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25 जनवरी, 2020|9:05|IST

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निर्भया गैंगरेप: दोषी मुकेश सिंह ने राष्ट्रपति के पास भेजी दया याचिका

culprits in nirbhaya case

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निर्भया गैंगरेप मामले का दोषी मुकेश सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास दया याचिका दायर की है। मुकेश सिंह उन चार दोषियों में से एक है, जिन्हें 22 जनवरी को सुबह सात बजे फांसी होनी है।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा पाए चार मुजरिमों में से दो की सुधारात्मक खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने दोषी विनय शर्मा और मुकेश कुमार की सुधारात्मक याचिकाओं पर विचार के बाद उन्हें खारिज कर दिया। सुधारात्मक याचिका किसी व्यक्ति को उपलब्ध अंतिम कानूनी विकल्प है। 

पांच न्यायाधीशों की यह सर्वसम्मत राय थी कि इन दोषियों की सुधारात्मक याचिकाओं में कोई दम नहीं है। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मौत की सजा के अमल पर रोक के लिए आवेदन भी अस्वीकार किया जाता है। हमने सुधारात्मक याचिकाओं और संबंधित दस्तावेजों का अवलोकन किया है। हमारी राय में रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा एवं अन्य के मामले में 2002 के फैसले में इस न्यायालय द्वारा प्रतिपादित मानकों के दायरे में इसमें कोई मामला नहीं बनता है। सुधारात्मक याचिकायें खारिज की जाती हैं।

22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी
 
हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने सात जनवरी को इस मामले के चारों मुजरिमों को 22 जनवरी को सवेरे सात बजे तिहाड़ जेल में मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने के लिए आवश्यक वारंट जारी किया था।  इसके बाद, नौ जनवरी को विनय और मुकेश ने सुधारात्मक याचिका दायर की थी। दो अन्य दोषियों अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता ने अभी तक सुधारात्मक याचिका दायर नहीं की है।
     
जानिए पूरा मामला

दक्षिण दिल्ली में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात में चलती बस में छह दरिंदों ने 23 वर्षीय छात्रा से सामूहिक बलात्कार के बाद बुरी तरह से जख्मी हालत में पीड़िता को सड़क पर फेंक दिया था। इस छात्रा की बाद में 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में मृत्यु हो गयी थी। इस सनसनीखेज अपराध में शामिल एक आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी जबकि एक अन्य आरोपी नाबालिग था और उसके खिलाफ किशोर न्याय कानून के तहत कार्यवाही की गयी थी। इस नाबालिग को तीन साल तक सुधार गृह में रखा गया था।

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  • Web Title:nirbhaya gangrape case Mukesh Singh writes to President for mercy