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तीन राज्यों में मुख्यमंत्रियों पर अभी तक नहीं बनी सहमति, कल पर्यवेक्षक चुनेगी बीजेपी

BJP अंतिम रूप से नाम चुनने के लिए कल तीनों राज्यों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करेगी। कहा जाता है कि तीन राज्यों में मुख्यमंत्री पद के लिए संभावितों की सूची में मुट्ठी भर से अधिक नाम शामिल हैं।

तीन राज्यों में मुख्यमंत्रियों पर अभी तक नहीं बनी सहमति, कल पर्यवेक्षक चुनेगी बीजेपी
Amit Kumarलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 07 Dec 2023 09:00 PM
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अभी भी तक हाल ही में जीते तीन राज्यों में मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला नहीं ले पाई है। भगवा पार्टी सीएम के लिए अंतिम नामों के चयन पर काम कर रही है। दरअसल भाजपा ने इन चुनावों में तीनों ही राज्यों में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की थी। पार्टी ने इन चुनावों में भाजपा के चुनाव चिह्न कमल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे रखा था।गौरतलब है कि भाजपा ने हाल के विधानसभा चुनावों में जहां मध्य प्रदेश की सत्ता बरकरार रखी थी तो वहीं राजस्थान और छत्तीसगढ़ उसने कांग्रेस से छीन लिया था।

चुनावी नतीजों के बाद भाजपा ने अभी तक तीनों में से किसी राज्य में यह घोषणा नहीं की है कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा। आम तौर पर भाजपा संसदीय बोर्ड में मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगती और फिर विधायक दल की बैठक में नेता के चयन की औपचारिकता पूरी की जाती है। विधायक दल की बैठक से पहले पार्टी की ओर से चुनावी राज्यों में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति होती है।

एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पार्टी अंतिम रूप से नाम चुनने के लिए कल तीनों राज्यों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करेगी। कहा जाता है कि तीन राज्यों में मुख्यमंत्री पद के लिए संभावितों की सूची में मुट्ठी भर से अधिक नाम शामिल हैं। पर्यवेक्षकों द्वारा तीन राज्यों में नवनिर्वाचित विधायकों की बैठकों की निगरानी करने की संभावना है, जहां वे अपने नेताओं का चयन करेंगे। भाजपा के भीतर कई लोग तीन राज्यों में मिले भारी जनादेश को अपनी नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को जिम्मेदार बता रहे हैं। 

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि तीनों राज्यों के लिए पर्यवेक्षकों के नामों की घोषणा शुक्रवार को होने की उम्मीद है। इसके बाद वे नवनिर्वाचित विधायकों की बैठकों के लिए संबंधित राज्यों की यात्रा करेंगे, जहां भविष्य के मुख्यमंत्रियों के नाम घोषित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की पसंद पर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है और पार्टी तीनों मुख्यमंत्रियों को चुनने में सामाजिक, क्षेत्रीय, शासन और संगठनात्मक हितों को ध्यान में रखेगी।

तीन राज्यों के नेता गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं, लेकिन सूत्रों ने इसे ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि इस तरह की बैठकें नियमित होती हैं। उन्होंने कहा, "राज्य के कई नेता हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व से मिल रहे हैं। केवल तीन मुख्यमंत्री हो सकते हैं। किसी को भी इसे ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए।" उन्होंने कहा कि संभावितों में वे सांसद भी शामिल हैं जिन्होंने संसद से इस्तीफा दे दिया है और शिष्टाचार के तौर पर राष्ट्रीय नेताओं से मिल रहे हैं।

दो-तिहाई बहुमत के साथ पार्टी की जीत के बाद, मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान एक मजबूत दावेदार बने हुए हैं। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और नरेंद्र सिंह तोमर को भी संभावितों में देखा जा रहा है।

वहीं छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, राज्य भाजपा अध्यक्ष अरुण कुमार साव, विपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक और पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी को राजनीतिक विश्लेषक दावेदारों में से एक के रूप में देख रहे हैं। रमन सिंह को छोड़कर सभी तीन नेता अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आते हैं। हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने अतीत में अपने मुख्यमंत्री पद के चयन से अक्सर पर्यवेक्षकों को आश्चर्यचकित किया है।

राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को शीर्ष पद के दावेदारों में से एक के रूप में देखा जा रहा है। सोमवार को लगभग 25 भाजपा विधायकों ने उनसे मुलाकात की, जिसे समर्थन और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया। हालांकि विधायकों ने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व उन्हें शीर्ष पद के लिए चुनता है तो वे राजे का समर्थन करेंगे।

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