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16 फरवरी, 2020|7:52|IST

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यूरोपीय संसद में CAA पर आज नहीं होगी वोटिंग, फ्रेंड्स ऑफ पाकिस्तान पर हावी रहा फ्रेंड्स ऑफ इंडिया

european union parliament   photo   xinhua news agency

यूरोपीय संसद ने भारत के संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ पेश एक प्रस्ताव पर गुरुवार (30 जनवरी) को मतदान नहीं कराने का निर्णय लिया है। यूरोपीय संसद के इस कदम को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्च में ब्रसेल्स में होने वाले द्विपक्षीय सम्मेलन में शिरकत करने की योजना में किसी तरह की बाधा खड़ी नहीं होने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

यूरोपीय संसद ने बुधवार (29 जनवरी) को निर्णय किया कि सीएए पर मतदान दो मार्च से शुरू हो रहे उसके नए सत्र पर कराया जाएगा। सरकारी सूत्र मतदान टालने को कूटनीतिक सफलता बता रहे हैं। उनका कहना है कि बुधवार को भारत के मित्र अपने प्रयासों से पाकिस्तान के मित्र पर हावी रहे।

सूत्रों ने बताया कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मार्च के मध्य में मोदी की ब्रसेल्स की यात्रा का आधार तैयार करने के वास्ते ब्रसेल्स जाने वाले हैं और यूरोपीय सांसद सीएए पर उनसे देश का नजरिया जानने तक मतदान टालने के लिए राजी हो गए हैं। कूटनीतिक सूत्रों ने बताया कि प्रस्ताव पर चर्चा तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी लेकिन इस पर मतदान 30 और 31 मार्च को हो सकता है।

यूरोपीय संसद के छह राजनीतिक दलों के सदस्यों ने भारत के सीएए के खिलाफ एक संयुक्त प्रस्ताव पेश किया और इसे भेदभाव करने वाला करार दिया। सूत्रों ने कहा कि बुधवार (29 जनवरी) को फ्रेंड्स ऑफ पाकिस्तान पर फ्रेंड्स ऑफ इंडिया हावी रहे। एक सूत्र ने कहा, ''ब्रेक्जिट से ठीक पहले भारत के खिलाफ यूरोपीय संसद में प्रस्ताव पारित कराने के निवर्तमान ब्रिटिश एमईपी शफ्फाक मोहम्मद के प्रयास असफल रहे।"

सरकार कहती आ रही है कि सीएए भारत का आंतरिक मामला है और इसे समुचित प्रक्रिया का पालन कर अपनाया गया है। सूत्रों ने कहा कि हमें उम्मीद है कि सीएए पर हमारे नजरिये को यूरोपीय संघ के सांसदों द्वारा निष्पक्ष और खुले मन से समझा जाएगा।

यूरोपीय संसद में पेश प्रस्ताव में क्या कहा गया है
इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र, मानव अधिकार की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) के अनुच्छेद 15 के अलावा 2015 में हस्ताक्षरित किए गए भारत-यूरोपीय संघ सामरिक भागीदारी संयुक्त कार्य योजना और मानव अधिकारों पर यूरोपीय संघ-भारत विषयक संवाद का जिक्र किया गया है। इसमें भारतीय प्राधिकारियों के अपील की गई है कि वे सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ रचनात्मक वार्ता करें और भेदभावपूर्ण सीएए को निरस्त करने की उनकी मांग पर विचार करें। प्रस्ताव में कहा गया है, ''सीएए भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव करेगा। इससे नागरिकता विहीन लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है और यह बड़ी मानव पीड़ा का कारण बन सकता है।"

10 जनवरी को लागू हुआ नागरिकता संशोधन कानून
नागरिकता संशोधन कानून में अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से 31 दिसंबर, 2014 तक देश में आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, ईसाई, जैन और पारसी समुदाय के सदस्यों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद से पारित नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को 12 दिसंबर को अपनी संस्तुति प्रदान की थी। राष्ट्रपति की संस्तुति के साथ ही यह कानून बन गया था और यह 10 जनवरी को जारी अधिसूचना के बाद देश में लागू हो गया है।

नए नागरिकता कानून को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, भारत सरकार का कहना है कि नया कानून किसी की नागरिकता नहीं छीनता है, बल्कि इसे पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और उन्हें नागरिकता देने के लिए लाया गया है।

(इनपुट एजेंसी से भी)

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  • Web Title:no voting in European Union Parliament on Citizenship Amendment Act