बीच सफर में साथी बदल नया ट्रेंड ला रहे नीतीश? जानिए अब तक कितनी बार हुआ ऐसा

Aug 10, 2022 12:04 am ISTDeepak Mishra लाइव हिंदुस्तान, नई दिल्ली
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पिछले कुछ समय में भारतीय राजनीति में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। बीच सफर में सियासत का साथी बदल लेना। बिहार में नीतीश कुमार ने एक बार फिर से इसे अंजाम दिया है। इससे पहले कई जगह ऐसा हो चुका है।

बीच सफर में साथी बदल नया ट्रेंड ला रहे नीतीश? जानिए अब तक कितनी बार हुआ ऐसा

पिछले कुछ समय में भारतीय राजनीति में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। बीच सफर में सियासत का साथी बदल लेना। बिहार में नीतीश कुमार ने एक बार फिर से इसे अंजाम दिया है। एनडीए का साथ छोड़कर वह महागठबंधन के पास वापस लौट गए हैं। लगातार गठबंधन बदलने की अपनी इस आदत के चलते नीतीश कुमार को ‘पलटूराम’ का उपनाम भी मिल चुका है। हालांकि बिहार तो इसका तात्कालिक उदाहरण है। हाल-फिलहाल कई अन्य राज्यों में भी ऐस हो चुका है। इसके साथ ही ऐसा लगने लगा है कि केवल चुनाव जीतना ही पांच साल के लिए स्थायी सरकार की गारंटी नहीं है। आइए एक नजर डालते हैं किन-किन राज्यों में बीच सफर में बदले गए हैं गठबंधन के साथी...

बिहार में दोहराया जा रहा इतिहास
पिछले पांच साल में बिहार में ऐसा दूसरी बार हुआ है। खास बात यह है कि दोनों ही बार यहां पर मुख्य भूमिका में नीतीश कुमार ही रहे हैं। साल 2013 में नीतीश ने भाजपा को छोड़कर आरजेडी और कांग्रेस का हाथ थामा था। इस गठबंधन ने साल 2015 में विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद 2017 में नीतीश ने आरजेडी और कांग्रेस का साथ छोड़ दिया और फिर से भाजपा के पास वापस लौट गए। उन्होंने सरकार बनाई और 2020 के विधानसभा चुनाव भी उन्होंने भगवा दल के साथ लड़ा। हालांकि इस चुनाव में उनका जनाधार काफी कम रहा। अब एक बार फिर से उन्होंने भाजपा का साथ छोड़कर सात अन्य दलों के साथ गठबंधन कर लिया है। 

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महाराष्ट्र का हाल
महाराष्ट्र में साल 2019 में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन ने चुनाव जीता था। लेकिन सरकार बनाने के वक्त मुख्यमंत्री के फॉर्मूले को लेकर बात बिगड़ गई। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी गठबंधन बनाया था। हालांकि ढाई साल के बाद ही महाविकास अघाड़ी गठबंधन तब खतरे में आ गई जब शिवसेना में बगावत हो गई। शिवसेना के विधायक और उद्धव सरकार में मंत्री रहे एकनाथ शिंदे ने अपने साथ कई विधायकों को लेकर यह बगावत की थी। इसके बाद भाजपा के साथ मिलकर शिवसेना के बागी गुट ने नई सरकार बना ली। 

कर्नाटक में गई थी जेडीएस-कांग्रेस सरकार
कुछ ऐसा ही हाल कर्नाटक में भी हुआ था। यहां पर जनता दल-एस और कांग्रेस की सरकार थी। मुख्यमंत्री थे एचडी कुमारस्वामी। लेकिन 2019 में उनकी सरकार तब चली गई जब सत्ता पक्ष के 17 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। बाद में इन विधायकों ने भाजपा से हाथ मिला लिया। इसके बाद येदियुरप्पा की राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर वापसी हुई थी। इससे पहले 2018 के विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ा दल होने के बावजूद भाजपा को सत्ता से दूर रहना पड़ा था क्योंकि कांग्रेस और जेडीएस ने हाथ मिला लिया था। 

मध्य प्रदेश में कमलनाथ ने धोया था सत्ता से हाथ
मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने सत्ता हासिल की थी। हालांकि कुछ ही दिनों के बाद उन्हें तब सत्ता से हाथ धोना पड़ा था जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कुछ अन्य विधायकों के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा से हाथ मिला लिया। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक बार फिर से मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार की वापसी हुई थी। बाद में सिंधिया ने अपने समर्थकों के साथ भाजपा ज्वॉइन कर ली थी। फिलहाल सिंधिया केंद्र में मंत्री हैं।

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मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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