लीगोनेला बैक्टीरिया के संक्रमण की प्रभावी चिकित्सा प्रणाली विकसित करेगा एनआईटी
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के रसायन विज्ञान विभाग में लीगोनेला बैक्टीरिया के संक्रमण के अध्ययन के लिए एक शोध परियोजना शुरू होने जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य बैक्टीरिया की संक्रमण क्रियाविधि को समझना है, ताकि भविष्य में प्रभावी चिकित्सा उपाय विकसित किए जा सकें।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर के रसायन विज्ञान विभाग में लीगोनेला बैक्टीरिया के संक्रमण को लेकर एक अहम शोध परियोजना की शुरुआत होने जा रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा वित्तपोषित इस परियोजना का उद्देश्य मानव शरीर में इस बैक्टीरिया के संक्रमण की कार्यप्रणाली को गहराई से समझना है, ताकि भविष्य में इसके इलाज के लिए प्रभावी चिकित्सा उपाय विकसित किए जा सकें। पूरी परियोजना का संचालन डॉ. पूजा कुमारी के मार्गदर्शन में किया जाएगा। शोध का मुख्य केंद्र संक्रमण के दौरान मानव और बैक्टीरियल प्रोटीन के बीच होने वाली आणविक अंतःक्रिया को समझना है। इसके तहत यह विश्लेषण किया जाएगा कि जब लीगोनेला बैक्टीरिया मानव शरीर में प्रवेश करता है, तब मानव कोशिकाओं के भीतर मौजूद ‘ई2 यूबिक्विटिन-संयुग्मी एंजाइम’ और बैक्टीरिया द्वारा छोड़े जाने वाले प्रोटीन के बीच आणविक स्तर पर किस प्रकार की प्रतिक्रिया होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सूक्ष्म प्रतिक्रिया की क्रियाविधि का बारीकी से अध्ययन करने से यह समझने में मदद मिलेगी कि यह बैक्टीरिया किस प्रकार मानव कोशिकाओं की प्राकृतिक प्रणाली पर कब्जा करता है。
शोध के लिए प्रोजेक्ट असिस्टेंट पद पर आवेदन आमंत्रित
शोध परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संस्थान ने प्रोजेक्ट असिस्टेंट के पद के लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे हैं। लाइफ साइंस या संबंधित क्षेत्र में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्रीधारकों के साथ आणविक जीव विज्ञान का पूर्व अनुभव रखने वाले युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। उम्मीदवार अपने सभी दस्तावेजों के साथ निर्धारित अंतिम तिथि 15 सितंबर तक इस शोध का हिस्सा बनने के लिए आवेदन भेज सकते हैं।
दूषित पानी के स्रोतों से फैलता है लीगोनेला बैक्टीरिया
लीगोनेला बैक्टीरिया का संक्रमण मुख्य रूप से दूषित पानी के स्रोतों से फैलता है। जब लोग एयर कंडीशनिंग सिस्टम, गर्म पानी के टब, फव्वारे या कूलिंग टावर से निकलने वाली सूक्ष्म जल बूंदों यानी मिस्ट को सांस के जरिए अंदर लेते हैं, तब यह बैक्टीरिया फेफड़ों में पहुंच सकता है। शरीर में पहुंचने के बाद यह बैक्टीरिया लीजियोनेयर्स बीमारी का कारण बन सकता है, जिससे गंभीर निमोनिया, तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कमजोर प्रतिरक्षा वाले बुजुर्गों और फेफड़ों के मरीजों के लिए यह संक्रमण गंभीर हो सकता है।


