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अब गंगाजल को बोतलबंद मिनरल वाटर में बेचना नहीं होगा आसान, सरकार उठा रही है ये कदम

नई दिल्ली, रामनारायण श्रीवास्तवArun
Sun, 20 Jan 2019 10:10 AM
अब गंगाजल को बोतलबंद मिनरल वाटर में बेचना नहीं होगा आसान, सरकार उठा रही है ये कदम

गंगाजल (Gangaajal) को बोतलबंद मिनरल पेयजल (Bottled Mineral Water) के रूप में बेचकर करोड़ों का कारोबार कर रही कंपनियों के लिए जल्द ही सख्त नियम-कानून बनाए जा सकते हैं। जल संसाधन मंत्रालय को इस कारोबार के बारे में कई शिकायतें मिली हैं, जिन पर वह विचार कर रहा है। हालांकि जल राज्य का विषय है और इन कंपनियों पर अन्य मंत्रालयों का नियंत्रण है इसलिए जल संसाधन मंत्रालय सीधे कुछ नहीं कर सकता।

देश में बीते दो दशक में बोतलबंद पेयजल उद्योग तेजी से फैला है। इसके लिए कंपनियां प्राय: भूजल का इस्तेमाल कर रही हैं, जिसके लिए कई तरह के दिशा-निर्देश बने हुए हैं। लेकिन नदियों से, खासकर गंगा नदी से पानी सीधे लेकर उसको व्यावसायिक रूप से बेचने को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। 

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इस स्थिति में कंपनियां अगर सरकार को कुछ कर देती भी हैं तो वह उनकी कमाई के मुकाबले नगण्य है। गौरतलब है कि सरकार को इन कंपनियों से साल 2014-15 में महज 31 लाख रुपये, 2015-16 में 26 लाख रुपये और 2016-17 में 30 लाख रुपये राजस्व ही मिले थे।

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नमामि गंगे में कोई योगदान नहीं : नमामि गंगे अभियान के बाद गंगा नदी को लेकर जागरूकता बढ़ी। ऐसे में गंगा जल को बोतलबंद पेयजल के रूप में बेचकर करोड़ों का कारोबार कर रही कंपनियों पर भी ध्यान गया। लेकिन ये कंपनियां साफ-सफाई और नमामि गंगे अभियान के लिए एक पैसे का योगदान भी नहीं दे रही हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने कहा, मुझे इस बारे में कई शिकायतें मेल पर मिली हैं। इस पर मंत्रालय विचार कर रहा है कि किस तरह से इसके लिए नियम-कानून बनाए जाएं। इस बारे में सभी संबंधित पक्षों के साथ समन्वय कर नियम-कानून बनाए जा सकते हैं। 

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राज्यों से लेकर कई मंत्रालयों में बंटा है मुद्दा
बीते साल जल संसाधन से जुड़ी संसद की स्थायी समिति के सामने भी यह मुद्दा आया था। समिति ने मंत्रालय से कई सवाल पूछे थे। इस पर मंत्रालय ने कहा था कि जल राज्य का विषय है। इसके अलावा भारतीय मानक ब्यूरो और भारतीय खाद्य सुरक्षा मानक प्राधिकरण बोतलबंद जल उद्योग व संयत्रों के संबंध में प्रमाणित एजेंसी के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे उद्योगों के लिए लाइसेंस जारी करने पर आवश्यक प्रतिबंध भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा लगाया जाना है। इसके अलावा संचालन की सहमति राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रदान की जाती है। .

गंगा की अविरलता को आंदोलन चलेगा
हरिद्वार। नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने कहा कि गंगा के संरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे सभी छोटे-बड़े संगठनों को एक मंच पर आना होगा। गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए देशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने जल्द ही दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रदर्शन कर केंद्र सरकार से गंगा संरक्षण को लेकर जवाब-तलब करने की बात भी कही।.
 

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