले के आंगनबाडी केंद्र
शहर से गांव तक महिलाओं व बच्चों के पोषण को जनआंदोलन बनाने की तैयारीशहर से गांव तक महिलाओं व बच्चों के पोषण को जनआंदोलन बनाने की तैयारी अभियान में महिल

बांका। निज प्रतिनिधि। जिले में राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत के साथ ही अब हर आंगनबाड़ी केंद्र पोषण की पाठशाला बनने लगा है। फिलवक्त जिले में 2347 आंगनबाडी केंद्र संचालित हैं। जहां राष्ट्रीय पोषण माह में 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक चलने वाले एक माह के अभियान में महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के स्वास्थ्य व पोषण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर गतिविधियों के माध्यम से परिवारों को पौष्टिक आहार, आहार विविधता, पूरक पोषण आहार और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य केवल पोषण संबंधी जानकारी देना नहीं, बल्कि इसे शहर से लेकर गांव तक जनआंदोलन का रूप देना है। इसके लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं के साथ स्वास्थ्यकर्मी, जीविका व शिक्षकों की भागीदारी सुनश्चिति की जा रही है। बच्चों के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है。
पोषण माह के दौरान जागरूकता अभियान
पोषण माह के दौरान चलाए जा रहे जागरूकता अभियान में लोगों को बताया जा रहा है कि भोजन में सर्फि पेट भरना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर की जरूरत के अनुसार विभन्नि पोषक तत्वों को शामिल करना जरूरी है। आहार में अनाज के साथ दाल, हरी सब्जियां, मौसमी फल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों की विविधता पर जोर दिया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को संतुलित आहार और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों की जानकारी दी जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर किशोरियों के लिए एनीमिया जांच शिविर भी लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा स्तनपान परामर्श, अन्नप्राशन और गोदभराई जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन गतिविधियों के जरिए माताओं को शिशु के शुरुआती वर्षों में पोषण के महत्व की जानकारी दी जा रही है।
कुपोषण के खिलाफ समुदाय की भागीदारी
आईसीडीएस की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी सरिता कुमारी ने कहा कि पोषण माह के दौरान सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर नियमित रूप से गतिविधियां कराई जा रही हैं। पोषण शपथ, पोषण मेला, किशोरियों की एनीमिया जांच, स्तनपान परामर्श, अन्नप्राशन और गोदभराई जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से आयोजित करने का नर्दिेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी, जब इसमें परिवार और समुदाय की सक्रिय भागीदारी होगी। इसके लिए सभी संबंधित विभागों के समन्वय से अभियान को जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी है।


